विज्ञापन

New Delhi World Book Fair 2026: साहित्य, तकनीक और संस्कृति, विश्व पुस्तक मेले में देसी जमीन पर करें व‍िदेशी साह‍ित्‍य की सैर

New Delhi World Book Fair 2026 (International Events Corner): नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 ने साबित कर दिया कि साहित्य वह भाषा है जिसे पूरी दुनिया समझती है. यह मंच केवल किताबें बेचने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के विचारों और परंपराओं के मिलन का एक बेहतरीन जरिया बना.

New Delhi World Book Fair 2026: साहित्य, तकनीक और संस्कृति, विश्व पुस्तक मेले में देसी जमीन पर करें व‍िदेशी साह‍ित्‍य की सैर
New Delhi World Book Fair 2026 | Bharat Mandapam | International Events Corner

New Delhi World Book Fair 2026 (International Events Corner): द‍िल्‍ली के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में इस वक्‍त ज्ञान का महाकुंभ लगा है. एक ओर जहां किताब और साह‍ित्‍य प्रेम‍ियों के लिए यह जगह किसी जन्‍नत से कम कहां. नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का 'इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर'  (International Events Corner) इस बार दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों (Sahitya Premi)  के लिए एक साझा घर बन गया. यहां यूरोप, अमेरिका से लेकर एशिया और लैटिन अमेरिका तक के लेखकों और कलाकारों ने हिस्सा लिया.

प्रकृति और इंसानी रिश्ते

रूसी लेखक इल्या कोचेर्गिन ने अपनी किताब 'इमरजेंसी एग्ज़िट' के जरिए बताया कि लिखना दरअसल प्रकृति से बात करने जैसा है. उन्होंने एक घोड़े और इंसान के रिश्ते के जरिए यह समझाया कि कैसे बदलती दुनिया में साहित्य को भी अपनी भाषा बदलनी चाहिए. कई सत्रों में साहित्य और जीवन के अनुभवों के आपसी संबंध एक प्रमुख विषय के रूप में उभरे, विशेषकर उन संदर्भों में जो प्रकृति, स्मृति और विस्थापन से जुड़े हैं.

इस संवाद में आधुनिक अलगाव (एलियनेशन) की स्थितियों के प्रति उत्तरदायी साहित्यिक रूपों की आवश्यकता पर बल दिया गया, साथ ही सहअस्तित्व और देखभाल से जुड़ी नैतिक चेतना को बनाए रखने की बात कही गई. अनुकूलन और सांस्कृतिक अनुवाद की भूमिका भी प्रमुख रही.

Also Read: वर्ल्ड बुक फेयर: कैसे मिलेगी एंट्री और पास, जानें छात्रों के लिए क्या कुछ होगा खास

Latest and Breaking News on NDTV

क्लासिक किताबों, नया रंग

विश्व प्रसिद्ध किताब 'द लिटिल प्रिंस' का भारतीय भाषाओं में 'छोटा राजकुमार' के रूप में रूपांतरण (Adaptation) पेश किया गया. अनुष्का रविशंकर और प्रिया कुरियन के काम ने दिखाया कि कैसे एक वैश्विक कहानी को भारतीय बच्चों के लिए उनकी अपनी संस्कृति के रंग में रंगा जा सकता है. यहां चर्चा हुई कि अनुवाद सिर्फ शब्दों को बदलना नहीं, बल्कि एक संस्कृति को दूसरी संस्कृति तक पहुँचाना है.

प्रथम बुक्स द्वारा प्रकाशित और भारत में फ्रांसीसी संस्थान द्वारा प्रस्तुत इस रूपांतरण में अनुष्का रविशंकर का अनुवाद/अनुकूलन और प्रिया कुरियन के चित्रांकन ने दिखाया कि दृश्य भाषा, संक्षिप्त कथानक और सांस्कृतिक संदर्भ मिलकर किसी वैश्विक रूप से मान्य कृति को युवा भारतीय पाठकों के लिए कैसे नया जीवन दे सकते हैं. चर्चा में अनुवाद को केवल भाषायी रूपांतरण नहीं, बल्कि प्रासंगिकता और मूलभाव के संतुलन के साथ किया गया सांस्कृतिक व्याख्यान माना गया.

Also Read: डर था, पर सपने उससे भी बड़े थे... बुक फेयर में शुभांशु शुक्ला ने बताया कैसे जीती मिशन ISS की 'जंग'

Latest and Breaking News on NDTV

कविता और भाषाओं का जादू

कविता के मंच पर स्पेनिश कवि गार्सिया लोर्का और भारतीय कवि जीवनानंद दास के कामों पर चर्चा हुई. यहाँ यह संदेश मिला कि भाषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन जज़्बात एक ही होते हैं.

फेडेरिको गार्सिया लोर्का के कार्यों के साथ भारतीय कवि जीवनानंद दास को केंद्र में रखकर जनरेशन ऑफ '27 पर हुई चर्चा ने भाषायी और राष्ट्रीय सीमाओं के पार साहित्यिक प्रभावों के प्रवाह को रेखांकित किया. अनुवाद एक केंद्रीय चिंता के रूप में उभरा, विशेषकर यह प्रश्न कि कविता विभिन्न भाषाओं में भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई कैसे बनाए रखती है. स्पेनिश, बास्क, हिंदी और बांग्ला जैसी भाषाओं में हुए काव्य-पाठ ने दिखाया कि बहुभाषिकता साहित्य की ताकत है, कोई रुकावट नहीं.

बच्चों का साहित्य: उपदेश नहीं, जिज्ञासा

बाल साहित्य और शिक्षाशास्त्र पर भी अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों से चर्चा हुई, जिनमें सुलभता और भावनात्मक संवेदनशीलता पर जोर दिया गया. इज़राइली शिक्षाविद् और लेखिका आइरिस आर्गामन ने बच्चों के लिए बड़े ऐतिहासिक आख्यानों को अंतरंग और पठनीय रूपों में ढालने की प्रक्रिया पर बात की.

उन्होंने तर्क दिया कि बाल साहित्य को अतीत से उपदेशात्मक हुए बिना संवाद करना चाहिए. उनके विचारों ने पठन को मूल्यांकन की बजाय जिज्ञासा और कल्पना पर आधारित अनुभव के रूप में रेखांकित किया, और कहानी कहन को विभिन्न समाजों में एक निर्माणकारी सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में पुनः स्थापित किया.

Latest and Breaking News on NDTV

यादें और पहचान

स्मृति, पहचान और अपनत्व के प्रश्न भी कई अंतरराष्ट्रीय संवादों में गूंजते रहे. कज़ाख़स्तान के लेखकों और विद्वानों ने यह चर्चा की कि व्यक्तिगत और सामूहिक स्मृतियाँ राष्ट्रीय आख्यानों को कैसे आकार देती हैं, विशेषकर उपनिवेशोत्तर और पोस्ट-सोवियत संदर्भों में.

साहित्य को निरंतरता और परिवर्तन के बीच संवाद का माध्यम बताया गया, जो समाजों को अपने इतिहास पर चिंतन करते हुए समकालीन सांस्कृतिक यथार्थ से जुड़ने का अवसर देता है. इन चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की साझा चिंताएँ सामने आईं. जैसे स्मृति का संप्रेषण, पहचान का मोलभाव और युवा संस्कृति की भूमिका.

Also Read: विश्व पुस्तक मेला : भारतीय सैन्य इतिहास और सांस्कृतिक विमर्श पर चर्चा, हेमा मालिनी और स्मृति ईरानी भी पहुंचीं

Latest and Breaking News on NDTV

थिएटर: भावनाओं का आईना

रूसी नाटककार यारोस्लावा पुलिनोविच ने नाटक को आज के दौर की भावनात्मक सच्चाई का आईना बताया. साथ ही, खाड़ी देशों और भारत के बीच साझा सांस्कृतिक और नाट्य परंपराओं पर भी गहरी चर्चा हुई.

साहित्य और तकनीक (AI)

आज के दौर में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए होने वाले अनुवाद पर भी बहस हुई. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मशीन अनुवाद तो कर सकती है, लेकिन वह उस गहराई और मानवीय संवेदना को नहीं पकड़ सकती जो एक इंसान कर सकता है. अनुवाद को 'क्रिएटिव मेहनत' माना गया, न कि सिर्फ तकनीकी काम.

भारत और ईरान: सदियों पुराना साथ

एक विशेष सत्र में भारत और ईरान के गहरे रिश्तों को याद किया गया. बताया गया कि 517 ईस्वी में 'पंचतंत्र' का फारसी अनुवाद (कलीला वा दिमना) इन दोनों देशों के बीच ज्ञान के लेन-देन का एक बड़ा सबूत है. ईरानी संस्कृति के बिना भारतीय इतिहास को समझना अधूरा है.

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 ने साबित कर दिया कि साहित्य वह भाषा है जिसे पूरी दुनिया समझती है. यह मंच केवल किताबें बेचने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के विचारों और परंपराओं के मिलन का एक बेहतरीन जरिया बना.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com