आप याद किजिए 1985 की हॉकी चैंपियन ट्रॉफी का मैच. पर्थ में भारत 1-5 से पिछड़ रहा है. फिर एक सेंटर फॉर्वड आता है जो अपने डी से गोल को ड्रिबल करके के विरोधी टीम जर्मनी के डी के अंदर पहुंचता है और गोल मारता है. भारत ने 6 मिनट में चार गोल मारे थे और भारत जीता था और जिसके हीरो थे परगट सिंह.
यही कहानी उन्होंने कराची में दोहराई जब उन्होंने नीदरलैंड के खिलाफ गोल किया. एक सेंटर फॉर्वड के लिए ये बहुत बड़ी बात थी. परगट सिंह ने 1992 और 1996 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कैप्टन रहे.
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उसके बाद परगट राजनीति में आए. पहले अकाली दल में गए फिर वहां से निकाले गए और उसके बाद कांग्रेस में आए और अभी जालंधर कैंट से विधायक हैं.

परगट सिंह की यह तस्वीर 80 के दशक की है.
Photo Credit: X@PargatSOfficial
परगट ही क्यों बने अध्यक्ष?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि परगट ही क्यों? तो सबसे बड़ा जवाब है कि परगट किसी कैंप से नहीं जुड़े रहे. पंजाब में कांग्रेस के कई धड़े हैं- चन्नी का अपना एक कैंप है, अध्यक्ष राजा वडिंग का अपना एक गुट था क्योंकि वो चार साल से अध्यक्ष रहे मगर परगट सिंह अकेले रहे.
इंडिया टीम के कप्तान रहने की वजह से उनको मालूम है कि कैसे हर टीम के खिलाड़ी के इगो को शांत करना है. परगट एक कैप्टन के रूप में सबको साथ लेकर चलेंगे.
राजा वडिंग ने खुद अपना इस्तीफा ऑफर किया. उसके बाद बहुत सारे नाम आए कि किसी हिंदू को बनाया जाएगा तब विजय इंदर सिंगला का भी नाम आया मगर उन्होंने खुद इसको खारिज कर दिया था.
अब जब परगट सिंह का नाम आया तब सब चौंक गए मगर NDTV ने आपको पहले ही इसका संकेत दे दिया था.

Photo Credit: X@PargatSOfficial
परगट सिंह को क्या फायदा मिला?
परगट सिंह के पक्ष में जो बातें गईं, उनमें पहली बात तो यही है कि वो किसी कैंप में नहीं हैं. दूसरा कि भारतीय टीम के पूर्व कप्तान होने के नाते पंजाब में लोग उन्हें सम्मान देते हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है.
वो कहावत है कि वन से अ कैप्टन ऑलवेज अ कैप्टन. पंजाब के कई जानकार कह रहे हैं कि ये चन्नी की जीत है क्योंकि वो जालंधर से सांसद हैं और परगट सिंह वहीं कैंट से विधायक.
मगर ऐसा नहीं है. परगट अपने मन से कांग्रेस को आगे ले जाएंगे क्योंकि उनके पास अपनी रणनीति होगी. पंजाब की कहानी यहीं खत्म नहीं हो रही है. जब से सचिन पायलट पंजाब के प्रभारी बने हैं उन्होंने पूरा फेरबदल कर दिया है.
सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस के पंचायत से लेकर युवा कांग्रेस तक से बैठक की और फिर ये निर्णय लिया. अब पंजाब में चेहरा राहुल और सचिन पायलट हैं जिनके नाम पर वोट मांगा जाएगा और राहुल गांधी की पंजाब यात्रा जल्द ही अमृतसर से शुरू होगी जिसमें प्रियंका गांधी भी शामिल होंगी. कांग्रेस ने पंजाब की चुनावी लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है.
यह भी पढ़ेंः परगट सिंह कौन हैं, जिन्हें कांग्रेस ने बनाया पंजाब का अध्यक्ष, 1998 में मिला था पद्म श्री
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