India France Relations: आज जब पूरी दुनिया दो गुटों में बंटती दिख रही है और वैश्विक राजनीति के समीकरण हर रोज बदल रहे हैं, तब भारत और फ्रांस का आपसी भरोसा कूटनीति के एक नए केंद्र के रूप में उभरा है. जून 2026 के प्रधानमंत्री के दौरे को सिर्फ कागजी समझौतों के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. इस बार दांव बड़े हैं. एक तरफ जहां 114 राफेल विमानों के महा-सौदे में विमान का 'सोर्स कोड' हासिल करने का भारत का पक्का इरादा है, वहीं दूसरी तरफ AI से लेकर सेमीकंडक्टर तक फैले 12 नए समझौते देश की सुरक्षा और रक्षा-तकनीक की पूरी तस्वीर बदलने की ताकत रखते हैं.
लेकिन कूटनीति की इस मजबूत इमारत की असल गहराई को समझने के लिए, हमें उस नींव को देखना होगा जिसे दोनों देशों ने पिछले कई दशकों के भरोसे से सींचा है. मौजूदा समझौतों पर बात करने से पहले, आइए नजर डालते हैं इस सदाबहार दोस्ती के उस सफर पर, जिसने हर मुश्किल वक्त में अपनी मजबूती साबित की है.

भारत और फ्रांस संबंध: एक ऐतिहासिक सफर
दोनों देशों के बीच आधिकारिक रिश्तों की शुरुआत आजादी के ठीक बाद 1947 में हो गई थी. लेकिन इस दोस्ती का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ आया साल 1998 में, जब फ्रांस भारत के साथ 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) करने वाला पहला पश्चिमी देश बना. इतिहास गवाह है कि जब 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद पूरी दुनिया ने भारत की तरफ पीठ कर ली थी और कड़े प्रतिबंध थोप दिए थे, तब भी फ्रांस भारत की मजबूरियों को समझते हुए उसके साथ मजबूती से खड़ा रहा.
आखिर भारत के लिए फ्रांस इतना जरूरी क्यों है?
आज के दौर में फ्रांस भारत के लिए सिर्फ व्यापार करने वाला कोई देश नहीं है, बल्कि वह एक बेहद भरोसेमंद 'रणनीतिक ढाल' की तरह काम करता है. इसके पीछे कुछ बेहद ठोस वजहें हैं-
अपनी शर्तों पर चलने की साझा सोच:
भारत की ही तरह फ्रांस भी किसी महाशक्ति (चाहे अमेरिका हो या चीन) के पीछे आंख बंद करके चलने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर भरोसा रखता है. सबसे खास बात यह है कि फ्रांस ने कभी भी भारत के आंतरिक मामलों (जैसे कश्मीर या नागरिकता कानून) पर न तो उंगली उठाई और न ही किसी संकट के समय कूटनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की.

वैश्विक मंचों पर बिना शर्त समर्थन
फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का सबसे मुखर पैरोकार रहा है. इसके साथ ही, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में भारत की एंट्री के लिए भी फ्रांस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार पैरवी करता आ रहा है.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को जवाब
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य दखलअंदाजी को रोकने के लिए फ्रांस भारत का सबसे रणनीतिक जोड़ीदार है. इस इलाके में फ्रांस के पास रीयूनियन आइलैंड और मयोट जैसे द्वीप हैं, जहां उसकी नौसेना स्थायी रूप से तैनात रहती है. दोनों देशों के बीच हुए 'लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट' की बदौलत आज दोनों सेनाएं एक-दूसरे के नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर पा रही हैं, जो हिंद महासागर की सुरक्षा के लिहाज से एक गेम-चेंजर कदम है.

सफर के बड़े पड़ाव: कब और क्या समझौते हुए?
पिछले तीन दशकों में दोनों देशों ने मिलकर कुछ ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने इस रिश्ते को अटूट बना दिया-
- 1998 (रणनीतिक साझेदारी): 26 जनवरी 1998 को फ्रांसीसी राष्ट्रपति जैक शिराक की भारत यात्रा के दौरान इस साझेदारी की शुरुआत हुई, जिसके तीन मुख्य स्तंभ बने—रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग.
- 2008 (नागरिक परमाणु सहयोग): 30 सितंबर 2008 को हुआ यह समझौता रणनीतिक रूप से एक मील का पत्थर था. इसी के दम पर आज महाराष्ट्र के जैतापुर में 1,650 मेगावाट के 6 अत्याधुनिक रिएक्टरों की मदद से 9,900 मेगावाट का विशाल परमाणु ऊर्जा संयंत्र आकार ले रहा है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत को पूरा करेगा.
- 2016 (36 राफेल विमानों की डील): वायुसेना की फौरी जरूरतों को देखते हुए सरकारों के बीच सीधे (G2G) करीब 59,000 करोड़ रुपये का यह समझौता हुआ. आज ये राफेल विमान भारतीय हवाई सुरक्षा की रीढ़ हैं.
- 2018 (लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समझौता): इस समझौते ने दोनों देशों की नौसेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर ईंधन भरने, मरम्मत और रसद की सप्लाई करने की कानूनी मंजूरी दी, जिससे हिंद महासागर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ गई.
- 2023 ('हॉरिज़न 2047' रोडमैप): पीएम मोदी की बैस्टिल डे यात्रा के दौरान अगले 25 सालों का एक खाका तैयार किया गया, जिसमें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, क्लीन एनर्जी और साइबर सिक्योरिटी को केंद्र में रखा गया.
- फरवरी 2026: इसी साल 17 फरवरी को मुंबई में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन ने 'भारत-फ्रांस Innovation Year' का आगाज किया. इसके तहत 'इंडो-फ्रेंच इनोवेशन नेटवर्क' की शुरुआत की गई, जो पूरे साल दोनों देशों के स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और उद्योगपतियों को एआई, साइबर सुरक्षा, डिजिटल आर्ट और रक्षा तकनीक जैसे मोर्चों पर एक साथ काम करने का मौका दे रहा है. साथ ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग और आर्थिक सुरक्षा की नियमित समीक्षा के लिए विदेश मंत्रियों की एक वार्षिक व्यापक वार्ता भी शुरू की है.
मौजूदा G7 विजिट: किन बड़े फैसलों पर टिकी हैं नजरें?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बार की फ्रांस यात्रा महज एक बहुपक्षीय बैठक भर नहीं है, बल्कि इसके भीतर भारत के हितों से जुड़े बड़े एजेंडे छिपे हैं-
भविष्य की तकनीक पर 12 अहम समझौते (MoUs):
इस यात्रा के दौरान दोनों देश टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, हेल्थ टेक, एआई, सेमीकंडक्टर और स्पेस सेक्टर में 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगा सकते हैं, जो भारत को डिजिटल क्रांति की अगली कतार में खड़ा कर देंगे.

114 राफेल फाइटर जेट और 'सोर्स कोड' की जंग:
भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने के लिए 114 नए राफेल विमानों की बड़ी डील पर अंतिम बातचीत होनी है. लेकिन इस बार भारत का रुख साफ है—हमें सिर्फ विमान नहीं खरीदने हैं. भारत की सबसे बड़ी शर्त यह है कि इन विमानों में हमारे अपने स्वदेशी हथियार और मिसाइलें जोड़ने की पूरी आजादी मिले. इसके लिए पीएम मोदी इस बैठक में राफेल के 'सोर्स कोड' (Source Code) को भारत के साथ साझा करने का मुद्दा मजबूती से उठाएंगे, जो सही मायनों में 'आत्मनिर्भर भारत' को एक बड़ी छलांग देगा.
वक्त के साथ और परिपक्क होता जा रहा भारत-फ्रांस संबंध
देखा जाए तो भारत और फ्रांस की यह सदाबहार दोस्ती महज दो देशों के बीच का व्यापार या हथियारों का लेन-देन नहीं है. यह असल में बदलते दौर में एक संतुलित और निष्पक्ष विश्व व्यवस्था बनाने का साझा प्रयास है. कल के परमाणु सहयोग से लेकर आज राफेल के सोर्स कोड की मांग और एआई जैसे 12 नए समझौतों तक का यह सफर दिखाता है कि दोनों देशों का भरोसा वक्त के साथ कितना परिपक्व हुआ है. ‘Innovation Year 2026' के इस मोड़ पर खड़ा भारत-फ्रांस का यह बढ़ता तालमेल साफ इशारा कर रहा है कि आने वाले समय में यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी क्रांति की सबसे मजबूत धुरी बनने जा रही है.
यह भी पढ़ें - प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस पहुंचे, एयरपोर्ट से होटल तक जोरदार स्वागत; आज राष्ट्रपति मैक्रों से करेंगे बातचीत
यह भी पढ़ें - मेक इन इंडिया से भारत में बनेगा राफेल! 18 तैयार फाइटर जेट देगा फ्रांस, PM मोदी पेरिस दौरे में बनेगी रवाना
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं