- RSS की शाखाओं की संख्या मार्च 2026 तक 55,683 पहुंच गई है, जो 2015 से 73 फीसदी ज्यादा है
- 2025-26 में RSS ने देशभर में 36 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन करवाए थे
- एमपी-गुजरात से ज्यादा RSS की शाखाओं की संख्या केरल-कर्नाटक में है
100 साल से भी ज्यादा पुराना संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अब रजिस्ट्रेशन को लेकर चर्चा में आ गया है. कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे RSS पर रजिस्ट्रेशन करवाने का दबाव बना रहे हैं. खरगे का कहना है कि RSS को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए और अपनी फंडिंग, कमाई, खर्च और संपत्ति का ब्योरा देना चाहिए. रजिस्ट्रेशन के सवाल पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि देश में कई संस्थाएं ऐसी हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है. उन्होंने कहा था कि यह कोई गुप्त संगठन नहीं है. संघ खुलकर काम करता है. उन्होंने यह भी कहा कि जिनको सरकारी फंड चाहिए, उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि '100 साल से ज्यादा हो गए हैं. किसी ने हमसे नहीं कहा कि आपको रजिस्ट्रेश करवाना ही होगा.'
इस पर पलटवार करते हुए प्रियांक खरगे ने फिर कहा कि '100 साल रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया तो क्या 200 साल भी नहीं करवाएगा.' उन्होंने यह भी कहा कि 'RSS को सांस्कृतिक संगठन के तौर पर काम करने का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव रखने के बावजूद जवाबदेही से बचना ठीक नहीं है.' उन्होंने कहा कि RSS को अहंकार छोड़कर कानून का पालन करना चाहिए.
प्रियांक खरगे जिस तरह से RSS को लेकर हमलावर हैं, उनके इस रवैये का कांग्रेस नेता समर्थन कर रहे हैं.
ये RSS है क्या?
RSS की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. इसकी स्थापना महाराष्ट्र के नागपुर में हुई थी.
RSS खुद को सांस्कृति संगठन बताता है. उसका मकसद हिंदू संस्कृति और हिंदू एकता को बढ़ावा देना है. उसका कहना है कि संघ में हिंदू शब्द का प्रयोग उपासना, पंथ, मजहब या रिलीजन के नाते नहीं होता है, इसलिए यह धार्मिक संगठन नहीं है.

संघ के सदस्यों को स्वयंसेवक कहा जाता है. संघ में शामिल होने के लिए कोई रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती. कोई भी व्यक्ति शाखा में जाकर स्वयंसेवक बन सकता है.
संघ का कहना है कि कोई भी हिंदू व्यक्ति स्वयंसेवक बन सकता है. उसका कहना है कि भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई बाहर से नहीं आए हैं, उनके पुरखे भी वहीं हैं जो हिंदुओं के हैं. इसलिए वे भी स्वयंसेवक बन सकते हैं.
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संघ की मजबूती- उसकी शाखा?
2014 में मोदी सरकार आने के बाद से संघ काफी मजबूत हुआ है. संघ की हर दिन लगने वाली शाखाओं की संख्या काफी बढ़ गई है.
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) संघ की फैसले लेने की सर्वोच्च संस्था है. ABPS की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2015 तक संघ की 51,330 शाखाएं लगती थीं. शाखा वह जगह है, जहां RSS के सदस्य रोज मिलते हैं और उन्हें वैचारिक और शारीरिक रूप से प्रशिक्षित किया जाता है.
ABPS की 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक संघ की देशभर की 55,683 जगहों पर 88,949 शाखाएं हैं. यानी 2015 से अब तक संघ की शाखाओं की संख्या 73 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई हैं.

संघ के मुताबिक, हर दिन एक घंटे की शाखा में शारीरिक व्यायाम, खेल, देशभक्ति गीत, राष्ट्रहित के विषयों पर चर्चा, भाषण और मातृभूमि की प्रार्थना होती है.
शाखा हर दिन होती है. इसके अलावा हर हफ्ते मिलन और हर महीने मंडली होती है. ABPS के मुताबिक, मार्च 2026 तक देशभर में 32,606 मिलन और 13,211 मंडली आयोजित हुईं.
सालभर क्या करता है RSS?
शाखा आने वाले स्वयंसेवकों को RSS प्रशिक्षित भी करता है. इसे 'संघ शिक्षा वर्ग' कहते हैं. 2025-26 में संघ ने 63 सामान्य और 29 विशेष शिक्षा वर्ग आयोजित किए थे. सामान्य वर्ग में 40 साल से कम उम्र के स्वयंसेवर और विशेष वर्ग में 40 से 65 साल की उम्र के स्वयंसेवक हिस्सा लेते हैं. पिछले साल 92 शिक्षा वर्ग आयोजित हुए थे, जिनमें 16,227 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया था. शिक्षा वर्ग के अलावा विकास वर्ग भी करवाए जाते हैं.
संघ के मुताबिक, पूरे देश में 12,826 बस्तियों में रोजाना या हफ्ते में होने वाली 96,045 गतिविधियां चलाई गईं, जिनमें देशभर की 15,680 शाखाएं सीधे तौर पर इनसे जुड़ी रहीं.

पिछले साल संघ की स्थापना के 100 साल पूरे हुए थे, जिसके लिए देशभर में कई कार्यक्रम किए गए. संघ का स्थापना दिवस 'विजयादशमी उत्सव' बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. संघ ने 2025-26 में देशभर में 62,555 उत्सव किए थे, जिनमें 32 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. इसके अलावा 22,656 संचलन भी हुए जिनमें 21 लाख से ज्यादा युवा और 3.83 लाख बच्चों ने हिस्सा लिया था.
इसके अलावा, संघ घर-घर जाकर 'गृह संपर्क अभियान' भी चलाता है. इस दौरान लोगों से संपर्क किया जाता है, उन्हें संघ के पैम्फलेट बांटे जाते हैं और किताबें बेची जाती हैं. 2025-26 में संघ ने 3.89 लाख गांवों और 31,143 इलाकों में 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक संपर्क किया था.
संघ देशभर में हिंदू सम्मेलन भी करता है. दावा है कि 2025-26 में मंडल स्तर पर 23,143 और बस्ती स्तर पर 13,905 सम्मेलन कराए गए थे, जिनमें 1.55 करोड़ महिलाएं और 1.93 करोड़ पुरुष शामिल हुए थे. इसके अलावा, और भी कई कार्यक्रम और सम्मेलन संघ की तरफ से सालभर में कराए जाते हैं.
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कहां-कहां तक फैला है RSS?
आज के समय में संघ लगभग सभी राज्यों में है. उसकी शाखाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. हालांकि, संघ में कितने स्वयंसेवक हैं, इसका डेटा नहीं है. संघ खुद को दुनिया का सबसे बड़ा वॉलेंटियर संगठन कहता है.
ABPS की रिपोर्ट में संघ की शाखाओं की संख्या तो सामने आ जाती है, लेकिन किस राज्य में कितनी शाखाएं चलती हैं, इसका आंकड़ा उसकी रिपोर्ट में नहीं आता है. हालांकि, अलग-अलग राज्यों की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से कुछ आंकड़े जरूर मिलते हैं.
उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में संघ की 4,127 शाखाएं हैं. इनके अलावा 1,389 मिलन और 60 मंडली लगती हैं.

दिलचस्प बात ये है कि एमपी, गुजरात और महाराष्ट्र से ज्यादा शाखाएं केरल में हैं. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की मई 2024 के मुताबिक, केरल में संघ की 5,142 शाखाएं हैं. इसके उलट मध्य प्रदेश में 1,453, गुजरात में 1,000 और महाराष्ट्र में लगभग 4,000 शाखाएं चलती हैं. सबसे ज्यादा 8,000 शाखाएं उत्तर प्रदेश में हैं.
अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मार्च 2025 तक संघ की 1,823 शाखाएं लगती थीं. वहीं, बिहार में मार्च 2026 तक संघ की 2,575 शाखाएं हैं.
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