Bhind Private Colleges Fraud: मध्य प्रदेश के भिंड में प्राइवेट कॉलेजों में कथित फर्जीवाड़े (Private Colleges Fraud) का मामला लगातार गहराता जा रहा है. छह महीने पहले जिला कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना ने कॉलेजों में छात्रों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा आयुक्त को बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू कराने का पत्र लिखा था, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है. हाल ही में डीएड परीक्षा के दौरान हुई जांच में एक बार फिर कई निजी कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए. जांच के दौरान राजस्थान, बिहार, झारखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के छात्र परीक्षा देते हुए मिले. आरोप है कि कॉलेज संचालक मोटी रकम लेकर अनुपस्थित छात्रों को रिकॉर्ड में नियमित दर्शाते हैं, उनकी फर्जी उपस्थिति दर्ज करते हैं और परीक्षा दिलवाते हैं.
छात्रों का कॉलेज संचालक पर गंभीर आरोप
इतना ही नहीं कई छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज संचालक छात्रवृत्ति का लालच देकर प्रवेश दिलाते हैं. छात्रों से बैंक खाते खुलवाकर उनकी पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते हैं और छात्रवृत्ति की राशि स्वयं निकाल लेते हैं. छात्रों का यह भी आरोप है कि 25 हजार रुपये की वास्तविक फीस के बजाय 90 हजार रुपये से अधिक वसूले जाते हैं.
ग्रामीणों ने क्या कहा?
रौन क्षेत्र के बिरखड़ी गांव स्थित परशुराम कॉलेज को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि कॉलेज केवल कागजों में संचालित हो रहा है. न यहां नियमित छात्र आते हैं और न ही शिक्षकों की उपस्थिति रहती है. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की थी, जिसकी जांच रिपोर्ट उनके पास मौजूद है. यह रिपोर्ट कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी सौंपी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों का ये भी आरोप है कि हमारे पास अधिकारियों को देने के लिए 5 से 10 लाख रुपये नहीं हैं, इसलिए हमारी सुनवाई नहीं होती. एक ग्रामीण ने कहा कि परशुराम कॉलेज में न छात्र हैं और न स्टाफ... अधिकारी निरीक्षण के नाम पर आते हैं और सब कुछ सही बताकर चले जाते हैं.
100 निजी कॉलेजों का हुआ था निरीक्षण
करीब छह महीने पहले कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना ने राजस्व और शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक बुलाकर 20 जांच दल गठित किए थे. तीन-तीन सदस्यीय इन टीमों ने लगभग 100 निजी कॉलेजों का निरीक्षण किया और तीन दिन में फर्जीबाड़े की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी थी. कलेक्टर किरोडी लाल मीना ने जिले के सभी प्राइवेट कॉलेजो में बायोमेट्रिक लगवाने के लिए उच्च शिक्षा आयुक्त भोपाल को पिछले छह महीना पहले ही पत्र भेज चुके है. इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. इससे पहले तत्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव भी एक वर्ष में दो बार जांच के आदेश दे चुके थे.
13 कॉलेज अमान्य पाए गए
वहीं लीड कॉलेज एमजेएस के तत्कालीन प्राचार्य राम अवधेश शर्मा की जांच में 38 में से 13 कॉलेज अमान्य पाए गए थे. इनमें कहीं एक ही परिसर में स्कूल और कॉलेज संचालित मिले, कहीं भवन जर्जर मिला और कई स्थानों पर कॉलेज अस्तित्व में ही नहीं मिले. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कॉलेजों को जांच में अमान्य पाया गया, उन्हें बाद में उच्च शिक्षा आयुक्त भोपाल और जीवाजी विश्वविद्यालय से वर्ष 2025-26 के लिए संबद्धता और एनओसी कैसे मिल गई? इसे लेकर उच्च शिक्षा आयुक्त और संबंधित विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसे लेकर उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
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