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बासमती और जैविक कपास को GI टैग कब! दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र; उठाया MP के किसानों का मुद्दा

MP News: दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को पत्र लिखकर एमपी के बासमती चावल और जैविक कपास से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की. पढ़िए पत्र में क्या कुछ लिखा.

बासमती और जैविक कपास को GI टैग कब! दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र; उठाया MP के किसानों का मुद्दा
किसानों के मुद्दे पर दिग्विजय सिंह ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र

MP News: मध्यप्रदेश के किसानों से जुड़े दो अहम मसलों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार का ध्यान खींचा है. उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर राज्य में उत्पादित बासमती चावल और जैविक कपास से जुड़ी समस्याओं पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है. दिग्विजय सिंह का कहना है कि इन दोनों मामलों में लंबे समय से अनदेखी हो रही है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर किसानों की आय और देश की निर्यात छवि पर पड़ेगा.

बासमती चावल के लिए जीआई टैग की मांग

दिग्विजय सिंह ने पत्र में लिखा है कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसान पिछले कई वर्षों से जी.आई. (Geographical Indication) टैग की मांग कर रहे हैं. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है. उनका कहना है कि जी.आई. टैग न होने के कारण अन्य राज्यों के व्यापारी मध्यप्रदेश में उगाए गए बासमती चावल को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर रहे हैं. इससे न सिर्फ राज्य की पहचान मिट रही है, बल्कि किसानों को भी उचित कीमत नहीं मिल पा रही है.

MP News: दिग्विजय सिंह का पत्र

MP News: दिग्विजय सिंह का पत्र

जैविक कपास में गड़बड़ी का आरोप

पत्र में जैविक कपास को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यापारियों, प्रमाणन एजेंसियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सामान्य बीटी कपास को ऑर्गेनिक बताकर प्रमाणित किया गया और उसका निर्यात किया गया. उन्होंने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियों से असली जैविक कपास उत्पादक किसानों को नुकसान हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ा है.

पहले भी उठाया जा चुका है मामला

दिग्विजय सिंह ने बताया कि वे इन दोनों मुद्दों को पहले भी राज्यसभा में उठा चुके हैं. इसके अलावा प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को भी पत्र लिखे गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है. इसी वजह से उन्हें एक बार फिर बैठक की मांग करनी पड़ रही है.

उच्चस्तरीय बैठक का प्रस्ताव

पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि इस बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हों. बैठक में बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग, जैविक कपास के प्रमाणन तंत्र और निर्यात प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने की बात कही गई है.

किसानों को न्याय दिलाने की अपील

दिग्विजय सिंह ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस बैठक के लिए समय तय करेगी. उनका कहना है कि इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश के किसानों को न्याय मिल सकेगा, बल्कि निर्यात व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी.

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