विज्ञापन

उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार का निधन, 1984 दंगों में आरोप से लेकर सजा तक पूरी कहानी

17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 के दंगों में उनकी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके अगले ही दिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार का निधन, 1984 दंगों में आरोप से लेकर सजा तक पूरी कहानी
सज्जन कुमार कांग्रेस पार्टी के सदस्य रह चुके थे. (Photo: NDTV)
  • तिहाड़ जेल में उम्रकैद काट रहे सज्जन कुमार निधन हो गया.
  • दिल्ली HC ने 2018 में उन्हें 1984 दंगों में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
  • फरवरी 2025 में एक अन्य मामले में भी सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
नई दिल्ली:

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया. उन्होंने 80 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कुमार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व सांसद को नवंबर 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पालम कॉलोनी इलाके में हुई हिंसा के दौरान पांच लोगों की मौत का दोषी पाया था. कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2018 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सजा को चुनौती देने वाली उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

कौन थे सज्जन कुमार?

सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में रघुनाथ सिंह और मी कौर के घर हुआ था. उन्होंने मैट्रिक तक की शिक्षा प्राप्त की. सज्जन कुमार सियासत में आने से पहले पार्षद और बेकरी स्टोर के मालिक थे. साल 1977 में सज्जन कुमार ने दिल्ली पार्षद के रूप में शपथ ली. वे पहले दिल्ली नगर निगम के लिए चुने गए और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने. उन्हें इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के वफादार तौर पर याद किया जाता है.

साल 1980 में सज्जन कुमार कांग्रेस के टिकट पर बाहरी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से सातवीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1991 में वे फिर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. 2004 में, उन्होंने रिकॉर्ड 85 लाख से ज्यादा वोटों के साथ बाहरी दिल्ली सीट फिर से जीती.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के 1984 के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार एक प्रमुख आरोपी पाया गया. इन दंगों में हजारों सिखों की हत्या हुई, जिनमें से ज्यादातर दिल्ली में मारे गए. उस पर सुल्तानपुरी, दिल्ली कैंट और राजधानी के अन्य इलाकों में भीड़ को उकसाने का आरोप था. चश्मदीदों का दावा था कि सज्जन कुमार ने भड़काऊ भाषण दिए और दंगाइयों को 100 रुपये और शराब मुहैया कराई.

लेकिन राजनीतिक प्रभाव और गवाहों को डराने-धमकाने की वजह से दशकों तक सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई में देरी हुई. पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (PUDR) और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की 1984 की एक तथ्य-जांच रिपोर्ट में उन्हें मुख्य उकसाने वाला बताया गया. दंगों के पीड़ितों ने पुलिस स्टेशन में उनका सामना किया और सिख शरणार्थियों ने बाद में उनकी सहायता की कोशिशों को अस्वीकार कर दिया.

ये भी पढ़ें: 84 दंगों में उम्रकैद काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन

2005 से पहले दिल्ली पुलिस ने दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका की जांच की थी. बाद में जस्टिस जीटी नानावती आयोग की सिफारिश के आधार पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई ने पाया कि सज्जन कुमार ने चश्मदीदों के बयानों से अपना नाम मिटाने के लिए पुलिस के साथ साजिश रची थी.

2010 में सज्जन कुमार पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था. 2013 में एक जिला अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी.

17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 के दंगों में उनकी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अगले दिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया. 2020 और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी कई जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. 27 अप्रैल 2022 को सज्जन कुमार को दंगों से संबंधित एक मामले में जमानत मिल गई, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने की वजह से वे जेल में ही रहे.

ये भी पढ़ें: 1984 सिख विरोधी दंगे: ‘मानवता के खिलाफ अपराध'; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर मामलों में सात याचिकाएं खारिज 

12 फरवरी 2025 को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें एक दूसरे मामले में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या के लिए उकसाने और उसमें भाग लेने का दोषी ठहराया. यह हत्या 1 नवंबर 1984 को हुई थी. कांग्रेस समर्थकों की भीड़ ने दोनों सिख पुरुषों पर पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जला दिया था. सज्जन कुमार और उनके समर्थकों ने जसवंत सिंह की पत्नी और भतीजी पर भी हमला किया था. चौदह चश्मदीदों ने उनके खिलाफ गवाही दी थी. 25 फरवरी 2025 को उन्हें इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाते हुए शिकायतकर्ता की मृत्युदंड की मांग को खारिज कर दिया. कोर्ट ने 12 फरवरी को सज्जन कुमार को दोषी ठहराया और तिहाड़ जेल से मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी. वे तिहाड़ की जेल में सजा काट रहे थे.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sajjan Kumar, Sajjan Kumar 1984 Riots Case, 1984 Anti Sikh Riot, Tihar Jail, Sajjan Kumar Congress
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com