हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) एक बार फिर चर्चा में है. कुछ ही सप्ताह इसी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सीजेआई के खिलाफ धरना दे दिया था. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने उन्हीं छात्रों की खुलकर सराहना की है. उन्होंने छात्रों को 'समझदार, बोल्ड और साहस' बताते हुए कहा कि उन्होंने देश और दुनिया को दिखाया है कि एक विश्वविद्यालय छात्र, खासकर कानून का छात्र, कैसा होना चाहिए.
जस्टिस भुइयां रविवार को आयोजित 19वें NALSAR-Justice BR Sawhney Memorial Moot Court Competition के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे. अपने भाषण के आखिर में उन्होंने छात्रों के लिए खास टिप्पणी करते हुए कहा, "मैं अपनी बात खत्म करने से पहले नालसार के शानदार छात्रों के बारे में एक बात कहना चाहता हूं. आपने देश और दुनिया को दिखाया है कि विश्वविद्यालय का छात्र, वह भी कानून का छात्र, कैसा होना चाहिए. आप प्रतिभाशाली हैं, आप साहसी हैं और आप निडर हैं."
हालांकि जस्टिस भुइयां ने अपने संबोधन में किसी विवाद का सीधा जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ सप्ताह पहले नालसार का स्नातक बैच एक विवाद के केंद्र में रहा था.
क्या था पूरा विवाद?
अगस्त में नालसार के कुछ स्नातक छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाने का विरोध किया था. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छात्रों की आपत्ति सीजेआई की उन टिप्पणियों को लेकर थी, जो उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की थीं.
इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि नालसार के 2026 बैच के किसी भी छात्र का नामांकन अगले आदेश तक न किया जाए. इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन से उन छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और पूर्व छात्रों की पहचान करने को कहा गया था, जो कथित तौर पर इस अभियान से जुड़े थे. हालांकि यह आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया गया. बाद में बीसीआई ने स्पष्ट किया कि 2026 बैच के खिलाफ शुरू की गई सभी कार्यवाही समाप्त कर दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी छात्रों को दी थी राहत
14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए कहा था कि नालसार के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. बाद में शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है. अदालत ने नालसार छात्रों को लेकर जारी बीसीआई के पत्राचार को भी कानूनन अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया था.
कुलपति और शिक्षकों की भी प्रशंसा
अपने भाषण में जस्टिस भुइयां ने केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कुलपति प्रोफेसर श्रीकृष्ण देवा राव की भी प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने अपने दायित्वों का बेहतरीन तरीके से निर्वहन किया है और वही किया है जिसकी एक विश्वविद्यालय शिक्षक से अपेक्षा होती है.
उन्होंने कहा कि प्रोफेसर राव ने कुलपति के तौर पर विश्वविद्यालय का शानदार नेतृत्व किया है और उन्होंने न तो शिक्षकों को निराश किया और न ही छात्रों को. गौरतलब है कि 2022-23 में तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए जस्टिस भुइयां नालसार के पदेन कुलाधिपति भी रहे थे.
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