साल 1997. भारत का एक नौजवान अमेरिका की धरती पर कदम रखता है. जेब खाली, पर आंखों में बड़े सपने. लेकिन हकीकत का पहला थप्पड़ तब पड़ा जब पेट भरने के लिए कॉलेज में टॉयलेट साफ करने और पोछा लगाने का काम मिला. लोग ताना मारते थे "तुम्हारी अंग्रेजी का खराब लहजा तुम्हें कभी नौकरी नहीं दिलाएगा." भुखमरी का यह आलम था कि चेक अटकने पर कई दिन कचरे के डिब्बे से खाना ढूंढकर गुजारा करना पड़ा. आज वही शरण श्रीवास्तव अरबों डॉलर की कंपनियों के कर्ता-धर्ता हैं. यह बात फिल्मी लग सकती है, लेकिन उनके जीरो से हीरो बनने की सच्ची कहानी है.
स्कूल में होते थे बुली?
अमेरिका में अरबों डॉलर के बिजनेस खड़े करने वाले शरण श्रीवास्तव का भारत में बचपन किसी संघर्षपूर्ण और भावुक फिल्मी कहानी से कम नहीं था. वे एक बेहद साधारण मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार में पले-बढ़े. बचपन में शरण पढ़ाई-लिखाई में बहुत कमजोर थे. उन्हें कलरब्लाइंडनेस (रंग पहचानने में दिक्कत) थी, जिसके चलते उन्हें आर्ट क्लास से निकाल दिया गया था. साथ ही उनमें ADHD और डिस्लेक्सिया के लक्षण थे, जिससे वे क्लासरूम में बाकी बच्चों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते थे. जिसके कारण स्कूल में साथी बच्चे उन्हें अक्सर परेशान और बुली (Bully) किया करते थे.

पिता के फैसले और त्याग ने बदल दिया जीवन
जब स्कूल और पढ़ाई में रास्ते बंद दिखने लगे, तब करीब 13 साल की उम्र में, उनके पिता उन्हें एक टेनिस कोर्ट के पास ले गए और बोले, "अगर तुम्हें जिंदगी में आगे बढ़ना है और बाहर निकलना है, तो एक ऐसा हुनर सीखना होगा जो तुम्हारा पासपोर्ट बन सके." शरण ने उससे पहले कभी टेनिस रैकेट तक नहीं पकड़ा था, लेकिन पिता की बात मानकर उन्होंने पढ़ाई को पीछे छोड़ दिया और अगले छह साल तक दिन-रात सिर्फ और सिर्फ टेनिस की ट्रेनिंग में झोंक दिए.
शरण को अमेरिका भेजने के लिए उनके माता-पिता ने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी दांव पर लगा दी. शरण बताते हैं कि उनके पिता ने अपनी छोटी सी मोटरसाइकिल समेत घर का हर एक सामान बेच दिया, ताकि वे अपने बेटे के लिए जरूरी खर्च जुटा सकें.
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फर्श साफ करते हुए सीखी अंग्रेजी
अब आते हैं अमेरिका की जिंदगी पर. जहां शरण ने झाड़ू-पोछा लगाते हुए वॉकमैन पर टोनी रॉबिंस के ऑडियो टेप्स सुने. जो वॉकमैन सिर्फ अंग्रेजी सुधारने के लिए चालू हुआ था, उसने शरण को जिंदगी का फलसफा और गजब का आत्मविश्वास सिखा दिया.
आगे चलकर 20 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप बनाया और उसे मुनाफे में बेचा. इसी बीच एलन मस्क से मिली एक सलाह ने उनका नजरिया बदल दिया. "स्टैनफोर्ड बाद में भी मिल जाएगा, स्टार्टअप का मौका नहीं." शरण ने तुरंत फैसला लिया और बिजनेस की दुनिया में कूद पड़े.
बिल गेट्स को टेनिस सिखाते-सिखाते बन गए बिजनेसमैन
जिंदगी ने फिर मोड़ लिया. शरण करीब 5 साल तक लग्जरी रिजॉर्ट्स में टेनिस कोच रहे. यहां उन्होंने बिल गेट्स और रिचर्ड ब्रैनसन जैसी दिग्गज हस्तियों को टेनिस सिखाते-सिखाते बिजनेस और फैसले लेने के बड़े गुर सीख लिए.
इसके बाद जब उन्होंने वॉल स्ट्रीट का रुख किया, तो गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की नौकरी पाने के लिए लगातार 39 कड़े इंटरव्यूज का सामना किया. 2008 की मंदी के दौर में वे अपने पूरे बैच से चुने जाने वाले इकलौते उम्मीदवार बने और आगे चलकर तीन अरब डॉलर से ज्यादा का पोर्टफोलियो संभाला.

घर गिरवी रखकर खेला सबसे बड़ा दांव
गोल्डमैन सैक्स की शानदार नौकरी छोड़कर शरण ने 'टेलेस प्रॉपर्टीज' (Teles Properties) नाम की एक छोटी रियल एस्टेट कंपनी की कमान संभाली. जोखिम इतना बड़ा था कि उन्होंने पत्नी को बताए बिना अपना घर तक गिरवी रख दिया. नतीजा? महज 5 साल में कंपनी की वैल्यूएशन 30 करोड़ डॉलर से उछलकर 3.4 अरब डॉलर पहुंच गई.
इसके बाद उन्होंने 'रियल ब्रोकरेज' का वैल्यूएशन 20 करोड़ से बढ़ाकर 1.2 अरब डॉलर तक पहुंचाया और नैस्डैक की क्लोजिंग बेल बजाई. साल 2026 में शरण ने एलेक्स और लैला होरमोजी की मशहूर इन्वेस्टमेंट फर्म Acquisition.com के सीईओ (CEO) का पद संभाल लिया.
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