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ऑपरेशन विश्वास पर सवाल: 81 लाख के 325 मोबाइल लौटाकर भी भिंड पुलिस घेरे में

भिंड पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत 325 मोबाइल लौटाए, जिनकी कीमत ₹81 लाख से ज्यादा है. हालांकि बरामदगी और कानूनी कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे हैं.

ऑपरेशन विश्वास पर सवाल: 81 लाख के 325 मोबाइल लौटाकर भी भिंड पुलिस घेरे में
भिंड पुलिस ने 325 मोबाइल लौटाए, लेकिन जांच प्रक्रिया पर सवाल

Bhind Police Operation Vishwas: भिंड पुलिस ने “ऑपरेशन विश्वास” के तहत 81 लाख 30 हजार रुपये कीमत के 325 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए, जिससे सैकड़ों लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आई. इस पहल की सराहना भी हो रही है, लेकिन इसके साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं. मोबाइल किन परिस्थितियों में मिले, क्या वे चोरी के थे? या केवल गुम हुए थे? और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों पर पुलिस ने अभी तक स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की है. ऐसे में इस सफलता के बीच अब पारदर्शिता को लेकर बहस शुरू हो गई है.

ऑपरेशन विश्वास की सफलता का दावा

भिंड पुलिस ने जिले में लगातार मिल रही मोबाइल गुम होने की शिकायतों के बाद “ऑपरेशन विश्वास” अभियान चलाया. पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप पटेल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई. इस अभियान के तहत साइबर सेल और थाना पुलिस को CEIR पोर्टल के माध्यम से मोबाइल ट्रेस करने का जिम्मा सौंपा गया. तकनीकी प्रशिक्षण के बाद अभियान को गति मिली और 325 मोबाइल बरामद किए गए.

कई राज्यों से ट्रेस हुए मोबाइल

एसपी भिंड सूरज वर्मा के मुताबिक बरामद मोबाइल देश के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल, असम और छत्तीसगढ़ से ट्रेस किए गए. इनमें रियलमी, वीवो, ओप्पो, सैमसंग, एमआई, टेक्नो, मोटोरोला और वनप्लस जैसी कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं. मोबाइल प्राप्त करने वालों में सैनिक, शिक्षक, छात्र, गृहिणी और आम नागरिक शामिल रहे, जिससे इस कार्रवाई का सामाजिक असर भी दिखा.

लोगों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, लेकिन उठे कई गंभीर सवाल

मोबाइल मिलते ही खासकर उन लोगों में खुशी देखने को मिली, जो आर्थिक रूप से कमजोर थे और नया मोबाइल खरीदने में सक्षम नहीं थे. पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित कार्यक्रम में एसपी ने खुद लोगों को मोबाइल सौंपे. इस पहल से पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत होने की बात भी सामने आई.

इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद कई सवाल चर्चा में हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरामद मोबाइल फोन केवल “गुम” हुए थे या उनमें चोरी के मोबाइल भी शामिल थे.

यदि चोरी के थे, तो आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इस पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल

दूसरा अहम सवाल यह है कि 325 मोबाइल आखिर किन लोगों के कब्जे से मिले. क्या उन्हें खरीदने वाले लोगों पर भी कोई कार्रवाई हुई या उन्हें केवल मोबाइल लौटाकर छोड़ दिया गया? पुलिस ने बरामदगी के स्थान और आरोपियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.

CEIR पोर्टल की प्रक्रिया पर चर्चा

कई मामलों में मोबाइल गुम होने पर थानों में एफआईआर दर्ज नहीं होती, बल्कि केवल आवेदन लिया जाता है. बाद में CEIR पोर्टल के जरिए मोबाइल ट्रैक होने पर उसे सीधे मालिक को लौटा दिया जाता है. इस प्रक्रिया में चोरी जैसे गंभीर मामलों में भी कई बार कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती.

पहले भी हो चुकी है बड़ी बरामदगी

गौरतलब है कि इसी CEIR पोर्टल के माध्यम से पिछले वर्ष भी भिंड पुलिस ने 628 मोबाइल फोन खोजकर उनके मालिकों को लौटाए थे. फिलहाल ऑपरेशन विश्वास ने सैकड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान जरूर लौटाई है, लेकिन बरामद मोबाइलों की वास्तविक स्थिति और उनसे जुड़े कानूनी पहलुओं पर उठ रहे सवालों के जवाब अभी भी बाकी हैं.

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दिलीप सोनी
संवाददाता
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