- शुभांगी मिश्रा ने NEET में असफल रहने के बाद भी हार नहीं मानी और पांच सरकारी नौकरियां एक साथ हासिल कीं
- उन्होंने बिना महंगी कोचिंग के यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खुद को तैयार किया
- शुभांगी का चयन पुलिस कांस्टेबल, एसएससी स्टेनोग्राफर, सब-इंस्पेक्टर, सहायक उपनिरीक्षक और सूबेदार पदों पर हुआ
Success Story: मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल शुभांगी मिश्रा की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. वह कभी डॉक्टर बनना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने NEET की तैयारी भी की थी, लेकिन MBBS की सीट हासिल नहीं हो सकी. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपना लक्ष्य बदला. फिर सही दिशा में प्रयास करते हुए एक के बाद एक 5 सरकारी नौकरियां हासिल कर लीं. वो भी महज 21 साल की उम्र में. वर्तमान में शुभांगी मिश्रा शहडोल पुलिस लाइन में कांस्टेबल के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं.

Success Story shubhangi mishra clears five government exams mp police constable
पिता हेड कांस्टेबल, बेटी ने मान बढ़ाया
एक साथ 5 सरकारी नौकरियों में चयन कराकर सभी को चौंका देने वाली शुभांगी मिश्रा मूल रूप से मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के शाहपुर गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता श्याम कुमार मिश्रा भी मध्य प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और वर्तमान में शहडोल आईजी कार्यालय में पदस्थ हैं. बेटी की इस अभूतपूर्व सफलता पर पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है. उनका कहना है कि यदि बेटियों को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया जाए, तो वे भी कमाल करके दिखा सकती हैं.
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बिना महंगी कोचिंग के पाया यह मुकाम
एनडीटीवी से खास बातचीत में शुभांगी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग संस्थान की मदद के इन पांचों प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है. उन्होंने 8 जून 2026 को मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर जॉइन किया है. एमपी पुलिस कांस्टेबल के अलावा उनका चयन चार अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी हो चुका है. जिनमें एसएससी स्टेनोग्राफर, मध्य प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर, सहायक उपनिरीक्षक (ASI-स्टेनो) और सूबेदार पद शामिल है.
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NEET में असफलता से शुरू हुआ नया सफर
शुभांगी बताती हैं कि उन्होंने घर पर रहकर यूट्यूब के माध्यम से अपनी तैयारी की. उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था और उन्होंने हर प्रतियोगी परीक्षा में अपना सौ फीसदी योगदान दिया, जिसका परिणाम यह रहा कि एक साथ पांच परीक्षाएं क्रैक हो गईं. 12वीं के बाद डॉक्टर बनने का सपना लेकर उन्होंने NEET की परीक्षा दी. पहले प्रयास में उन्हें 400 और दूसरे प्रयास में 570 अंक प्राप्त हुए, लेकिन कट-ऑफ के कारण MBBS की सीट नहीं मिल सकी. यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने अपना लक्ष्य बदला और एमपी पुलिस कांस्टेबल बनने का मार्ग चुना.

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प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की सेल्फ स्टडी
दिशा बदलने के बाद शुभांगी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की गहन तैयारी शुरू की और रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की. यूट्यूब, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सेल्फ स्टडी को ही उन्होंने अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया. वे मानती हैं कि "असफलता कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह एक नई शुरुआत का अवसर होती है." अब उनका अगला और बड़ा सपना UPSC या राज्य PCS परीक्षा क्रैक करके एक कुशल सिविल सेवक बनना है, जिसके लिए वे निरंतर अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं.
शुभांगी मिश्रा कहती हैं कि बचपन से सिविल सेवा में जाने का सपना था. मैंने देखा कि यूपीएससी की तैयारी से पहले कोई अन्य जॉब हासिल कर लिया जाए तो यूपीएससी की तैयारी करने में आसानी रहती है.
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