डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है. इस बार उसे 21 दिनों की पैरोल मिली है और वह रोहतक की सुनारिया जेल से निकलकर सिरसा में अपने मुख्य आश्रम पहुंचा है. यह 17वीं बार है जब वह अस्थायी राहत पर बाहर आया है. हर बार जब किसी बड़े कैदी को ऐसी राहत मिलती है, तो लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर पैरोल (Parole) क्या होता है, इस पर जेल में बंद लोग बाहर कैसे आ जाते हैं. कई लोग इस बात से कंफ्यूज होते हैं कि पैरोल, फरलो (Furlough) और जमानत (Bail) में क्या फर्क होता है. आइए बेहद आसान तरह से इन तीनों के बीच का अंतर जानते हैं.
पैरोल क्या होता है?
जब अदालत किसी अपराधी को दोषी ठहराकर जेल भेज देती है, उसके बाद पैरोल (Parole) का नियम लागू होता है. ये किसी कैदी को कुछ दिनों के लिए दी जाने वाली अस्थायी रिहाई है. मतलब पैरोल का मतलब जेल में सजा काट रहे कैदी को खास वजह से कुछ समय के लिए बाहर आने की अनुमति मिलना होता है. इसके लिए कोई ठोस वजह होनी जरूरी है, जैसे घर में किसी की गंभीर बीमारी, शादी या मौत. कैदी को इसके लिए जेल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती है.
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फरलो क्या होता है
फरलो (Furlough) भी सजा काट रहे कैदियों को ही मिलती है, लेकिन यह पैरोल से काफी अलग है. इसके लिए किसी पारिवारिक या मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत नहीं होती है. यह लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को मानसिक तनाव से राहत देने और समाज से जुड़े रहने के लिए एक 'नियमित ब्रेक' के तौर पर दी जाती है. इसे कैदियों के लिए एक तरह की छुट्टी माना जा सकता है. फरलो का मुख्य आधार कैदी का जेल के अंदर अच्छा व्यवहार (Good Conduct) होता है.
बेल क्या होती है
बेल (Bail) यानी जमानत उस व्यक्ति को मिलती है, जिस पर अपराध का आरोप है और मामला अदालत में चल रहा है. यानी जमानत आमतौर पर मुकदमे के दौरान या सजा होने से पहले हिरासत से बाहर आने से जुड़ी होती है. जैसे, अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और उसके खिलाफ केस चल रहा है. वह अदालत में जमानत की अर्जी दे सकता है.
भारत में जमानत के तरीके
1. रेगुलर बेल
जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार हो चुका हो और हिरासत में हो, तब वह अदालत से नियमित जमानत की मांग कर सकता है.
2. अग्रिम जमानत
अगर किसी व्यक्ति को आशंका है कि किसी मामले में उसकी गिरफ्तारी हो सकती है, तो वह गिरफ्तारी से पहले अदालत से अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है.
3. अंतरिम जमानत
कई मामलों में कोर्ट कुछ समय के लिए अस्थायी राहत दे सकती है. इसे अंतरिम जमानत कहा जाता है.
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