भोपाल में एक ऐसा “साइलेंट नेटवर्क” सामने आया है, जिसमें न बंदूक थी, न बम सिर्फ मोबाइल फोन, WhatsApp और टेलीग्राम के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप है. काजी कैंप इलाके से ATS ने मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि वह देशभर के युवाओं को टारगेट कर उन्हें ब्रेनवॉश करने के काम में जुटा था. NDTV ने भोपाल में फराज के ठिकाने पर जाकर स्थिति को जाना. जहां चौकाने वाली बातें सामने आई. आइए जानते हैं...
सीक्रेट ऑपरेशन में गिरफ्तारी
दरअसल, गुरुवार 11 जून की रात करीब 3:30 बजे ATS की टीम काजी कैंप की संकरी गलियों में बिना किसी शोर-शराबे के पहुंची. टीम ने बिना सायरन के एकदम गुपचुप तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया. छत के रास्ते घर में एंट्री की और मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया. इस ऑपरेशन में कुल 12 अधिकारी शामिल थे, जिनमें 3 महिला अधिकारी भी थीं. पूरा मिशन बेहद गोपनीय रखा गया था.
साधारण चेहरा, अंदर छिपी दूसरी दुनिया
फराज बाहर से देखने में एक सामान्य युवक था. वह कभी कंपाउंडर के तौर पर काम करता था तो कभी बैटरी रिपेयरिंग करता था. लेकिन जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसके मोबाइल में एक अलग ही दुनिया सक्रिय थी. आरोप है कि वह टेलीग्राम और WhatsApp ग्रुप के जरिए युवाओं को वीडियो भेजता था और उन्हें कट्टर सोच की ओर प्रेरित करता था. खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और अकेले रहने वाले युवकों को निशाना बनाया जाता था.
घर पर ‘कुरआन क्लास' का बोर्ड!
फराज के घर के ऊपर “ट्यूशन–कुरआन क्लास” का बोर्ड लगा हुआ है. फिलहाल घर का दरवाजा ATS ने सील कर दिया है. पड़ोसियों का कहना है कि फराज बेहद शांत स्वभाव का था और धार्मिक गतिविधियों में लगा रहता था. हालांकि एजेंसियों का मानना है कि इसी सादगी के पीछे मोबाइल के जरिए एक गंभीर साजिश चल रही थी.
देवबंद कनेक्शन और नईम की भूमिका
जांच में इस पूरे मामले के तार देवबंद से भी जुड़े बताए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि फराज की मुलाकात सहारनपुर के नईम अब्दुल्ला से वहीं हुई थी. नईम को 13 जून को देवबंद से गिरफ्तार किया गया. ATS का आरोप है कि नईम ने ही फराज का संपर्क विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से कराया. दोनों पर आरोप है कि वे एक खास नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे थे. फिलहाल मोबाइल की फोरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल जारी है.
दिन में क्लिनिक, रात में ऑनलाइन एक्टिविटी
फराज दिन में अपने घर के पास स्थित एक क्लिनिक में काम करता था. “खुश्बू क्लिनिक” नाम के इस केंद्र में वह मरीजों को देखता था. लेकिन जांच में सामने आया है कि रात के समय वह मोबाइल के जरिए सक्रिय रहता था. एजेंसियां उसके डिजिटल कम्युनिकेशन और जुड़े हुए लोगों की भूमिका को खंगाल रही हैं.
मकान मालिक और पड़ोसियों ने क्या बताया?
क्लिनिक की मकान मालकिन सैयदा बी का कहना है कि वह फराज के बारे में सुनकर हैरान हैं. उनके मुताबिक, वह शांत और शिष्ट व्यवहार वाला युवक था. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उसने अपनी नौकरी के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी. वहीं पड़ोसियों का कहना है कि अगर वह दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए और अगर निर्दोष है तो कानून उस पर न्याय करेगा.
ATS का फोकस अब ‘कंटेंट नेटवर्क' पर
जांच एजेंसियों का ध्यान अब इस बात पर है कि फराज किन-किन ग्रुप्स से जुड़ा था, उसने किस तरह का कंटेंट साझा किया और उससे जुड़े लोग कौन-कौन हैं. एजेंसियों का मानना है कि अब कट्टर सोच केवल डार्क वेब तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि आम मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भी तेजी से फैल रही है. फिलहाल फराज को 16 जून तक रिमांड पर लिया गया है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं.
ये भी पढ़ें-
भोपाल ATS की बड़ी कार्रवाई, दूसरे दिन भी जारी छापेमारी; कथित मास्टरमाइंड को पकड़ा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं