विज्ञापन

चंबल डायरी: बीहड़ का आखिरी 'हाईटेक डाकू' जिसकी खुद की 'आर्मी' थी ! तय थी मेजर, कैप्टन और सूबेदार तक रैंक

चंबल डायरी की चौथी किस्त में आज कहानी चंबल के आखिरी और पहले हाईटेक डकैत निर्भय गुर्जर की. बीहड़ में खुद की समानांतर सेना चलाने वाले इस डकैत ने अपने गिरोह में बकायदा मेजर, कैप्टन और सूबेदार तक के रैंक तय कर रखे थे. जानिए तंगहाली और छोटी चोरियों से लेकर बीहड़ का 'सुप्रीम कमांडर' बनने और फिर एसटीएफ एनकाउंटर में उसके खात्मे की पूरी कहानी.

चंबल डायरी: बीहड़ का आखिरी 'हाईटेक डाकू' जिसकी खुद की 'आर्मी' थी ! तय थी मेजर, कैप्टन और सूबेदार तक रैंक

चंबल के बीहड़ों में यूं तो कई दशकों तक बागियों और डकैतों का राज रहा, लेकिन 21वीं सदी की शुरुआत में इस बीहड़ में एक ऐसा डाकू उभरा जिसने अपराध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया. 'चंबल डायरी' की चौथी किस्त में आज कहानी करीब 2.5 लाख रुपये के इनामी डकैत निर्भय सिंह गुर्जर की. चंबल के इतिहास में उसे 'आखिरी बड़ा डाकू' और पहला 'हाईटेक डकैत' कहा जाता है, जिसका खौफ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में इस कदर था कि पुलिस भी उसके नेटवर्क से हैरान थी. वह खुद को 'चक्रवर्ती सम्राट' बनाने की सनक में अपनी खुद की फौज चलाता था, आधुनिक हथियारों और सैटेलाइट फोन जैसे गैजेट्स का इस्तेमाल करता था और राजनीतिक रसूख भी रखता था. हालांकि महिलाओं के प्रति उसकी कमजोरी ही आखिरकार उसके पतन का कारण बनी और उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साल 2005 में एक भीषण मुठभेड़ में उसका अंत कर दिया. आगे बढ़ने से पहले ये भी जान लीजिए कि निर्भय के ऊपर यूपी और एमपी के विभिन्न जिलों में लूट, अपहरण, हत्या और डकैती के 200 से अधिक मामले दर्ज थे.

गरीबी, छोटी चोरियां और बीहड़ में एंट्री

निर्भय गुर्जर का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक बेहद गरीब किसान परिवार में हुआ था.उसके पिता मान सिंह के पास सात-आठ बीघा जमीन थी, लेकिन उस जमाने में सिंचाई की सुविधा नहीं थी तो खेती से खास आमदनी नहीं होती थी. उस पर सात लोगों के परिवार को चलाने का खर्च उठाना बेहद मुश्किल था. ऐसी तंगहाली और जल्दी पैसा कमाने की चाहत में वह शुरुआत में जालौन और आस-पास के इलाकों में छोटी-मोटी चोरियां और लूटपाट करने लगा.इसी दौरान स्थानीय पुलिस और दुश्मनों के डर से उसने चंबल के बीहड़ों की शरण ली.

बीहड़ पहुंचते ही वह उस दौर के सबसे खूंखार डकैत भाईयों, लालाराम और श्रीराम के गैंग में शामिल हो गया. इसी गैंग में निर्भय ने न सिर्फ आधुनिक हथियार चलाना सीखा, बल्कि चंबल के दुर्गम रास्तों और पुलिस से बचने की रणनीतियों को भी अपनी उंगलियों पर रट लिया.

साल 2000 में लालाराम के मारे जाने के बाद, पुराने गैंग बिखर गए और निर्भय ने इस खालीपन का फायदा उठाकर अपना खुद का एक बड़ा और हाईटेक गिरोह खड़ा कर लिया. 

खुद की 'सेना' और बादशाहत की चाहत

निर्भय गुर्जर आम डकैतों की तरह सिर्फ छोटी-मोटी लूटपाट तक सीमित नहीं रहना चाहता था. वह चंबल के पूरे इलाके पर अपना राज कायम करना चाहता था. इसी सनक के चलते उसने अपने गिरोह का नाम 'हिंदुस्तान पीपल्स साल्वेशन आर्मी' (HPSA) रखा था. वह खुद को इस तथाकथित सेना का सुप्रीम कमांडर कहता था. उसने अपने गिरोह के सदस्यों के लिए बकायदा सैन्य रैंक (जैसे सूबेदार, कैप्टन और मेजर) तय कर रखी थी. गिरोह के सभी सदस्य सेना जैसी वर्दी पहनते थे.

चंबल का पहला 'हाईटेक डाकू'

पारंपरिक हथियारों और मुखबिरों पर निर्भर रहने वाले पुराने डाकुओं से अलग निर्भय गुर्जर तकनीक का दीवाना था. यही वजह है कि उसे चंबल का पहला हाईटेक डाकू कहा गया.

आधुनिक संचार उपकरण: जब चंबल में मोबाइल नेटवर्क नया-नया था, तब निर्भय गुर्जर सैटेलाइट फोन, हाई-फ़्रीक्वेंसी वॉकी-टॉकी और मोबाइल जैमर का इस्तेमाल करता था. इससे पुलिस के लिए उसकी लोकेशन ट्रेस करना नामुमकिन हो जाता था.

हथियारों का जखीरा: उसके गिरोह के पास एके-47 (AK-47), एसएलआर (SLAR) और नाइट विजन दूरबीन जैसे आधुनिक उपकरण थे, जो उस दौर में स्थानीय पुलिस के पास भी सीमित संख्या में होते थे.

लक्जरी लाइफस्टाइल: बीहड़ में रहते हुए भी वह ब्रांडेड शराब, महंगे परफ्यूम और आधुनिक सुख-सुविधाओं का शौकीन था.

सफेदपोशों से सांठगांठ और चुनावों में 'फरमान'

निर्भय गुर्जर का रसूख सिर्फ बीहड़ों तक सीमित नहीं था. उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश के इटावा, जालौन और मध्य प्रदेश के भिंड-मुरैना के राजनीतिक गलियारों तक फैला था. वह चुनावों में अपनी पसंद के उम्मीदवारों को जिताने के लिए सीधे 'फरमान' जारी करता था. साल 2000 के दशक में हुए पंचायत और विधानसभा चुनावों में कई बड़े नेताओं ने उसकी मदद ली थी. बदले में निर्भय को पुलिसिया कार्रवाई से एडवांस इनपुट और अत्याधुनिक हथियारों की रसद मिलती थी. उसकी डायरी से कई सफेदपोशों और तत्कालीन विधायकों के नाम सामने आए थे, जो उसे संरक्षण देते थे.
ये भी पढ़ें: चंबल डायरी: भारत की पहली महिला डकैत जो पहले डांसर थी, एक हाथ कटने पर भी बाएं हाथ से लगाती थी निशाना

लड़कियों का शौक और गिरोह में 'डिप्टी कमांडर'

निर्भय गुर्जर की रंगीन मिजाजी ही उसके खात्मे की सबसे बड़ी वजह बनी. उसने बीहड़ में रहते हुए तीन शादियां की थीं, जिनमें मुन्नी देवी, नीलम गुप्ता और सरला जाटव शामिल थीं. निर्भय अक्सर कम उम्र की लड़कियों का अपहरण करता था और फिर जबरन उनसे शादी रचा लेता था. उसकी आखिरी पत्नी सरला जाटव  जिसकी उम्र करीब 20 वर्ष थी उसे उसने बकायदा गिरोह का 'डिप्टी कमांडर' नियुक्त किया था. निर्भय ने उसे एके-56 (AK-56) थमा दिया था.

निर्भय अपनी तीनों पत्नियों को सलवार-सूट नहीं पहनने देता था. इसके बदले वह उन्हें हर समय जींस-टॉप पहनने के लिए मजबूर करता था.  निर्भय का एक दत्तक पुत्र था श्याम जाटव. ऐसा कहा जाता है कि उसने अपने दत्तक पुत्र श्याम जाटव की शादी सरला जाटव से कराई थी, लेकिन खुद श्याम ने उसे निर्भय के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. जिसके बाद श्याम ने बगावत कर दी और निर्भय की प्रेमिका नीलम को लेकर भाग गया.

दोनों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया और निर्भय के ठिकानों की जानकारी दी. यहीं से निर्भय के अंत की शुरुआत हुई.
ये भी पढ़ें: चंबल डायरी: बीहड़ों का सबसे रईस डकैत जिसने 250 से ज्यादा किडनैपिंग की, जेपी ने कहा- उसे फांसी हुई तो मैं मर जाऊंगा

एसटीएफ का एक्शन और अंतिम एनकाउंटर

साल 2005 तक निर्भय गुर्जर का आतंक अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका था. इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसके खात्मे के लिए एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया. एसटीएफ ने सबसे पहले निर्भय के नेटवर्क को तोड़ा और उसकी पत्नी सरला जाटव समेत कई मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार या ढेर कर दिया. चारों तरफ से घिरने के बाद, 7 नवंबर 2005 की रात उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के चकरनगर इलाके में एसटीएफ और निर्भय गुर्जर के बीच भीषण मुठभेड़ हुई. इस एनकाउंटर में चंबल का यह आखिरी हाईटेक डाकू मारा गया.
ये भी पढ़ें: चंबल डायरी: जिसके खौफ ने 'शोले' के गब्बर को जन्म दिया, जानिए चंबल के उस असली डकैत की पूरी कहानी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Chambal Bandit Hunt, Chambal Bandit Love Affair, Madhya Paradeh News, Madhya Pradesh Police
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com