- राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता दिवस पर रक्षा बलों के 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है जिनमें 13 मरणोपरांत हैं
- जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जवानों ने कठुआ मुठभेड़ में आतंकियों से शेरों की तरह लड़ते हुए शहादत प्राप्त की थी
- इन चार जवानों ने भीषण गोलाबारी के दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराने का अदम्य साहस दिखाया था
Kirti Chakra Independence Day 2026 : भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के अदम्य साहस, वीरता और उत्कृष्ट सेवा के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है. इन 78 वीरता पुरस्कारों में से 13 पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किए जा रहे हैं. मरणोपरांत कीर्ति चक्र पाने वालों में जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जांबाज जवानों के नाम भी शामिल हैं.
चार शेरों की अदम्य वीरता और शहादत की गाथा
जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह, एसजीसीटी (SGCT) बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह और तारिक हुसैन वे बहादुर जवान थे, जो आतंकियों से शेरों की तरह लड़े और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया. इस भीषण मुठभेड़ में चारों जवान वीरगति को प्राप्त हो गए. उनकी बहादुरी के किस्से आज भी जम्मू-कश्मीर के कठुआ और अखनूर गांव में बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं.
कठुआ मुठभेड़ में दो खूंखार आतंकियों को किया ढेर
न्यूज एजेंसी एएनआई की 29 मार्च 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये चारों जवान कठुआ में चलाए गए एक आतंकवाद-विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए थे. इन्होंने भीषण गोलाबारी के बीच अदम्य साहस का परिचय देते हुए दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया था.
सन्याल में घुसपैठ और डीजीपी का बड़ा खुलासा
ANI से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी (DGP) नलिन प्रभात ने बताया कि 23 मार्च 2025 की शाम को सन्याल क्षेत्र में पाकिस्तानी आतंकियों के देखे जाने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस जवानों की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची, जहां उनका सामना सरहद पार से आए आतंकियों से हुआ. मुठभेड़ के दौरान बौखलाए आतंकी 4 मैगजीन, 3 आईईडी और 2 ग्रेनेड छोड़कर भाग निकले.
चार दिन तक चला सुरक्षा बलों का संयुक्त ऑपरेशन
यह पूरा ऑपरेशन लगातार चार दिनों तक चला. इस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के अलावा बीएसएफ , भारतीय सेना और सीआरपीएफ के जवानों ने पूरे इलाके की सख्त घेराबंदी कर रखी थी. ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ओर से भीषण गोलाबारी की गई.
ग्रामीणों में भारी आक्रोश: "पाकिस्तान को मिले मुंहतोड़ जवाब"
अखनूर गांव में हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगों ने आतंकवादियों और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की. ग्रामीणों ने भारी मन से कहा कि हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह की शहादत से पूरा गांव गहरे सदमे में है और उन्होंने अपना एक वीर सपूत खो दिया है. ग्रामीणों ने कहा, "हम यही मांग करते हैं कि मामले की पूरी जांच हो और भारतीय सेना पाकिस्तान को ऐसा करारा जवाब दे कि उन्हें कतई बख्शा न जाए."
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