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This Article is From Oct 09, 2024

वैश्विक शांति की जरूरत पर जोर देने वाली किताब "वसुधैव कुटुंबकम..'' का विमोचन

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया "वसुधैव कुटुंबकम: वैश्विक शांति के लिए आगे का मार्ग" पुस्तक का विमोचन

वैश्विक शांति की जरूरत पर जोर देने वाली किताब "वसुधैव कुटुंबकम..'' का विमोचन
किताब डॉ मारकंडेय राय, डॉ प्रभास चंद्र सिन्हा और डॉ सुरेंद्र कुमार पाठक ने लिखी है.
नई दिल्ली:

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने आवास पर पुस्तक "वसुधैव कुटुंबकम : वैश्विक शांति के लिए आगे का मार्ग" का विमोचन किया. इस अवसर पर पुस्तक के सह-लेखक डॉ मारकंडेय राय, डॉ प्रभास चंद्र सिन्हा, और डॉ सुरेंद्र कुमार पाठक के साथ सामाजिक नेता सुनील जोशी और गणेश वर्मा भी उपस्थित थे.

यह पुस्तक भारतीय प्राचीन दर्शन वसुधैव कुटुंबकम (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत पर आधारित है. यह वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के संदर्भ में इसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालती है. विद्वानों द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में शोध और विचारों की गहराई के साथ-साथ समकालीन संदर्भों में इस सिद्धांत के व्यावहारिक अनुप्रयोगों का भी विश्लेषण किया गया है. यह पुस्तक एकता, समावेशिता और स्थिरता के सिद्धांतों पर आधारित समाधान प्रस्तुत करती है, जो आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहायक हो सकते हैं.

लेखकों ने 500 से अधिक संदर्भों और 1,000 से अधिक वेब स्रोतों का गहन विश्लेषण करके वसुधैव कुटुंबकम का एक व्यापक अध्ययन प्रस्तुत किया है. इस पुस्तक में न केवल इस दर्शन के दार्शनिक मूल्यों को उजागर किया गया है, बल्कि इसका समकालीन शासन, नीति-निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में व्यावहारिक महत्व भी बताया गया है. ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को समाहित करते हुए, लेखक यह दर्शन G-20, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लागू करने के ठोस रणनीतिक सुझाव देते हैं, जिससे एक न्यायपूर्ण, समावेशी और शांतिपूर्ण विश्व की स्थापना हो सके.

पुस्तक के प्रधान अन्वेषक डॉ सुरेंद्र कुमार पाठक हैं, जिन्होंने इस प्रकाशन के शोध और सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डॉ पाठक ने बताया कि यह पुस्तक समकालीन वैश्विक संदर्भों में वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को कैसे लागू किया जा सकता है, इस पर एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है.

पुस्तक को ज्ञानदा प्रकाशन (P&D), नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है, और इसका प्रकाशन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज, नई दिल्ली और भारतीय शांति और वैश्विक सुरक्षा संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से हुआ है.

यह पुस्तक न केवल विद्वानों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, बल्कि उन सभी के लिए भी है जो वैश्विक शांति, एकता और समावेशिता के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं.

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