MP Police FIR: राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र में मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले के कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर FIR दर्ज होने के बाद मामला अब प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है. इस मामले में परिवादी हमीद खान ने पुलिस अधीक्षक आगर-मालवा को आवेदन भेजकर आरोपित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनके खिलाफ उच्चस्तरीय विभागीय जांच शुरू करने की मांग की है. आवेदक का दावा है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से फर्जी NDPS कार्रवाई को अंजाम दिया और साक्ष्यों से छेड़छाड़ जैसी गंभीर अनियमितताएं कीं. वहीं पुलिस अधीक्षक आगर-मालवा ने कहा है कि उन्हें अभी तक ऐसा कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है और आवेदन मिलने पर नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
कोर्ट आदेश के बाद बढ़ा विवाद
आगर-मालवा पुलिस के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ राजस्थान के डग थाने में FIR दर्ज होने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. अब इस प्रकरण में परिवादी हमीद खान ने पुलिस अधीक्षक आगर-मालवा को एक विस्तृत आवेदन भेजकर आरोपित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग उठाई है.

MP Police FIR: स्पीड पोस्ट से भेजा गया आवेदन
परिवादी का दावा है कि न्यायालय को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के तत्व दिखाई दिए, जिसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए.

MP Police FIR: आवेदन में क्या लिख है?
फर्जी NDPS कार्रवाई का लगाया आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मध्यप्रदेश पुलिस के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से एक संदिग्ध और फर्जी NDPS कार्रवाई को अंजाम दिया था. इसी कथित कार्रवाई को चुनौती देते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था.
ऐसे में आरोपित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई जरूरी है.
तत्काल निलंबन की मांग
हमीद खान द्वारा भेजे गए आवेदन में आरोपित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की गई है. आवेदन में कहा गया है कि जिन अधिकारियों पर फर्जी तरीके से NDPS प्रकरण में फंसाने और आपराधिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप हैं, उन्हें पद पर बनाए रखना जांच को प्रभावित कर सकता है. आवेदन में उल्लेख किया गया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारी वर्तमान में अपने पदों पर कार्यरत हैं. यदि उन्हें तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया तो वे अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए जांच प्रक्रिया अथवा साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं. इससे निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े हो सकते हैं.
शिकायतकर्ता पक्ष ने जताई जांच प्रभावित होने की आशंका
शिकायतकर्ता हमीद खान के पुत्र शाहीन खान ने फोन पर बातचीत में कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर इतनी बड़ी कथित फर्जी कार्रवाई की है तो यह आशंका भी बनी रहती है कि वे जांच को प्रभावित करने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज है, उनका उसी क्षेत्र में पदस्थ रहना कई तरह के सवाल खड़े करता है. ऐसे हालात में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से वहां से हटाया जाना चाहिए.

MP Police FIR: आवेदन का दूसरा पेज
उच्चस्तरीय विभागीय जांच की भी मांग
आवेदन में केवल निलंबन ही नहीं बल्कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराने की मांग भी की गई है. आवेदक का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने दूसरे राज्य के अधिकार क्षेत्र में जाकर नियमों के विपरीत कार्रवाई की. आवेदन में कहा गया है कि डग थाने में दर्ज FIR को आधार बनाकर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जानी चाहिए. जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और क्या संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रावधानों का पालन किया था या नहीं. यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
पुलिस अधीक्षक ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर आगर-मालवा के पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस प्रकार का कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि यदि कोई पत्र या आवेदन प्राप्त होता है तो उसका परीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता होने पर नियमों के अनुसार जो भी कार्रवाई बनती होगी, वह की जाएगी. एसपी ने स्पष्ट किया कि किसी भी आवेदन पर निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के आधार पर लिया जाता है.
बढ़ सकती हैं स्थानीय पुलिस की मुश्किलें
राजस्थान में दर्ज FIR के बाद पहले से ही चर्चा में चल रहे इस मामले में अब विभागीय कार्रवाई की मांग ने नया मोड़ ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवेदन प्राप्त होने के बाद पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है और जांच की दिशा किस ओर जाती है. हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आवेदन में लगाए गए सभी आरोप आवेदक के दावे हैं. मामले की अंतिम सत्यता, आरोपों की पुष्टि अथवा संबंधित अधिकारियों की दोष-निर्दोषता का निर्धारण केवल जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगा.
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