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बालोद में शिक्षा व्यवस्था बदहाल! कहीं छात्र बेहोश तो कहीं शिक्षकों की कमी; विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही बदहाल शिक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा हो गया. एक ओर बालोद जिले में प्रार्थना सभा के दौरान गर्मी के कारण एक छात्र की तबीयत बिगड़ गई, तो वहीं दूसरी ओर शिक्षक की कमी से नाराज ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर धरना देकर विरोध जताया.

बालोद में शिक्षा व्यवस्था बदहाल! कहीं छात्र बेहोश तो कहीं शिक्षकों की कमी; विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
स्कूल के बाहर धरना पर बैठे ग्रामीणों और विद्यार्थी.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में बालोद सहित पूरे प्रदेश में नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है. शिक्षा विभाग शाला प्रवेशोत्सव के जरिए बच्चों को स्कूलों तक लाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की जमीनी तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है. कहीं शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में तालाबंदी की नौबत है, तो कहीं भीषण गर्मी के बीच प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों की तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. इन हालातों को लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक सभी चिंतित हैं. वहीं विपक्ष भी इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार पर लगातार हमलावर है.

इन्हीं सवालों की पड़ताल के लिए एनडीटीवी की टीम बालोद जिले के एक सरकारी स्कूल पहुंची, जहां छात्रों और शिक्षकों से बातचीत में कई अहम बातें सामने आईं. बच्चों ने बताया कि उनके स्कूल में भी गर्मी के कारण एक छात्र बेहोश हो गया था और उन्होंने सरकार से व्यवस्थाओं में सुधार की अपील भी की.

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच नियमित पढ़ाई और लंबी प्रार्थना सभाएं बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं.

Balod

सरकारी प्राथमिक स्कूल में शाला प्रवेश उत्सव के दिन स्कूल में ताला लगा मिला.

पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने सरकार पर तीखा हमला बोला

इसी बीच बालोद जिले के पलारी गांव पहुंचे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में स्कूल खुलते ही कहीं तालाबंदी की स्थिति बन रही है तो कहीं बच्चे गर्मी के कारण बेहोश होकर गिर रहे हैं। उनका कहना था कि तेज धूप में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राजकीय गीत और सरस्वती वंदना के लिए बच्चों को लंबे समय तक खड़ा रखना उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे नियम केवल शासकीय स्कूलों के लिए हैं या निजी स्कूलों में भी समान रूप से लागू किए जा रहे हैं.

दीपक बैज ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि बालोद सहित प्रदेश के कई सरकारी स्कूल आज भी जर्जर भवनों, शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. दीपक बैज के मुताबिक, कई स्कूल ऐसे हैं जहां पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के भरोसे है. कई स्थानों पर शिक्षा सत्र के पहले ही दिन तालाबंदी जैसी स्थिति देखने को मिली, जबकि अनेक छात्रों को अब तक पाठ्यपुस्तकें और स्कूल ड्रेस भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय दूसरे मुद्दों पर ध्यान दे रही है, जबकि प्राथमिकता बच्चों को बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए.

Balod

बालोद में शिक्षक की कमी से नाराज ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर धरना देकर विरोध जताया.

DEO ने क्या कहा?

वहीं इन तमाम सवालों पर बालोद जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे का कहना है कि जिले के जिन स्कूल भवनों की स्थिति जर्जर है, उन्हें शासन के निर्धारित मानकों के अनुसार जीर्ण-शीर्ण घोषित कर ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके बाद नए भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे. उन्होंने बताया कि जब तक नए भवन तैयार नहीं हो जाते, तब तक विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तहत स्कूलों का संचालन कराया जाएगा. साथ ही विभाग शिक्षकों की उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी लगातार समीक्षा कर रहा है.

फिलहाल नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और सरकार शाला प्रवेशोत्सव के जरिए अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ने का संदेश दे रही है. लेकिन दूसरी ओर शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, भीषण गर्मी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव जैसे मुद्दे शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को भी सामने ला रहे हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन समस्याओं का समय रहते समाधान हो पाएगा, ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.

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संतोष साहू
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