कांग्रेस नेता चैतन्य बघेल से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सुनवाई स्थगित करने की मांग के बाद सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस छिड़ गई. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की. CJI सूर्य कांत ने कहा, 'पहले कहते हैं कि लिस्ट कीजिए, लिस्ट कीजिए और फिर सुनवाई को टालने की मांग करते हैं, जबकि हम रातभर फाइलें पढ़ते हैं.'
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में दलील दी गई है कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद से मामले का कोई भी मुख्य गवाह सामने आने से डर रहा है. इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान CJI सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की.
CJI सूर्यकांत ने की तीखी टिप्पणी
स्थगन की याचिका का जवाब देते हुए CJI सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की. उनहोंने कहा, 'आंशिक कार्य दिवस की यही खूबसूरती है. पहले कहते हैं कि लिस्ट कीजिए, लिस्ट कीजिए और फिर सुनवाई को टालने की मांग करते हैं, जबकि हम इन मामलों के लिए रातभर फाइलें पढ़ते हैं.'
हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को दी थी जमानत
यह मामला 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियां कर रही हैं. ईडी की जांच के अनुसार, इस घोटाले में 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से भारी गड़बड़ी की गई है. ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपये का लेन-देन व्यक्तिगत रूप से संभाला. इसी मामले में चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई 2025 को दुर्ग से गिरफ्तार किया था. हालांकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को चैतन्य बघेल को जमानत दे दी थी.
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