भोपाल ATS ने आतंकी नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसते हुए तीन दिनों के भीतर तीसरी बड़ी गिरफ्तारी की है. इस बार एजेंसी ने राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव को पकड़ा है, जिसे जांच में सेकंड हैंड कमांडर की भूमिका में बताया जा रहा है. ATS के मुताबिक, वह न सिर्फ आतंकी साजिशों को तैयार करता था, बल्कि पूरे नेटवर्क को एक्टिव रखने में भी अहम कड़ी था.
राजस्थान से दबोचा गया शाकिर मेव
मध्य प्रदेश एटीएस की टीम ने शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया. जांच एजेंसी के अनुसार, वह लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था और आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था. गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक के लिए रिमांड पर भेजा गया है.
‘सेकंड हैंड कमांडर' की भूमिका में था आरोपी
एटीएस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शाकिर मेव नेटवर्क में सेकंड हैंड कमांडर की भूमिका निभाता था. वह आतंकी साजिशों को तैयार करने, संपर्क साधने और लोगों को जोड़ने का काम करता था. एजेंसियों का मानना है कि वह ग्राउंड लेवल पर पूरी रणनीति को अमल में लाने में अहम भूमिका निभा रहा था.
3 दिन में तीसरी गिरफ्तारी
मध्य प्रदेश एटीएस ने पिछले तीन दिनों में लगातार कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले भोपाल से मोहम्मद फराज और देवबंद से नईम अब्दुल्ला को पकड़ा गया था. तीनों की गिरफ्तारी से साफ है कि एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में हैं.
फराज और नईम से जुड़े तार
जांच में पता चला है कि शाकिर मेव का संबंध पहले से गिरफ्तार मोहम्मद फराज और नईम अब्दुल्ला से है. फराज को 11 जून की रात भोपाल के काजी कैंप से एक गुप्त ऑपरेशन में पकड़ा गया था, जबकि नईम को 13 जून को देवबंद से गिरफ्तार किया गया. एटीएस का आरोप है कि नईम ने ही फराज को विदेशी हैंडलर्स से जोड़ा था.
विदेशी कनेक्शन और संगठनों से जुड़ाव
ATS की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पीएफआई और अन्य संदिग्ध आतंकी संगठनों के संपर्क में थे. एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इनके तार विदेश में बैठे किन हैंडलर्स से जुड़े हैं और यह नेटवर्क कितना बड़ा है.
हमले की फिराक में थे आरोपी
एटीएस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क देश विरोधी गतिविधियों और संभावित हमलों की तैयारी में लगा था. जानकारी यह भी मिली है कि कुछ आरोपी मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने और आगे विदेश जाने की योजना बना रहे थे. फिलहाल एजेंसियां डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल और फंडिंग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं.
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