Rare Himalayan Bee India: अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले से जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है. भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने पहली बार भारत में दुर्लभ हिमालयी मधुमक्खी ‘कोलेट्स भूटानिकस' (Colletes bhutanicus) की उपस्थिति दर्ज की है. यह खोज न केवल पूर्वी हिमालय में परागण करने वाले जीवों की विविधता को समझने में मदद करेगी, बल्कि पर्वतीय कृषि और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मधुमक्खी अकेले रहने वाली प्रजाति है और फूलों के परागण में अहम भूमिका निभाती है. इस खोज ने अरुणाचल प्रदेश को एक बार फिर देश के प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बना दिया है.
तवांग में सर्वेक्षण के दौरान हुई खोज
अधिकारियों के अनुसार भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिक दिब्यज्योति घोष, के.ए. सुब्रमण्यम और धृति बनर्जी ने हाल ही में तवांग जिले में जैव विविधता सर्वेक्षण किया था. इसी सर्वेक्षण के दौरान उन्होंने ‘कोलेट्स भूटानिकस' नामक दुर्लभ हिमालयी मधुमक्खी को दर्ज किया. वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में इस प्रजाति की यह पहली आधिकारिक रिकॉर्डिंग है.

Rare Himalayan Bee: तवांग में मिली दुर्लभ मधुमक्खी
उपमुख्यमंत्री ने बताया गर्व का विषय
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने इस खोज को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया. उन्होंने कहा कि यह खोज दर्शाती है कि स्थानीय परागणकर्ता पर्वतीय कृषि को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. साथ ही यह राज्य की समृद्ध जैव विविधता को भी उजागर करती है.
पहले सिर्फ भूटान और चीन में मिली थी
शोधकर्ताओं ने बताया कि इससे पहले यह प्रजाति भूटान, चीन और तिब्बत (शिजांग) क्षेत्र में दर्ज की जा चुकी है. अरुणाचल प्रदेश में इसकी मौजूदगी दर्ज होने से हिमालयी क्षेत्र में परागण करने वाले जीवों के विस्तार और उनकी विविधता के बारे में नई जानकारी प्राप्त होगी.
1500 से 3800 मीटर की ऊंचाई पर रहती है
वैज्ञानिकों के अनुसार यह मधुमक्खी 1,500 मीटर से 3,800 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है. सर्वेक्षण के दौरान इसे सरसों, कुट्टू, धनिया, बीन्स, मिर्च और बैंगन सहित 25 प्रकार के फूलों वाले पौधों पर देखा गया. इससे संकेत मिलता है कि यह विभिन्न फसलों और वनस्पतियों के परागण में सक्रिय भूमिका निभाती है.
शहद वाली मधुमक्खियों से अलग है यह प्रजाति
वैज्ञानिकों ने बताया कि ‘कोलेट्स भूटानिकस' शहद बनाने वाली सामान्य मधुमक्खियों की तरह बड़े छत्तों या कॉलोनियों में नहीं रहती. यह एक अकेले रहने वाली मधुमक्खी है, जो अपना अलग घोंसला बनाती है. फूलों से पराग और मकरंद एकत्र करते समय यह एक पौधे से दूसरे पौधे तक पराग पहुंचाती है, जिससे फसलों और वनस्पतियों का प्रजनन संभव होता है.
पूर्वी हिमालय की जैव विविधता को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से पूर्वी हिमालय में मधुमक्खियों की विविधता को लेकर नए शोध की संभावनाएं बढ़ेंगी. अरुणाचल प्रदेश अपनी भौगोलिक विविधता, ऊंचाई, जलवायु और समृद्ध वनस्पतियों के कारण देश के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में गिना जाता है. ऐसे दूरदराज पर्वतीय इलाकों में अभी भी कई प्रजातियां पूरी तरह दस्तावेजीकृत नहीं हैं.
संरक्षण की जरूरत पर जोर
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय बदलावों के दौर में ऐसी प्रजातियों का अध्ययन और संरक्षण बेहद जरूरी है. तवांग में ‘कोलेट्स भूटानिकस' की खोज इस बात का संकेत है कि हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी पहचान और संरक्षण के लिए लगातार वैज्ञानिक सर्वेक्षण की आवश्यकता है.
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