Dhar Bhojshala Case: धार भोजशाला मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अहम सुनवाई हुई. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस सुनवाई में कोर्ट ने पक्ष और विपक्ष की ओर से आए सुझावों और आपत्तियों को सुना. मामले में अगली सुनवाई की तारीख 2 अप्रैल तय की गई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत इस मामले में शीघ्र सुनवाई कर फैसला लिया जाना है. इससे पहले 23 फरवरी को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर आपत्ति और सुझाव दाखिल करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने सभी पक्षों को समान अवसर देते हुए कहा था कि रिपोर्ट से जुड़े सभी पहलुओं पर उनकी बात सुनी जाएगी.
100 दिनों तक हुआ ASI का सर्वे
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से पूरे 100 दिनों तक धार भोजशाला परिसर में विस्तृत जांच और सर्वे किया था. इस दौरान ऐतिहासिक, पुरातात्विक और संरचनात्मक तथ्यों से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे बाद में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को निर्देश दिए थे कि इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई को आगे बढ़ाया जाए. इसी आदेश के अनुपालन में हाईकोर्ट लगातार इस मामले की सुनवाई कर रहा है और समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है.
रिपोर्ट दोबारा खोलने की जरूरत नहीं
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि ASI की रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं. ऐसी स्थिति में रिपोर्ट को दोबारा कोर्ट के समक्ष खोलने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड में मौजूद मानते हुए आगे की प्रक्रिया जारी रखने का निर्णय लिया.
कोर्ट स्वयं करेगा स्थल निरीक्षण
सोमवार की सुनवाई में कोर्ट ने यह भी कहा कि वह स्वयं भोजशाला स्थल का निरीक्षण करेगा. इसके लिए 2 अप्रैल से पहले कोर्ट की टीम मौके पर जाएगी. इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति को स्थल पर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी. कोर्ट का उद्देश्य स्थल की वास्तविक स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से समझना बताया गया.
पांच याचिकाएं एक साथ सुनवाई में
इस मामले में कुल पांच याचिकाएं एक साथ चल रही हैं. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और कहा कि यदि अभी भी किसी पक्ष को अतिरिक्त सुझाव या आपत्ति दर्ज करानी है, तो वह नियत समय के भीतर ऐसा कर सकता है. हाईकोर्ट ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इस संवेदनशील मामले में जल्द से जल्द सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाना आवश्यक है.
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