- तिरुपति मंदिर में में रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं और बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है
- 2024 में तिरुमला मंदिर की हुंडी में लगभग 1365 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ
- मंदिर के बजट का प्रबंधन एक विशाल टीम करती है जिसमें आईएएस, आईपीएस अधिकारी और हजारों कर्मचारी शामिल हैं
अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के आरोप का मामला काफी चर्चा में है. यूपी पुलिस की एसआईटी मामले की जांच कर रही है. अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं. राम मंदिर में करोड़ों रुपये का चंदा आता है. इतने चंदा का हिसाब-किताब रखने के लिए फुल प्रूफ सिस्टम की जरूरत है. अयोध्या का राम मंदिर इसके लिए आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर की व्यवस्था से सीख सकता है. वहां दान की गिनती के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा, बैंकिंग निगरानी, सीसीटीवी सर्विलांस और नियमित ऑडिट की व्यवस्था पहले से लागू है.
हर दिन लाखों श्रद्धालु तिरुमला की सात पहाड़ियों पर स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. कोई नकद दान करता है, कोई सोना-चांदी चढ़ाता है, तो कोई अपनी पहली कमाई भगवान को समर्पित करता है. लेकिन शायद ही कोई यह सोचता हो कि रोज आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और हजारों करोड़ रुपये के बजट का प्रबंधन आखिर कैसे किया जाता है.
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) एक विशाल संस्थागत व्यवस्था है, जिसमें IAS अधिकारी, IPS अधिकारी, इंजीनियर, वित्त विशेषज्ञ, एंडोमेंट्स विभाग, हजारों कर्मचारी और अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र मिलकर काम करते हैं.
16 जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार मंदिर में
- 86,601 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
- 31,111 श्रद्धालुओं ने केशदान (मुंडन) कराया
- हुंडी में Rs 4.72 करोड़ का चढ़ावा आया
- 4.32 लाख लड्डू बिके
- 2.16 लाख लोगों को अन्नप्रसाद वितरित किया गया
- 3,305 श्रद्धालुओं को चिकित्सा सेवाएं दी गईं
- सर्वदर्शन के लिए प्रतीक्षा समय 12 घंटे से अधिक रहा
केवल वर्ष 2024 में ही तिरुमला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की हुंडी में लगभग 1,365 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया. औसतन हर महीने 100 से 125 करोड़ रुपये तक का दान हुंडी के माध्यम से प्राप्त होता है.

रोज कितना चढ़ावा आता है?
सामान्य दिनों में मंदिर की हुंडी में प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है. विशेष पर्वों और छुट्टियों के दौरान यह राशि और बढ़ जाती है. जुलाई 2025 में मंदिर ने एक ही दिन में 5.3 करोड़ रुपये का हुंडी कलेक्शन दर्ज किया था, जो उस वर्ष का सबसे बड़ा एकदिवसीय संग्रह था. यह आंकड़े बताते हैं कि तिरुमला केवल एक मंदिर नहीं बल्कि प्रतिदिन एक छोटे शहर जितनी आबादी को सेवाएं देने वाला संस्थान है.
TTD का बजट कितना है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए TTD का कुल बजट लगभग Rs 5,456.26 करोड़ है. TTD का सालाना बजट कई छोटे राज्यों के विभागीय बजट के बराबर है.
TTD की अनुमानित आय-
- हुंडी चढ़ावा (Srivari Kanuka): 1,880 करोड़ रुपये
- निवेशों पर ब्याज: 1,205 करोड़ रुपये
- प्रसाद बिक्री: 650 करोड़ रुपये
- दर्शन टिकट: 310 करोड़ रुपये
- केशदान (बालों की नीलामी): 175 करोड़ रुपये
- आवास और किराया: 173 करोड़ रुपये
- अर्जित सेवा टिकट: 135 करोड़ रुपये
- अन्य आय: 928 करोड़ रुपये

करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती कैसे होती है?
तिरुपति बालाजी मंदिर में रोज़ाना औसतन 2.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है. त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है. श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया नकद, सिक्के, विदेशी मुद्रा, सोना-चांदी और आभूषण विशाल हुंडी में जमा होते हैं. औसतन रोज 6 से 12 हुंडियां भर जाती हैं. इन दान-पात्रों को सील कर कड़ी सुरक्षा के बीच पराकमणि भवन पहुंचाया जाता है, जहां CCTV कैमरों, पुलिसकर्मियों, विजिलेंस अधिकारियों और स्वयंसेवकों की मौजूदगी में गिनती होती है. TTD ने इस काम के लिए अलग स्टाफ नियुक्त किया है. श्रीवारी सेवक (वॉलंटियर) भी इस प्रक्रिया में सहयोग करते हैं.
पराकमणि भवन में सुरक्षा कितनी सख्त होती है?
गिनती करने वाले कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता है.इसमें तीन से चार बार फ्रिस्किंग, सीमित प्रवेश, निर्धारित ड्रेस कोड और केवल अधिकृत कर्मचारियों को प्रवेश शामिल है. गिनती करने वाले कर्मचारियों को केवल पारंपरिक धोती पहनने की अनुमति होती है ताकि किसी भी प्रकार की चोरी या वस्तु छिपाने की संभावना समाप्त हो सके.
सिक्के, नोट और गहनों का क्या होता है?
TTD कर्मचारी और श्रीवारी सेवक सिक्कों को अलग करते हैं. नोटों को मूल्य के अनुसार छांटते हैं. विदेशी मुद्रा को अलग दर्ज करते हैं. सोने-चांदी के आभूषणों को सुरक्षित रखते हैं. सिक्कों की गिनती मशीनों से की जाती है. नोटों के बंडल बनाकर उनकी दोबारा जांच होती है. सोने और चांदी के आभूषणों का हर महीने विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन किया जाता है. इसके बाद उन्हें TTD ट्रेजरी में सुरक्षित रखा जाता है.

भक्तों के दान किए गए सोने का क्या होता है?
तिरुमला मंदिर में हर साल बड़ी मात्रा में सोना और स्वर्ण आभूषण दान किए जाते हैं. वर्षों से जमा यह स्वर्ण भंडार TTD की सबसे मूल्यवान संपत्तियों में शामिल है. मंदिर प्रशासन केवल सोने को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि निष्क्रिय पड़े स्वर्ण भंडार को आय के स्रोत में बदलने की नीति पर भी काम करता है. इसी रणनीति के तहत TTD ने पहले 1,075 किलोग्राम सोना भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की गोल्ड डिपॉजिट स्कीम में जमा कराया था. बाद में अतिरिक्त 1,175 किलोग्राम सोना भी इसी योजना में जमा किया गया.
इस प्रकार TTD देश का सबसे बड़ा धार्मिक स्वर्ण जमाकर्ता बन गया है. इस जमा सोने पर मंदिर प्रशासन को नियमित ब्याज प्राप्त होता है, जबकि सोने की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी बैंक की होती है. इस व्यवस्था से मंदिर की निष्क्रिय संपत्ति आय का स्रोत बन जाती है और प्राप्त ब्याज को श्रद्धालु सेवाओं तथा धार्मिक गतिविधियों पर खर्च किया जाता है.
TTD का प्रशासन कौन चलाता है?
TTD का संचालन TTD ट्रस्ट बोर्ड करता है, जिसके अध्यक्ष की नियुक्ति आंध्र प्रदेश सरकार करती है. TTD बोर्ड में सरकार द्वारा नामित सदस्य, धार्मिक क्षेत्र के प्रतिनिधि और कुछ पदेन (Ex-Officio) सदस्य शामिल होते हैं. इसमें एंडोमेंट्स कमिश्नर, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और TTD के कार्यकारी अधिकारी सदस्य होते हैं. ट्रस्ट बोर्ड नीतिगत फैसले लेता है और मंदिर की दीर्घकालिक योजनाओं को मंजूरी देता है.
सबसे शक्तिशाली अधिकारी कौन होता है?
TTD का वास्तविक प्रशासनिक प्रमुख एग्जीक्युटिव ऑफिसर होता है. यह पद आमतौर पर वरिष्ठ IAS अधिकारी को दिया जाता है. EO मंदिर प्रशासन, बजट और वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाएं, लड्डू उत्पादन, अन्नदान योजनाएं, मंदिर संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे कामों की जिम्मेदारियां संभालता है. EO को TTD का चीफ एग्जीक्युटिव माना जाता है.
EO की सहायता के लिए एडीशनल EO नियुक्त किए जाते हैं. ये आमतौर पर IAS या वरिष्ठ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होते हैं. इसके साथ ही जॉइंट एग्जीक्युटिव ऑफिसर्स स्तर के अधिकारी अलग-अलग विभागों का संचालन करते हैं. इसमें दर्शन व्यवस्था, आवास, ट्रांसपोर्ट, स्वास्थ्य सेवाएं, अन्नप्रसादम और मंदिर प्रबंधन शामिल हैं.

एंडोमेंट्स विभाग की क्या भूमिका है?
आंध्र प्रदेश का एंडोमेंट्स विभाग राज्य के मंदिरों का नियामक विभाग है. यह विभाग मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी, वित्तीय ऑडिट, सरकारी नियमों का अनुपालन और धार्मिक संस्थाओं के संचालन की देखरेख करता है. विभाग के कमिश्नर TTD प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ट्रस्ट संरचना से भी जुड़े रहते हैं.
सुरक्षा व्यवस्था का मुखिया कौन होता है?
TTD की सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व चीफ विजिलेंस और सिक्योरिटी ऑफिसर (CVSO) करते हैं. यह पद परंपरागत रूप से IPS अधिकारी को दिया जाता है. आमतौर पर इस पद पर एसपी और एसएसपी रैंक के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किए जाते हैं.
हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था
TTD आज दुनिया की सबसे आधुनिक धार्मिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक संचालित करता है. इसमें AI आधारित निगरानी, फेस रिकग्निशन सिस्टम, वीडियो एनालिटिक्स, ड्रोन सर्विलांस, थर्मल कैमरे, हजारों CCTV कैमरे, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर और मेटल डिटेक्टर शामिल हैं. सुरक्षा व्यवस्था केवल मंदिर तक सीमित नहीं है बल्कि घाट रोड, पैदल मार्ग, ट्रेजरी, गेस्ट हाउस और हुंडी काउंटिंग सेंटर तक फैली हुई है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं