Adivasi vs Vanvasi Political Debate: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) के मध्यप्रदेश दौरे के बीच आदिवासी समाज के मुद्दों पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आदिवासी समाज से जुड़े सवाल उठाए हैं, वहीं राष्ट्रपति के हालिया संबोधन को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, शिक्षा, जमीन और रोजगार के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. दूसरी ओर कांग्रेस विधायक दल के नेता उमंग सिंघार ने भी आदिवासी और वनवासी शब्दों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा. वहीं कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक पदों की गरिमा पर सवाल खड़े कर रही है.
पहले सुनिए राष्ट्रपति ने क्या कहा? ये रहा Video
आखिरकार महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने सार्वजनिक रूप से माना कि भाजपा ‘आदिवासियों' को ‘वनवासी' कहकर अन्याय कर रही है।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) June 19, 2026
बैतूल की धरती से राष्ट्रपति जी ने स्पष्ट कहा कि "जनजातीय समुदाय को भले कोई वनवासी कहे, वास्तव में वे आदिवासी हैं।"
सवाल यह है कि जब देश की प्रथम नागरिक… pic.twitter.com/4MB8RE9F5L
'आदिवासी को वनवासी कहना अपमान'
जीतू पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज को "वनवासी" कहना उनकी पहचान और अस्मिता के साथ अन्याय है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख रखती रही है और आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किए जाने की पक्षधर है. पटवारी ने कहा कि राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में आदिवासी पहचान को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया है.
मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का साधुवाद करता हूँ कि उन्होंने BJP और RSS द्वारा आदिवासी समाज के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले “वनवासी” शब्द पर आपत्ति दर्ज करते हुए स्पष्ट किया कि आदिवासियों को “वनवासी” कहना उचित नहीं है।
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) June 19, 2026
यह वही विचार है, जिसे आदरणीय @RahulGandhi जी और कांग्रेस पार्टी… pic.twitter.com/ID6wjPHcfV
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 1 करोड़ 53 लाख आदिवासी निवास करते हैं और उनके अधिकारों, शिक्षा, रोजगार तथा भूमि संरक्षण के मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. पटवारी ने राष्ट्रपति से आदिवासी समाज की स्थिति की समीक्षा कराने और राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया.
आदिवासी जमीनों की बिक्री का मुद्दा उठाया
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की जमीनों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने दावा किया कि विभिन्न अनुमतियों के माध्यम से बड़ी मात्रा में आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. पटवारी ने कहा कि यदि वर्ष 2028 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो ऐसे मामलों की समीक्षा कराई जाएगी.
मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं और उनके संरक्षित उद्योगपतियों द्वारा आदिवासियों की लगभग एक लाख छब्बीस हजार हेक्टेयर भूमि खरीदी गई है।
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) June 19, 2026
कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने पर इन सभी भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जहां कहीं भी अनियमितता या अवैध तरीके से भूमि हस्तांतरण पाया जाएगा,… pic.twitter.com/qHqlQaxzGa
शिक्षा, रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरने की मांग करते हुए कहा कि लंबे समय तक बैकलॉग पद खाली रहना गंभीर विषय है. साथ ही आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा, मानव तस्करी और गुमशुदगी जैसे मामलों की व्यापक जांच की भी मांग की.
मुख्यमंत्री पर भी बोला हमला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए "नौसिखिया" वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों से सरकार असहज है. उन्होंने कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा.
दिग्विजय सिंह के साथ रिश्तों पर दिया जवाब
हाल में वायरल हुए एक वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल पर जीतू पटवारी ने कहा कि उनका और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का संबंध पिता-पुत्र जैसा है. उन्होंने दावा किया कि वीडियो को राजनीतिक उद्देश्य से तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है और दोनों नेताओं के बीच संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं.
उमंग सिंघार ने भी साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि आदिवासी केवल एक शब्द नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी पहचान है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी अस्मिता पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगा और उसकी पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए.
विश्वास सारंग का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि राष्ट्रपति का दौरा आदिवासी समाज के कल्याण और सिकल सेल जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संवैधानिक पदों की गरिमा का सम्मान करना चाहिए और ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना तथ्यों के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है.
राजनीतिक बहस हुई तेज
राष्ट्रपति मुर्मु के मध्यप्रदेश दौरे के साथ आदिवासी पहचान, अधिकार, शिक्षा, रोजगार और भूमि संरक्षण जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं. कांग्रेस जहां इन विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे आदिवासी कल्याण के लिए चल रहे प्रयासों के खिलाफ राजनीतिक अभियान बता रही है.
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