IIT Campus Placement : ऑल IITs प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) ने कैंपस प्लेसमेंट को लेकर बड़ा कदम उठाया है. जॉब ऑफर देने के बाद उन्हें पूरा नहीं करने वाली 22 कंपनियों को अगले दो प्लेसमेंट सीजन के लिए बैन कर दिया है. यह कदम उन कंपनियों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने छात्रों को नौकरी का ऑफर देने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं दी. AIPC ने कंपनियों को अपनी कमिटमेंट पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया था, लेकिन तय डेडलाइन तक कई कंपनियों ने ऑफर स्वीकार करने वाले छात्रों को नौकरी नहीं दी.
हालांकि IITs से जुड़े प्रोफेसरों के अनुसार इसे "ब्लैकलिस्टिंग" नहीं बल्कि "नॉन-कोऑपरेशन" की कार्रवाई कहा जा रहा है. इसका मतलब है कि ये कंपनियां अगले दो प्लेसमेंट सीजन तक IIT कैंपस रिक्रूटमेंट प्रोसेस में हिस्सा नहीं ले सकेंगी.
150 से ज्यादा ऑफर प्रभावित
अधिकारियों के मुताबिक, इस बार मामला पिछले साल की तुलना में कहीं बड़ा है. देश के 23 IITs में 150 से अधिक जॉब ऑफर पर असर पड़ा है. बताया गया है कि कुछ कंपनियों ने अकेले 10 से 15 तक ऑफर वापस ले लिए.
सूत्रों के अनुसार, टेक कंपनी Oracle भी उन कंपनियों में शामिल है, जिन पर दो साल की नॉन-कोऑपरेशन कार्रवाई हो सकती है. दावा किया गया है कि कंपनी ने IIT छात्रों को दिए गए करीब 40 ऑफर पूरे नहीं किए. हालांकि लास्ट लिस्ट और किन्हें ऑफर लेटर के बाद नौकरी नहीं मिली इसका आंकड़ा तैयार किया जा रहा है.
स्टार्टअप्स भी जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई की सूची में कुछ स्टार्टअप कंपनियां भी शामिल हैं. सभी IITs को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक मामले का अपडेटेड डिटेल्ट AIPC को भेजें, ताकि फाइनल लिस्ट तैयार की जा सके.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नया प्लेसमेंट सीजन होने वाला है और खासकर टेक सेक्टर में एंट्री-लेवल नौकरियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
छात्रों के लिए नए मौके तलाश रहे IITs
जिन छात्रों के ऑफर वापस लिए गए हैं, उनके लिए IITs के प्लेसमेंट ऑफिस ऑफ्शनल चांस खोजने में जुटे हैं. जो स्टूडेंट्स इससे प्रभावित हुए हैं उनके रिज्यूमे उन कंपनियों के साथ साझा किए जा रहे हैं, जो फिलहाल कैंपस में भर्ती कर रही हैं. भर्ती करने वाली कंपनियों से खाली पदों पर इन छात्रों को मौका देने का रिक्वेस्ट भी किया गया है.
हालांकि संस्थानों के पास ऐसे छात्रों की कोई आंकड़ा नहीं है जो अभी भी नौकरी की तलाश में हैं. कई छात्र ऑफ-कैंपस आवेदन या अपने नेटवर्क के जरिए नौकरी हासिल कर चुके हो सकते हैं, जिसकी जानकारी संस्थानों को नहीं मिली है.
IITs का मानना है कि यह कदम केवल कंपनियों को जवाबदेह बनाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने और प्लेसमेंट प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए भी जरूरी है.
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