- रशीद किदवई की सलाह- मायावती के फॉर्मूले से सीख सकती थीं ममता बनर्जी, पर मौका चूक गईं
- बोले- 1977 में इंदिरा गांधी भी ऐसे ही हालात में थीं, संजय गांधी के चलते पैदा हुए थे ऐसे हालात
- अभिषेक बनर्जी से नाराजगी को बताया टीएमसी में फूट की मुख्य वजह
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी में कलह मची है. तीन दर्जन से ज्यादा सांसदों ने पाला बदल लिया है और विधायकों में भी नाराजगी है. हालात ऐसे हैं कि पार्टी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं. दलबदल करने वाले ज्यादातर नेताओं ने ममता बनर्जी के भतीजे पर सवाल उठाते हुए बागी रुख दिखाया है. उनका कहना है कि उन्हें ममता बनर्जी नहीं बल्कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के रुख से समस्या है. हालांकि ममता बनर्जी ने अब तक भतीजे को लेकर खुलकर कोई बात नहीं की है. उन्होंने बागियों को मनाने की कोशिश भी नहीं की है, ऐसे में माना जा रहा है कि वह भतीजे के ही साथ हैं.
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने ममता बनर्जी की मुश्किलों की तुलना 1977 की इंदिरा गांधी से की है. उन्होंने कहा कि 1977 में इंदिरा गांधी बुरी तरह हारी थीं और कांग्रेस से बड़ी संख्या में लोग निकले थे. अंबिका सोनी समेत कई नेताओं ने उनके बेटे संजय गांधी पर सवाल उठाते हुए पार्टी छोड़ी थी. ऐसे ही हालात अब टीएमसी के हैं. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर सवाल उठाकर नेता अलग हो रहे हैं. उनका स्पष्ट कहना है कि ममता बनर्जी से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन अभिषेक के रहते वह पार्टी में नहीं रहेंगे.
रशीद किदवई ने ANI के एक पॉडकास्ट में बात करते हुए ममता बनर्जी को मायावती से सीख लेने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि जैसे इंदिरा गांधी ने बेटे संजय का ही समर्थन किया था. उसी तरह ममता बनर्जी भी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वह मायावती से सीख सकती थीं. मायावती के भतीजे पर जब सवाल उठे तो उन्होंने तुरंत ही आकाश आनंद को निकाल दिया था. ममता बनर्जी भी ऐसा ही कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने चुप्पी ही बनाए रखी. राशिद किदवई ने कहा कि यहां पर ममता बनर्जी से चूक हुई है और उन्हें भतीजे के खिलाफ कोई ऐक्शन लेकर दिखाना था.
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