- रांची के आरएसएस दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमले में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है
- जांच में पता चला कि आरोपियों ने दुबई में बैठे एक अज्ञात हैंडलर के निर्देश पर हमला किया
- जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का कनेक्शन भी सामने आया है
रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला करने के मामले में पुलिस ने SIT गठित कर त्वरित कार्रवाई करते हुए इस सनसनीखेज वारदात में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सैफ अंसारी, अमन अंसारी उर्फ गोलू और सायम सुजान के रूप में हुई है. ये तीनों युवक मूल रूप से झारखंड के लोहरदगा जिले के रहने वाले हैं. पुलिस की अब तक की जांच में जो खुलासे हुए हैं वे बेहद चौंकाने वाले हैं. पुलिस की पूछताछ और तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि तीनों आरोपी इंटरनेट के जरिए दुबई में बैठे एक अज्ञात हैंडलर के संपर्क में थे. उसी हैंडलर ने रांची में दहशत फैलाने के इरादे से इन युवकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दफ्तर को निशाना बनाने का जिम्मा सौंपा था.
मात्र 10000 रुपये की सुपारी
इस पूरी साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि इतनी बड़ी आतंकी जैसी प्लानिंग और वारदात को अंजाम देने के लिए इन तीनों लड़कों को महज 10000 रुपये दिए गए थे और यह रकम भी दुबई से ही भेजी गई थी. आरोपियों से जुड़े एक अन्य व्यक्ति के डिजिटल स्कैनर पर यह पैसे ट्रांसफर किए गए थे.

हमलावरों की तस्वीर CCTV पर रिकॉर्ड हो गई थी
Photo Credit: NDTV
दुबई के हैंडलर ने इन युवकों से वादा किया था कि पेट्रोल बम फेंकने की घटना को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद उन्हें मोटी रकम दी जाएगी. लालच में आकर लड़कों ने हमला तो कर दिया लेकिन वारदात के बाद हैंडलर ने अपने पैर पीछे खींच लिए और उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली.
पुलिस अब उस बैंक खाते और स्कैनर की जांच कर रही है जिसके जरिए पैसे मंगाए गए थे .साथ ही दुबई के उस हैंडलर की पहचान करने की कोशिश की जा रही है जो झारखंड के युवाओं को बरगला कर राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है.

(रांची के आरएसएस दफ्तर के बाहर सुरक्षाकर्मी)
पाकिस्तानी कनेक्शन
बता दे कि रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दफ्तर पर हमले में पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है. जांच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार RSS दफ्तर पर हमला करने वाले तीनों आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थे. ISI ने इन तीनों को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया था. वारदात को अंजाम देकर भाग रहे आरोपियों को जांच एजेंसी ने बिहार के गयाजी स्टेशन से पकड़ा. इसके बाद मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.
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