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आदिवासी vs वनवासी; राष्ट्रपति मुर्मू के बयान से सियासी पारा चढ़ा, MP में BJP व कांग्रेस आमने-सामने, ये है मामला

आदिवासी बनाम वनवासी बहस पर गरमाई राजनीति. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मध्यप्रदेश दौरे के बीच आदिवासी मुद्दों पर राजनीति तेज हो गई है. जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आदिवासी जमीन, शिक्षा और रोजगार का मुद्दा उठाया, जबकि BJP ने कांग्रेस पर पलटवार किया.

आदिवासी vs वनवासी; राष्ट्रपति मुर्मू के बयान से सियासी पारा चढ़ा, MP में BJP व कांग्रेस आमने-सामने, ये है मामला
‘आदिवासी बनाम वनवासी’ बहस पर गरमाई राजनीति; राष्ट्रपति मुर्मु के दौरे पर कांग्रेस-BJP में जुबानी जंग

Adivasi vs Vanvasi Political Debate: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) के मध्यप्रदेश दौरे के बीच आदिवासी समाज के मुद्दों पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आदिवासी समाज से जुड़े सवाल उठाए हैं, वहीं राष्ट्रपति के हालिया संबोधन को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, शिक्षा, जमीन और रोजगार के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. दूसरी ओर कांग्रेस विधायक दल के नेता उमंग सिंघार ने भी आदिवासी और वनवासी शब्दों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा. वहीं कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक पदों की गरिमा पर सवाल खड़े कर रही है.

पहले सुनिए राष्ट्रपति ने क्या कहा? ये रहा Video

'आदिवासी को वनवासी कहना अपमान'

जीतू पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज को "वनवासी" कहना उनकी पहचान और अस्मिता के साथ अन्याय है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख रखती रही है और आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किए जाने की पक्षधर है. पटवारी ने कहा कि राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में आदिवासी पहचान को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 1 करोड़ 53 लाख आदिवासी निवास करते हैं और उनके अधिकारों, शिक्षा, रोजगार तथा भूमि संरक्षण के मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. पटवारी ने राष्ट्रपति से आदिवासी समाज की स्थिति की समीक्षा कराने और राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया.

आदिवासी जमीनों की बिक्री का मुद्दा उठाया

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की जमीनों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने दावा किया कि विभिन्न अनुमतियों के माध्यम से बड़ी मात्रा में आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. पटवारी ने कहा कि यदि वर्ष 2028 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो ऐसे मामलों की समीक्षा कराई जाएगी.

शिक्षा, रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता

पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरने की मांग करते हुए कहा कि लंबे समय तक बैकलॉग पद खाली रहना गंभीर विषय है. साथ ही आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा, मानव तस्करी और गुमशुदगी जैसे मामलों की व्यापक जांच की भी मांग की.

मुख्यमंत्री पर भी बोला हमला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए "नौसिखिया" वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों से सरकार असहज है. उन्होंने कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा.

दिग्विजय सिंह के साथ रिश्तों पर दिया जवाब

हाल में वायरल हुए एक वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल पर जीतू पटवारी ने कहा कि उनका और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का संबंध पिता-पुत्र जैसा है. उन्होंने दावा किया कि वीडियो को राजनीतिक उद्देश्य से तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है और दोनों नेताओं के बीच संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं.

उमंग सिंघार ने भी साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि आदिवासी केवल एक शब्द नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी पहचान है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी अस्मिता पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगा और उसकी पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए.

विश्वास सारंग का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि राष्ट्रपति का दौरा आदिवासी समाज के कल्याण और सिकल सेल जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक पदों की गरिमा का सम्मान करना चाहिए और ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना तथ्यों के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है.

राजनीतिक बहस हुई तेज

राष्ट्रपति मुर्मु के मध्यप्रदेश दौरे के साथ आदिवासी पहचान, अधिकार, शिक्षा, रोजगार और भूमि संरक्षण जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं. कांग्रेस जहां इन विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे आदिवासी कल्याण के लिए चल रहे प्रयासों के खिलाफ राजनीतिक अभियान बता रही है.

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लेखक के बारे में
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आकाश द्विवेदी
संवाददाता
आकाश द्विवेदी टीवी और डिजिटल पत्रकारिता का एक भरोसेमंद नाम हैं. राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, युवाओं, सामाजिक सरोकार और जमीनी मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग त... और पढ़ें
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