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एक ट्रेन में कुल कितने पहिए लगे होते हैं? ऐसे होती है गिनती...

Train Wheels Count: क्या आप जानते हैं कि एक ट्रेन में कितने पहिए होते हैं. ये कोच और इंजन की संख्या पर निर्भर करता है. जानिए रेलवे की वो खास तकनीकि, जिनकी मदद से ट्रेन के पहियों की गिनती की जाती है और ये कैसे काम करता है.

एक ट्रेन में कुल कितने पहिए लगे होते हैं? ऐसे होती है गिनती...
टरियों के एक खास हिस्से (सेक्शन) की शुरुआत में एक सेंसर लगा होता है.

Train Wheels Count: बचपन से लेकर आज तक जब आपने ट्रेन को गुजरते हुए देखा होगा, तो आपके मन में भी कई सवाल आए होंगे. ऐसा ही एक मजेदार सवाल है कि आखिर इतनी लंबी-चौड़ी ट्रेन में कितने पहिए लगे होते हैं या फिर किसी ने पूछा हो कि 22 कोच वाली ट्रेन में कितने टायर होते हैं. दिलचस्प बात ये है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि इन्हें गिनना बहुत मुश्किल है. लेकिन ऐसा नहीं है. इसका एक बेहद आसान तरीका है. तो चलिए जानते हैं ट्रेन में कुल कितने पहिए लगे होते हैं और इनकी गिनती कैसे की जाती है.

ट्रेन में कुल कितने पहिए लगे होते हैं

ट्रेन के हर कोच यानी डिब्बे के नीचे दो बोगी लगी होती हैं और हर बोगी में चार पहिए होते हैं. यानी एक कोच में कुल 8 पहिए फिट होते हैं. अब अगर ट्रेन में 20 कोच हैं, तो सिर्फ कोच के ही 160 पहिए हो गए. इसमें इंजन के पहिए अलग से जुड़ते हैं. भारतीय रेलवे के ज्यादातर डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन में 6 एक्सल होते हैं यानी इंजन में 12 पहिए लगे होते हैं. कुछ इंजन में यह संख्या थोड़ी कम-ज्यादा भी हो सकती है, यह इंजन के टाइप पर निर्भर करता है. 

क्या हर ट्रेन में एक जितने ही पहिए होते हैं

हर ट्रेन के पहियों की गिनती अलग होती है, क्योंकि ये पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें कितने कोच जुड़े हैं. लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेन में जहां 24 तक कोच हो सकते हैं, वहीं लोकल या पैसेंजर ट्रेन में यह संख्या कम भी हो सकती है.

बिना इंजन किस ट्रेन में कितने पहिए होते हैं

  • 16 कोच हैं, तो कुल 128 पहिए
  • 20 कोच हैं, तो कुल 160 पहिए
  • 22 कोच हैं, तो कुल 176 पहिए
  • 24 कोच हैं, तो कुल 192 पहिए

ट्रेन के पहियो की गिनती कैसे होती है

इतनी तेज दौड़ती ट्रेन के पहिए गिनना आसान काम नहीं है. इसके लिए रेलवे एक बेहद स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल करता है. ट्रेन के पहियों की सटीक गिनती करने वाली इस मशीन को एक्सेल काउंटर (Axle Counter) कहा जाता है. ट्रेन के दो आमने-सामने वाले पहियों को जोड़ने वाली लोहे की रॉड को एक्सेल (Axle) कहते हैं. यह मशीन सीधे पहियों की बजाय इस एक्सेल को ही गिनती है. यह एक तरह का हाई-टेक सेंसर होता है, जो पटरियों के किनारे सेट किया जाता है. पुराने जमाने में यह काम मकैनिकल तरीके से होता था, लेकिन आजकल इसमें इलेक्ट्रिकल या फाइबर ऑप्टिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.

एक्सेल काउंटर कैसे काम करता है 

1. एंट्री पॉइंट पर गिनती

पटरियों के एक खास हिस्से (सेक्शन) की शुरुआत में एक सेंसर लगा होता है. जैसे ही ट्रेन इस पॉइंट से गुजरती है, यह सेंसर ट्रेन के एक-एक पहिये (एक्सेल) को गिन लेता है और डेटा पास के ही एक कंप्यूटर यानी इवैल्युएटर (Evaluator) को भेज देता है.

2. एग्जिट पॉइंट पर गिनती और नंबरों को मिलाना

अब जब ट्रेन उस सेक्शन से बाहर निकलती है, तो वहां लगा दूसरा सेंसर फिर से ट्रेन के पहियों को गिनता है. अब कंप्यूटर दोनों नंबरों को मिलाता है. अगर अंदर जाते समय ट्रेन में 100 पहिए थे और बाहर निकलते समय भी 100 पहिए ही हैं, तो इसका मतलब है कि ट्रेन सुरक्षित निकल गई है और ट्रैक पूरी तरह खाली है. अगर गिनती में एक भी पहिया कम निकलता है, तो तुरंत रेड सिग्नल हो जाता है, क्योंकि इसका मतलब है कि ट्रेन का कोई हिस्सा टूटकर पटरियों पर ही छूट गया है.

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