- चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर इस सदी के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंचकर बाढ़ के गंभीर हालात पैदा कर चुका है.
- प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले के प्रमुख संपर्क मार्ग और कई रेलवे ट्रेनों को बंद कर दिया है.
- राहत कार्यों के लिए दो हेलीकॉप्टर तैनात कर रामघाट और यमुना किनारे के इलाकों का हवाई सर्वे शुरू किया गया है.
एमपी के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप लोगों की चिंता बढ़ा रहा है. लगातार बारिश के बाद नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जिले के कई प्रमुख संपर्क मार्गों को बंद करना पड़ा है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आवागमन प्रभावित हो गया है, जबकि कई गांवों और निचले इलाकों में पानी घुसने से लोग फंस गए हैं. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज करते हुए हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वे शुरू कर दिया है. एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार राहत अभियान में जुटी हैं.
धीरेन्द्र शुक्ला की रिपोर्ट...
बाढ़ के चलते जिले के संपर्क मार्ग बंद
चित्रकूट में बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जिले से बाहर जाने वाले प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया है. बांदा, कौशांबी, प्रयागराज, झांसी और फतेहपुर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है. पुलिस की टीमें सभी सीमा बिंदुओं पर तैनात हैं और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है. प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है.
रेल यातायात पर भी पड़ा असर
बाढ़ का असर सड़क मार्ग के साथ-साथ रेल यातायात पर भी दिखाई दे रहा है. चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण ट्रेनों को अत्यंत धीमी गति से पुल पार कराया जा रहा है. वहीं मानिकपुर-सतना रेलखंड पर कई ट्रेनों को एहतियातन रोककर रखा गया है. रेलवे प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है.
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— Chitrakoot Police (@chitrakootpol) August 29, 2026
मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर से रामघाट एवं निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है।
इस स्थिति के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक चित्रकूट श्री अरुण कुमार सिंह के निर्देशन में चित्रकूट पुलिस द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई। pic.twitter.com/Eq6kjMbJej
हेलीकॉप्टर से शुरू हुआ हवाई सर्वे
बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के गंभीर हालात को देखते हुए सरकार ने राहत कार्यों के लिए दो हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं. हेलीकॉप्टर के जरिए रामघाट और यमुना किनारे के इलाकों का हवाई सर्वे किया जा रहा है. प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर राहत सामग्री और बचाव संसाधनों को पहुंचाने की रणनीति बना रहा है.
रामघाट समेत कई इलाके पानी में घिरे
मंदाकिनी नदी के उफान पर होने से रामघाट और आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया है. कई घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है. जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि कुछ परिवार अब भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं.
इस सदी के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंची मंदाकिनी
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मंदाकिनी नदी का जलस्तर इस सदी के सबसे ऊंचे स्तर को छू चुका है. पिछले कई घंटों तक लगातार बढ़ने के बाद फिलहाल जलस्तर में स्थिरता देखी गई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. मध्य प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में जारी बारिश के कारण आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
खतरे के निशान से 9 मीटर ऊपर बह रही नदी
रामघाट पर मंदाकिनी नदी का खतरे का निशान 126 मीटर माना जाता है, जबकि वर्तमान में जलस्तर 135 मीटर से अधिक पहुंच गया है. नदी का बहाव बेहद तेज है, जिससे राहत और बचाव अभियान चलाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की लगातार चेतावनी दे रहा है.
ड्रोन कैमरों से हो रही निगरानी
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए चित्रकूट पुलिस ने ड्रोन कैमरों का सहारा लिया है. रामघाट, निर्मोही अखाड़ा और अन्य प्रभावित इलाकों में ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है. इससे जलभराव वाले क्षेत्रों, बंद रास्तों और राहत कार्यों की स्थिति का वास्तविक समय में आकलन किया जा रहा है. पुलिस का मानना है कि ड्रोन निगरानी से राहत अभियान अधिक प्रभावी हो रहा है.
मंदिरों और घरों में फंसे लोगों का रेस्क्यू
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से मतगजेंद्रनाथ मंदिर समेत नदी के बीच और किनारे स्थित कई मंदिर तथा मकान पानी से घिर गए हैं. ऐसे स्थानों पर फंसे लोगों को मोटर बोट और नावों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है. एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई हैं.
अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
चित्रकूटधाम मंडल के कमिश्नर अजीत कुमार और डीआईजी राजेश एस ने रामघाट पहुंचकर हालात का जायजा लिया. अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और मौके पर मौजूद टीमों को जरूरी निर्देश दिए. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ में फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता है.
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ वाले क्षेत्रों और गहरे पानी के पास न जाएं. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डायल-112 पर सूचना देने को कहा गया है. प्रशासन लगातार अलर्ट जारी कर रहा है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है.
2003 से भी गंभीर बताई जा रही बाढ़
प्रशासन के अनुसार वर्तमान बाढ़ वर्ष 2003 और पिछले वर्ष की बाढ़ से भी अधिक गंभीर मानी जा रही है. नदी किनारे बसे गांवों, घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो.
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