मध्यप्रदेश में डॉ.मोहन यादव के कमान संभालने के बाद हुए 4 विधानसभा उपचुनावों के नतीजे राज्य की सियासत में एक बड़ा संदेश दे रहे हैं. प्रशासनिक अमले के पूरे जोर और सत्ता के प्रभाव के बावजूद भाजपा इन चुनावों में 50 फीसदी का ही स्ट्राइक रेट हासिल कर सकी. 2 सीटों पर भाजपा को जीत मिली, तो 2 महत्वपूर्ण सीटें विपक्ष के खाते में चली गईं. इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब मुकाबला एकतरफा नहीं रहा और उपचुनावों में भी कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है.जिन चार सीटों पर चुनाव हुआ है वे सीटें हैं अमरवाड़ा, बुधनी, विजयपुर और दतिया. दतिया उपचुनाव के नतीजे के बहाने इस रिपोर्ट में जानते हैं कहां क्या परिणाम रहा और इसके क्या सियासी मायने हैं?
अमरवाड़ा: 3,000 से भी कम वोटों से बची साख
छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा सीट पर जुलाई 2024 में हुआ उपचुनाव बेहद खींचतान भरा रहा. कांग्रेस विधायक कमलेश शाह के पाला बदलकर भाजपा में शामिल होने से खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने उन्हें ही प्रत्याशी बनाया. कड़े मुकाबले में कमलेश शाह ने कांग्रेस के धीरेन शाह को महज 3,027 वोटों के अंतर से हराया. कमलेश शाह को 83,105 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ने 80,078 वोट हासिल किए. तब इस नजदीकी जीत ने साफ कर दिया कि दलबदल के बाद राह उतनी आसान नहीं थी.
बुधनी: शिवराज के गढ़ में घटी जीत की बढ़त
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद खाली हुई बुधनी सीट पर नवंबर 2024 में चुनाव हुआ. भाजपा ने अपने पुराने चेहरे रमाकांत भार्गव पर दांव लगाया, जिन्होंने कांग्रेस के राजकुमार पटेल को 13,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया. रमाकांत भार्गव को 1,02,000 से ज्यादा वोट मिले. हालांकि भाजपा अपना यह पारंपरिक किला बचाने में तो कामयाब रही, लेकिन 2023 के आम चुनाव में शिवराज सिंह चौहान की 1,04,000 से अधिक वोटों की रिकॉर्ड जीत की तुलना में इस बार जीत का मार्जिन काफी कम हो गया.
विजयपुर: कैबिनेट मंत्री की हार बनी बड़ा झटका
श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव नवंबर 2024 में भाजपा के लिए सबसे असहज करने वाला साबित हुआ. कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और मोहन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने रामनिवास रावत को जनता ने नकार दिया. कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को 7,300 से अधिक वोटों के अंतर से मात दी. मुकेश मल्होत्रा को 1,00,000 से अधिक वोट मिले, जबकि मौजूदा मंत्री रामनिवास रावत 93,000 के आसपास वोटों पर सिमट गए. किसी कैबिनेट मंत्री का उपचुनाव हारना सरकार और संगठन दोनों के लिए बड़ा झटका माना गया.
दतिया: विपक्ष ने कायम रखा अपना कब्जा
कानूनी प्रक्रिया और तत्कालीन स्थितियों के तहत खाली हुई दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा को नाकामी हाथ लगी. इस सीट पर हुए कड़े राजनीतिक मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी. उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक मतों से शिकस्त देकर क्षेत्र में कांग्रे की पकड़ को मजबूती दी. हालांकि यहां जीत-हार का अंतर 2023 के चुनाव के मुकाबले कम ही रहा है. लेकिन इस जीत के साथ ही उपचुनावों में कांग्रेस ने अपनी बढ़त को 2 सीटों तक पहुंचा दिया.
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उपचुनावों के आंकड़ों का सियासी संदेश
इन 4 उपचुनावों के नतीजे बताते हैं कि केवल दलबदल कराने या सत्ता के रसूख के बल पर जीत हासिल करना अब आसान नहीं रह गया है. जहां-जहां नए सियासी समीकरण थोपने की कोशिश हुई, वहां जनता ने उन्हें आसानी से स्वीकार नहीं किया. विजयपुर में मौजूदा मंत्री की हार और अमरवाड़ा में बेहद मामूली अंतर से मिली जीत यह साफ करती है कि स्थानीय जनता के मुद्दे और मतदाताओं की नाराजगी सत्ता के प्रभाव पर भारी पड़ी है. दूसरी तरफ, 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों की करारी हार के बाद 4 में से 2 सीटें जीतकर कांग्रेस ने एक मजबूत वापसी दर्ज की है, जिससे उसके जमीनी कार्यकर्ताओं को नया जोश मिला है. ये आंकड़े भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ पूरी सियासत को यह सीधा संदेश देते हैं कि चुनाव जीतने के लिए केवल सत्ता का रसूख काफी नहीं है, बल्कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए स्थानीय असंतोष को साधना और जनभावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी है.
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