CDV Virus Alert: मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से बाघों की मौत के बाद वन्यजीव संरक्षण एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. इसका असर अब ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान में भी दिखाई दे रहा है, जहां बाघ, शेर, बब्बर शेर और तेंदुओं समेत सभी बड़े मांसाहारी वन्यजीवों की विशेष निगरानी की जा रही है. सबसे ज्यादा सावधानी अप्रैल में जन्मे सफेद बाघिन मीरा के तीन नन्हे शावकों को लेकर बरती जा रही है. संक्रमण के खतरे को देखते हुए तीनों शावकों को पूरी तरह आइसोलेशन में रखा गया है और फिलहाल उन्हें पर्यटकों के लिए प्रदर्शित नहीं किया जाएगा. जू प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी के सभी प्रोटोकॉल सख्ती से लागू कर दिए हैं.
कान्हा में बाघों की मौत के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल के दिनों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. इस वायरस के खतरे को देखते हुए प्रदेश के अन्य वन्यजीव संस्थानों और प्राणी उद्यानों में भी एहतियाती उपाय शुरू कर दिए गए हैं. ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान में भी विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है. यहां मौजूद सभी बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण की आशंका को समय रहते रोका जा सके.

Gwalior Zoo News: ग्वालियर जू अलर्ट पर
मीरा के तीनों शावकों को रखा गया आइसोलेशन में
गांधी प्राणी उद्यान में 5 अप्रैल को सफेद बाघिन मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया था. इनमें दो रॉयल बंगाल टाइगर और एक सफेद बाघ शावक शामिल है. करीब दो महीने के हो चुके ये तीनों शावक फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं. हालांकि संक्रमण के जोखिम को देखते हुए उन्हें अलग निगरानी क्षेत्र में रखा गया है. जू प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल शावकों को सामान्य प्रदर्शन क्षेत्र में नहीं लाया जाएगा और पर्यटकों को उनके दर्शन की अनुमति भी नहीं दी जाएगी.

Gwalior Zoo News: शावक आइसोलेशन में
पर्यटकों की उम्मीदों को लगा झटका
शावकों के जन्म के बाद पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह था. उम्मीद की जा रही थी कि मौसम अनुकूल होने पर जल्द ही उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन क्षेत्र में लाया जाएगा. लेकिन कान्हा में बाघिन और उसके शावकों की मौत के बाद जू प्रशासन कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है. इसी कारण तीनों शावकों को फिलहाल नियंत्रित वातावरण में रखा गया है. सप्ताह में केवल एक सीमित अवधि के दौरान उन्हें प्राकृतिक गतिविधियों और एक्सरसाइज के लिए नियंत्रित रूप से बाहर निकाला जाता है.
प्राणी उद्यान में लागू किए गए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल
संक्रमण की आशंका को देखते हुए जू प्रबंधन ने कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं. अब बाड़ों और हाउसिंग क्षेत्रों में प्रवेश से पहले नियमित डिसइन्फेक्शन किया जा रहा है. पशु चिकित्सकों, कीपर्स और कर्मचारियों के लिए भी विशेष सावधानियां अनिवार्य कर दी गई हैं. अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगाई गई है और बाड़ों की सफाई तथा सैनिटाइजेशन को पहले से अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है.
आवारा कुत्तों से फैल सकता है संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से संक्रमित श्वानों से वन्यजीवों तक पहुंच सकता है. यह वायरस जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है और विशेष रूप से शावकों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है. इसी वजह से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की एडवायजरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. वन्यजीवों के बाहरी संपर्क को न्यूनतम रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
24 घंटे स्वास्थ्य निगरानी पर जोर
गांधी प्राणी उद्यान के नोडल अधिकारी एवं पशु चिकित्सक डॉ. उपेंद्र यादव के अनुसार तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में हैं. उन्होंने बताया कि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किए जा रहे हैं और किसी भी असामान्य लक्षण पर तत्काल चिकित्सकीय जांच की जाती है. साथ ही सफेद बाघिन मीरा को भी पौष्टिक और संतुलित आहार दिया जा रहा है, ताकि वह स्वस्थ रह सके और शावकों की उचित देखभाल कर पाए.
भोजन की गुणवत्ता पर भी विशेष नजर
जू प्रशासन ने केवल स्वास्थ्य निगरानी ही नहीं बढ़ाई, बल्कि मांसाहारी वन्यजीवों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी अतिरिक्त ध्यान देना शुरू कर दिया है. मीट की गुणवत्ता, भंडारण और वितरण प्रक्रिया की नियमित जांच की जा रही है. भोजन तैयार करने से लेकर उसे जानवरों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है. पशु चिकित्सकों की टीम रोजाना बाघ, शेर, तेंदुआ और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के व्यवहार, भूख, गतिविधियों और स्वास्थ्य की समीक्षा कर रही है.
जू प्रशासन नहीं लेना चाहता कोई जोखिम
गांधी प्राणी उद्यान प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता सभी वन्यजीवों को संक्रमण से सुरक्षित रखना है. इसी वजह से बाघों, शेरों और तेंदुओं की स्वास्थ्य निगरानी लगातार जारी रहेगी. विशेष रूप से मीरा के तीनों शावकों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि वे स्वस्थ रहें और भविष्य में सुरक्षित रूप से पर्यटकों के सामने लाए जा सकें.
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