देश के कोयला राजधानी धनबाद के केंदुआडीह इलाके में दहशत लगातार बढ़ता जा रहा है. जमीन के नीचे जहर अब सीधे बड़े हादसे की ओर बढ़ता दिख रहा है. धनबाद–बोकारो मुख्य मार्ग पर बुधवार सुबह लगभग दो फीट धंसने के बाद गुरुवार (15 अप्रैल) को पुराने महाप्रबंधक आवास की चारदीवारी धराशायी हो गई और जमीन से फिर से कार्बन मोनोक्साइड गैस निकलने लगी, जिससे आसपास के 500 से अधिक परिवारों में दहशत का माहौल बना हुआ है.
केंदुआडीह क्षेत्र में धनबाद–बोकारो मुख्य सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग‑32 का भाग) बुधवार सुबह अचानक करीब दो फीट तक धंस गई, जिसके बाद आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई.
जमीन से कार्बन मोनोक्साइड गैस
इस धंसान के कुछ घंटे बाद ही पुराने महाप्रबंधक आवास की चारदीवारी डगमगा कर धराशायी हो गई और जमीन से कार्बन मोनोक्साइड गैस निकलने लगी. स्थानीय लोग बता रहे हैं कि यहां गैस की तीव्र गंध से सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है. तकनीकी टीमों ने गैस की तीव्रता लगभग 2047 ppm तक रिकॉर्ड की है, जो सामान्य स्वीकृत स्तर से कई गुना अधिक और जानलेवा माना जाता है.

इस क्षेत्र में दिसंबर 2025 से कार्बन मोनोक्साइड गैस रिसाव जारी है, जिसके चलते अब तक चार लोगों की मौत दर्ज हो चुकी है. लोगों में यह डर बना हुआ है कि किसी भी दिन यह जमीनें और धंस सकती हैं या गैस की मात्रा और बढ़कर बड़ा हादसा या और मौतें हो सकती हैं.
BCCL CMD और DC किया मुआयना
घटना की गंभीरता को देखते हुए धनबाद के डीसी डॉ. आदित्य रंजन, एसएसपी और बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने तुरंत केंदुआडीह घटनास्थल का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने सड़क के धंसान, गैस रिसाव, दीवारों के धराशायी होने और आसपास के घरों में दरारों की स्थिति को “अत्यंत भयावह” और “अतिसंवेदनशील जोन” करार दिया.

BCCL CMD मनोज अग्रवाल ने क्या कहा
“गैस रिसाव 3 दिसंबर 2025 से लगातार जारी है. हमने IIT‑ISM और अन्य वैज्ञानिक टीमों को बुलाया था, नाइट्रोजन भराई और अन्य उपाय किए, लेकिन स्थिति और भी खराब होती जा रही है. यह इलाका अब सुरक्षित नहीं है. लोगों से अपील है कि वे जल्द से जल्द बेलगड़िया की ओर शिफ्ट हो जाएं, वरना बड़ा हादसा हो सकता है.”
डीसी डॉ. आदित्य रंजन ने कहा, “केंदुआडीह भूमिगत आग, गैस रिसाव और भूधंसान की धमक से घिरा है. तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर यह जोन असुरक्षित घोषित किया जा चुका है. लोगों से अनुरोध है कि वे अविलम्ब अपने घरों को खाली कर बेलगड़िया शिफ्ट हो जाएं. बेलगड़िया हाई‑टेक कॉलोनी के रूप में विकसित है, जहां आवास, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही रोजगार के नए विकल्प भी खुल रहे हैं; टेक्सटाइल निर्यातकों से बातचीत चल रही है, ताकि यहां कार्यालय और छोटे‑मझोले उद्योग लग सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकें.”
केंद्र और राज्य सरकार ने भी दिया आदेश
स्थानीय लोगों के विस्थापन और सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र और झारखंड राज्य सरकार लगातार दखल दे रही हैं. सूत्रों के अनुसार, दोनों स्तरों की सरकारों ने धनबाद जिला प्रशासन और बीसीसीएल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं. जिसमें कहा गया है.
- केंदुआडीह और आसपास के हाई‑रिस्क इलाकों से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द बेलगड़िया या अन्य निर्धारित आवास बस्तियों में शिफ्ट किया जाए.
- विस्थापन के दौरान विस्थापन पैकेज, मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं पूरी तरह लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और BCCL की है.
- जेआरडीए और अन्य बोर्ड द्वारा झरिया मास्टर प्लान व बेलगड़िया टाउनशिप के तहत बने ठोस आवास इकाई इस शिफ्ट के लिए अलग‑अलग चरणों में प्रयोग किए जा रहे हैं.
प्रशासन का यह भी कहना है कि जो परिवार 2017 के शुरुआती सर्वे में “शिफ्ट सूची” में नहीं थे, लेकिन अब खतरनाक इलाके में रहने को मजबूर हैं, उनको भी शिफ्ट और मुआवजा देने के लिए विशेष चर्चा चल रही है.
तकनीकी राहत और अभी तक की व्यवस्थाएं
DGMS, IIT‑ISM, CIMFR, जेआरडीए और BCCL की तकनीकी टीमें लगातार जगह‑जगह माप और निगरानी कर रही हैं, ताकि नई दरारें, तापमान बढ़ने या धंसान के संकेत तुरंत पकड़े जा सकें.
भूधंसान और गैस रिसाव के खतरे को कम करने के लिए मिट्टी‑बालू भराई, नाइट्रोजन फिलिंग और गैस निकास के वैकल्पिक मार्ग बनाने के प्रयोग किए जा रहे हैं.
धनबाद–बोकारो मुख्य मार्ग को ब्लॉक कर वैकल्पिक रूट बनाया गया है, ताकि ट्रैफिक कम से कम एरिया से गुजरे. साथ ही गैस‑प्रभावित साइटों के आसपास बैरिकेडिंग और रास्तों की सुरक्षा जांच तेज कर दी गई है.
लोगों का डर और भविष्य का सवाल
हालांकि प्रशासन और कंपनी लगातार आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन गरीब और दिहाड़ी मजदूर परिवारों को अभी भी संदेह है कि शिफ्ट होने के बाद उनकी आजीविका बनी रहेगी या नहीं.मुआवजा और रोजगार वादे वास्तविकता में कितना ठोस होंगे.
इस बीच अधिकारियों ने साफ किया है कि जब तक लोग पूरी तरह बेलगड़िया शिफ्ट नहीं होंगे, तब तक केंदुआडीह एक “जमीन के नीचे मौत” का इलाका ही बना रहेगा.
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