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Cyclone Arnab क्या है? जानिए कैसे बना यह मौसम सिस्टम, किसने रखा नाम और किन राज्यों पर पड़ा असर

Cyclone Arnab Kya Hai : साइक्लोन अर्नब (Cyclone Arnab) नाम से चर्चित मेट्रोजिकल सिस्टम असल में एक डीप डिप्रेशन था. जानिए यह कैसे बना, इसे ऑफिशियली चक्रवात क्यों नहीं माना गया और आंध्र प्रदेश व ओडिशा समेत किन इलाकों में इसका असर देखने को मिला.

Cyclone Arnab क्या है? जानिए कैसे बना यह मौसम सिस्टम, किसने रखा नाम और किन राज्यों पर पड़ा असर
आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई.

IMD Weather Update : सितंबर 2026 के लास्ट वीक में Cyclone Arnab नाम सोशल मीडिया और इंटरनेट पर छाया रहा. कई लोगों ने इसे चक्रवात बताया, लेकिन भारतीय मौसम मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यह कोई आधिकारिक चक्रवाती तूफान नहीं था. IMD ने इसे डीप डिप्रेशन (Deep Depression) यानी गहरे कम दबाव वाले मौसमीय सिस्टम के रूप में क्लासीफाई किया था. यह पूरा सिस्टम कैसे बना, इसका नाम साइक्लोन अर्नब कैसे पड़ा और इसे चक्रवाती तूफान क्यों नहीं कहा गया, ये सारी बातें आपको आगे आर्टिकल में हम विस्तार से बता रहे हैं...

कैसे बना यह सिस्टम?

बंगाल की खाड़ी में पहले एक कम दबाव का क्षेत्र बना. इसके बाद यह धीरे-धीरे मजबूत होकर डिप्रेशन और फिर 22 सितंबर 2026 को डीप डिप्रेशन में बदल गया.

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र का गर्म पानी और हवा में मौजूद नमी इस सिस्टम के मजबूत होने की मुख्य वजह बने.

इसे चक्रवात क्यों नहीं कहा गया?

IMD के नियमों के अनुसार, अगर किसी मौसम सिस्टम में हवा की रफ्तार 63 किमी प्रति घंटा या उससे ज्यादा हो जाए, तभी उसे चक्रवाती तूफान (Cyclone) माना जाता है और उसका आधिकारिक नाम रखा जाता है.

इस सिस्टम में हवा की अधिकतम रफ्तार करीब 52 से 61 किमी प्रति घंटा रही. इसलिए इसे चक्रवात नहीं, बल्कि डीप डिप्रेशन की कैटेगरी में रखा गया. 

Arnab नाम कहां से आया?

Arnab नाम बांग्लादेश की ओर से चक्रवातों के लिए सुझाई गई नामों की लिस्ट का हिस्सा है. हालांकि सितंबर 2026 में बने इस सिस्टम को IMD ने आधिकारिक रूप से Arnab नाम नहीं दिया था. यह नाम सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में ज्यादा इस्तेमाल हुआ.

Cyclone Name Official Notification

किन राज्यों पर पड़ा असर?

यह मौसम सिस्टम 23-24 सितंबर की रात आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम तट के पास पहुंचा. इसके कारण-

  • आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई.
  • दक्षिणी ओडिशा में तेज हवाएं और बारिश दर्ज की गई.
  • कई जगह जलभराव की स्थिति बनी.
  • फसलों और आवागमन पर असर पड़ने की आशंका रही.

25 सितंबर तक यह सिस्टम कमजोर होकर ओडिशा और उससे लगे छत्तीसगढ़ क्षेत्र के ऊपर सामान्य डिप्रेशन में बदल गया.

यह घटना बताती है कि हर तेज बारिश या कम दबाव वाला सिस्टम चक्रवात नहीं होता. साथ ही यह भी समझने का अच्छा उदाहरण है कि मौसम विभाग किस आधार पर किसी सिस्टम को डिप्रेशन, डीप डिप्रेशन या चक्रवात घोषित करता है.

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