- मप्र के मंत्री कुंवर विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं
- सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से विजय शाह के खिलाफ अभियोजन मंजूरी देने में देरी पर जवाब मांगा है
- कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी मीडिया को दी थी, जिसके बाद मंत्री ने आपत्तिजनक बयान दिया था
Vijay Shah Colonel Sofia Qureshi Case: मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह एक बार फिर चर्चा में हैं. 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ (7 मई 2026) पर उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने में हो रही देरी पर जवाब मांगा है. ज्ञात हो कि मंत्री शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "अब हमारे आदेश का पालन कीजिए... बहुत हो गया. मंत्री को सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी."
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि "मंत्री महोदय कर्नल सोफिया की तारीफ करना चाहते थे, लेकिन अपनी बात सही तरीके से नहीं रख पाए." उन्होंने यह भी साफ़ किया कि यह उनका निजी विचार था, न कि मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष. इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा, "यह बयान सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और फिर उन्हें कोई पश्चाताप भी नहीं है." कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए और SIT द्वारा अभियोजन की मंजूरी मांगे जाने के बाद सरकार को तत्काल फैसला लेना चाहिए था.
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तो तुरंत माफी मांगी गई होती
आईएएनस न्यूज एजेंसी के अनुसार, सुनवाई के दौरान जब SG ने फिर दोहराया कि शाह से शायद गलती से कुछ निकल गया हो तो CJI सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि राजनेता आम तौर पर अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर काफी सावधान और स्पष्ट होते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "एक राजनेता होने के नाते, उन्हें पता है कि अपनी बात कैसे कहनी है और महिला अधिकारी की तारीफ कैसे करनी है." कोर्ट ने आगे कहा कि अगर यह सचमुच जबान फिसलने की वजह से हुआ होता तो इसके तुरंत बाद माफी भी मांगी गई होती.
कोर्ट द्वारा गठित SIT द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट का भी सुप्रीम कोर्ट ने जिक्र किया और कहा कि रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि शाह को इस तरह की टिप्पणियां करने की आदत है.
शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि मंत्री ने अपनी टिप्पणियों के लिए पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी की ईमानदारी पर सवाल उठा दिया. कोर्ट ने कहा कि आपने माफी इसलिए मांगी, क्योंकि कोर्ट ने संज्ञान लिया. चिट्ठी लिखना माफी नहीं है. यह सिर्फ एक झूठा बचाव करने के लिए था. CJI कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, “सबसे पहली चीज तो यह होनी चाहिए थी कि आप हाथ जोड़कर माफी मांगते.”
पीठ ने शाह और राज्य की ओर से आगे की दलीलें सुनने से इनकार कर दिया और मध्य प्रदेश सरकार को 19 जनवरी के अपने निर्देश का चार सप्ताह के भीतर पालन करने को कहा, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार को मंजूरी देने के संबंध में उचित निर्णय लेने के लिए कहा गया था. अब इस मामले की सुनवाई चार हफ़्ते बाद होगी.
क्या है पूरा मामला?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी. इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 की देर रात POK स्थित आतंकी ठिकानों पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत एयर स्ट्राइक की थी. कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं, जिन्होंने इस ऑपरेशन की जानकारी मीडिया को दी थी.
ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद, एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने कर्नल कुरैशी और उनके धर्म पर विवादित टिप्पणी की. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे सेना और महिला अधिकारी का अपमान बताया था. पुलिस ने शाह के खिलाफ BNS की धारा 152, 196(1)(b) और 197(1)(c) के तहत केस दर्ज किया है, जो देश की संप्रभुता को खतरे में डालने और विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाने से संबंधित हैं.
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