एमपी के दतिया से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो न सिर्फ दिल को छूती है बल्कि रिश्तों की नई शुरुआत की उम्मीद भी जगाती है. कोर्ट मैरिज के बाद तलाक लेकर अलग हो चुके पति-पत्नी ने आखिरकार अपनी दो बेटियों के भविष्य के लिए फिर से एक-दूसरे का हाथ थाम लिया. महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल और काउंसलिंग ने इस टूटे परिवार को दोबारा जोड़ दिया.
मनोज गोस्वामी की रिपोर्ट...
10 साल पहले लिया था तलाक
दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय निकिता (परिवर्तित नाम) ने करीब 10 साल पहले अपने पति से कोर्ट मैरिज की थी. लेकिन कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई और बात तलाक तक पहुंच गई. तलाक के बाद निकिता अपनी दोनों बेटियों को लेकर मायके में रहने लगीं. परिवार की जिम्मेदारी उनके बीमार और वृद्ध पिता पर आ गई, जो मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे थे.
आर्थिक परेशानी और बेटियों की चिंता
समय बीतने के साथ आर्थिक हालात और कमजोर होते गए. बढ़ती महंगाई और सीमित आय में बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर निकिता की चिंता बढ़ती रही. वह चाहती थीं कि उनकी बेटियों को बेहतर परवरिश और सुरक्षित भविष्य मिले, लेकिन हालात उनके खिलाफ थे.
जनसुनवाई में मांगी मदद
अपनी परेशानी लेकर निकिता दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचीं और सहायता की गुहार लगाई. इसके बाद मामला महिला एवं बाल विकास विभाग के सखी वन स्टॉप सेंटर को सौंपा गया. यहां की टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोनों पक्षों को बातचीत के लिए तैयार किया.
काउंसलिंग से बदला फैसला
सखी सेंटर में पति-पत्नी की कई दौर की काउंसलिंग की गई. बातचीत के दौरान दोनों ने पुरानी बातों को किनारे रखकर अपनी बेटियों के भविष्य के बारे में सोचना शुरू किया. धीरे-धीरे दोनों के बीच की दूरियां कम हुईं और उन्होंने साथ रहने का फैसला कर लिया.
दोबारा साथ रहने का लिया फैसला
काउंसलिंग के बाद पति ने निकिता और अपनी दोनों बेटियों को फिर से स्वीकार कर लिया. दोनों ने आपसी सहमति से एक बार फिर परिवार के रूप में साथ रहने का निर्णय लिया. यह फैसला उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनकी बच्चियों के लिए भी बेहद अहम साबित हुआ.
बेटियों के चेहरे पर लौटी खुशी
इस पुनर्मिलन का सबसे ज्यादा असर दोनों बेटियों पर देखने को मिला. लंबे समय बाद उन्हें अपने माता-पिता एक साथ मिले, जिससे उनके चेहरे पर खुशी साफ नजर आई. परिवार के इस मिलन ने पूरे माहौल को भावुक बना दिया. इस पूरे मामले में सखी वन स्टॉप सेंटर की भूमिका अहम रही. काउंसलिंग और सही मार्गदर्शन के जरिए उन्होंने एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ने का काम किया. जिले में इस पहल की काफी सराहना हो रही है.
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