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डर था, पर सपने उससे भी बड़े थे... बुक फेयर में शुभांशु शुक्ला ने बताया कैसे जीती मिशन ISS की 'जंग'

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 में हजारों स्कूली बच्चों से सीधा संवाद किया.

डर था, पर सपने उससे भी बड़े थे... बुक फेयर में शुभांशु शुक्ला ने बताया कैसे जीती मिशन ISS की 'जंग'
  • ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने पुस्तक मेले में बच्चों के साथ अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनोखे अनुभव साझा किए
  • उन्होंने बच्चों में जोश भरते हुए कहा कि कोई भी छात्र आगे चलकर भारत के अंतरिक्ष मिशन का नेतृत्व कर सकता है
  • उन्होंने बच्चों को फोन का सही उपयोग करने, पढ़ाई करने और ज्ञानवर्धक पॉडकास्ट सुनने की सलाह दी
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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 में मंगलवार को बच्चों के सामने सपनों की सीमाएं टूटती दिखीं. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने सैकड़ों स्कूली बच्चों और उनके परिजनों से सीधा संवाद किया- सादगी, ईमानदारी और हल्के-फुल्के अंदाज के साथ. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मैं अकेला अंतरिक्ष नहीं गया था, मेरे साथ एक अरब लोगों की दुआएं थीं.” उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि कोई भी छात्र आने वाले समय में भारत के अंतरिक्ष मिशन का नेतृत्व कर सकता है.

20 दिन के मिशन के लिए 5 साल की तैयारी

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में सिर्फ 20 दिन बिताने के लिए उन्हें पांच साल तक कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा. लॉन्च के क्षण को याद करते हुए उन्होंने कहा, “जैसे ही फाल्कन-9 के इंजन जले, शरीर की हर हड्डी कांप रही थी. यह बिल्कुल वैसा एहसास था, जैसे पूरी तैयारी के बावजूद परीक्षा का मुश्किल प्रश्नपत्र सामने आ जाए.”

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला बुक फेयर में.

उन्होंने अंतरिक्ष यात्रा से होने वाली शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर भी खुलकर बात की. सांस लेने में परेशानी, शरीर पर पड़ने वाला दबाव, परिवार से दूर रहने का अकेलापन और पृथ्वी पर लौटने के बाद दोबारा चलना सीखने तक की प्रक्रिया को कठिन बताया.

ग्रुप कैप्टन ने बच्चों को दिए जीवन के मंत्र

छात्रों को जीवन का मंत्र देते हुए ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने कहा कि डर भविष्य की चिंता है, जबकि उत्साह उसी ऊर्जा का सकारात्मक रूप. चुनाव हमें करना होता है. उन्होंने बच्चों को मोबाइल फोन का बेहतर इस्तेमाल करने, पढ़ने की आदत डालने और ज्ञानवर्धक पॉडकास्ट सुनने की सलाह दी. छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की किताब ‘विंग्स ऑफ फायर' पढ़ने का सुझाव भी दिया.

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राकेश शर्मा, गगनयान और मिशन 2040 

13 जनवरी को भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के 77वें जन्मदिन का जिक्र करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि चार दशक बाद भी अंतरिक्ष से भारत के बारे में दिया गया उनका जवाब- “सारे जहां से अच्छा”- आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है.

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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने गगनयान मिशन, भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन और वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय को भेजने की योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा केवल संस्थानों से नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों से आगे बढ़ेगी जो डर के बजाय साहस और जिज्ञासा को चुनते हैं.

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किताबों के मेले में विचारों का संगम

विश्व पुस्तक मेले में मंगलवार को साहित्य, संविधान, स्मृति और पहचान जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चाएं हुईं. बच्चों के पवेलियन में रचनात्मक गतिविधियों ने माहौल को जीवंत बनाए रखा, जबकि भारतीय सेना बैंड की प्रस्तुति ने दर्शकों में देशभक्ति का जोश भर दिया.

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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 राजधानी के भारत मंडपम में 10 से 18 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है. आयोजकों ने पाठकों, छात्रों, शिक्षकों और परिवारों से अपील की है कि वे किताबों, विचारों और संवाद के इस महाकुंभ का हिस्सा बनें. प्रवेश निशुल्क है.

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