'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' पर अकाल तख्त के जत्थेदार ने पंजाब सरकार को एक महीने के अंदर संशोधन करने के निर्देश दिये हैं, तब तक पुराने कानून पर रोक लगाने को कहा है. श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने निर्देश दिया कि एक महीने के भीतर श्री अकाल तख्त साहिब की आपत्तियों पर ध्यान दिया जाए और आपत्तियों की सूची विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी जाए. विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने भी श्री अकाल तख्त साहिब में सिख समुदाय के सामने कहा कि अगर कोई आपत्ति है, तो हम संशोधन करने के लिए तैयार हैं.
विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अगर कोई आपत्ति है, तो हम संशोधन करने के लिए तैयार हैं. जब तक आपत्तियों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक बिल को रोक दिया जाना चाहिए. सोमवार को अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पेश होने के बाद, आम आदमी पार्टी के सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों ने सामूहिक रूप से सिखों की भावनाओं के अनुरूप एक्ट में जरूरी संशोधन करने पर सहमति जताई. पांच जयकारों के जवाब में, सभी विधायकों और मंत्रियों ने कानून में आगे संशोधन के लिए अपनी सर्वसम्मत सहमति व्यक्त करते हुए हाथ उठाए.
क्या है पूरा विवाद?
अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि इसे सिख पंथ से परामर्श किए बिना लागू किया गया. सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने इससे पहले पंजाब सरकार से कहा था कि वह कानून से उन प्रावधानों को हटाए जो 'गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत (सिख समुदाय) की भावनाओं के खिलाफ' हैं. गड़गज ने पहले कहा था कि अकाल तख्त को बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है.
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