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वायरस से लेकर वैक्यूम बम तक, जंग में इन खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल पर है बैन; मचा सकते हैं तबाही

जैविक हथियार, केमिकल वेपंस और छिपे विस्फोटक आम लोगों के लिए भी लंबे समय तक खतरनाक साबित होते हैं. यही वजह है कि इनके इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बने हैं और कई हथियारों को बैन किया गया है.

वायरस से लेकर वैक्यूम बम तक, जंग में इन खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल पर है बैन; मचा सकते हैं तबाही
जंग के सबसे खतरनाक हथियार

युद्ध का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को बंदूक, मिसाइल और टैंक याद आते हैं. लेकिन सच ये है कि जंग में ऐसे कई हथियार भी इस्तेमाल होते हैं जो ज्यादा खतरनाक और डरावने होते हैं. कुछ हथियार जोरदार धमाके से सब कुछ तबाह कर देते हैं, तो कुछ धीरे-धीरे इंसानों और पूरे इलाकों को नुकसान पहुंचाते रहते हैं. बीमारी फैलाने वाले हथियार, जहरीली गैस, जमीन में छिपे बम और रेडिएशन फैलाने वाले धमाके, ये सब लंबे समय तक असर छोड़ते हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि इनका नुकसान सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं रहता, आम लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. यही वजह है कि जंग में इनके इस्तेमाल पर बैन है. 

जैविक हथियार

जैविक हथियार ऐसे हथियार होते हैं जिनसे बीमारी फैलाई जाती है. इनमें बहुत छोटे कीटाणु इस्तेमाल होते हैं जैसे वायरस और बैक्टीरिया. ये आंखों से दिखते नहीं हैं, लेकिन तेजी से लोगों को बीमार कर सकते हैं. एंथ्रेक्स, प्लेग और बोटुलिज्म जैसी गंभीर बीमारियां इसी तरह फैल सकती हैं. थोड़ी सी मात्रा भी बहुत बड़ी आबादी को संक्रमित कर सकती है. इसी खतरे को देखते हुए कई देशों ने ऐसे हथियारों पर रोक लगा रखी है.

रासायनिक हथियार

रासायनिक हथियार यानी केमिकल वेपंस जहरीले रसायनों से बनाए जाते हैं. इन्हें गैस या धुएं के रूप में हवा में फैलाया जाता है. जैसे ही ये शरीर के संपर्क में आते हैं, तुरंत असर दिखने लगता है. आंखों में जलन, त्वचा पर छाले और सांस लेने में परेशानी होने लगती है. कुछ रसायन इतने खतरनाक होते हैं कि जान भी जा सकती है. इसलिए दुनिया में इनके इस्तेमाल पर सख्त नियम बने हुए हैं.

लैंडमाइन और क्लस्टर बम

लैंडमाइन छोटे बम होते हैं जो जमीन के अंदर छिपे रहते हैं. जैसे ही कोई इंसान या गाड़ी इनके ऊपर से गुजरती है, ये फट जाते हैं. इन्हें साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि ये दिखाई नहीं देते लेकिन अचानक हमला करते हैं. इनका इस्तेमाल तमाम देश करते हैं.

क्लस्टर बम एक बड़ा बम होता है जिसके अंदर कई छोटे बम भरे होते हैं. विस्फोट के बाद ये बड़े इलाके में फैल जाते हैं. कई छोटे बम तुरंत नहीं फटते और बाद में लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं.

सफेद फास्फोरस और डर्टी बम

सफेद फास्फोरस हवा के संपर्क में आते ही जलने लगता है. ये बहुत तेज जलता है और शरीर पर गिर जाए तो गंभीर जलन कर सकता है. वहीं डर्टी बम एक साधारण बम की तरह फटता है, लेकिन इसके साथ खतरनाक रेडियोएक्टिव धूल भी फैलती है. इसका असर तुरंत समझ नहीं आता, लेकिन बाद में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

वैक्यूम बम, लेजर हथियार और एक्सपैंडिंग बुलेट

धमाके से पहले आग पकड़ने वाली गैस छोड़ी जाती है, फिर धमाका किया जाता है. इससे बहुत तेज गर्मी और जबरदस्त दबाव बनता है.
ब्लाइंडिंग लेजर हथियारों की तेज रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है. सीधा असर पड़े तो इंसान हमेशा के लिए अंधा हो सकता है.
एक्सपैंडिंग बुलेट शरीर में घुसते ही फैल जाती है. इससे अंदर ज्यादा नुकसान होता है और घाव बड़ा हो जाता है.

इन हथियारों को लेकर दुनिया में नियम बने हैं, लेकिन जंग के समय कई बार इनमें से कुछ का इस्तेमाल करने की खबरें सामने आती हैं, जो चिंता की वजह बनता है. क्योंकि ये वो हथियार हैं, जिनका असर लंबे समय तक लोगों की जिंदगी पर पड़ता है.

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