Sahibganj Mobile Theft Gang News: राजधानी दिल्ली में मोबाइल चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसकी जड़ें झारखंड के साहिबगंज जिले के महाराजपुर गांव से जुड़ी हैं. उत्तरी दिल्ली पुलिस ने इस गांव के 6 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 46 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं.
वे बच्चों को छह महीने या एक साल के लिए किराए पर लेते थे
पुलिस जांच में सामने आया कि महाराजपुर गांव में रहने वाले कुछ ऐसे माफिया हैं,जो इन बच्चों को चोरी के लिए 6 महीने या 1 साल के लिए किराये इनके घरवालों से कुछ कीमत देकर किराए पर लेते है. उसके बाद इन्हें दिल्ली- मुंबई जैसे महानगरों में लाया जाता है और उन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों में जेब काटने और बैग से मोबाइल उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है. उस टाइम पीरियड में बच्चे जो भी चोरी करते है वो सारा ठेकेदार का होता है.
कैसे काम करता है ये पूरा गिरोह
उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांठिया के मुताबिक पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह के लोग गाजियाबाद के चमन विहार इलाके में किराए पर रहकर दिल्ली के साप्ताहिक बाजारों और मेलों को निशाना बनाते थे. चोरी के लिए ये नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल करते थे. ये बच्चे भीड़ में आसानी से घुसकर लोगों की जेब या बैग से मोबाइल निकालकर उसे तुरंत गिरोह के बड़े सदस्यों को दे देते थे. इससे पकड़े जाने पर भी बच्चे के पास कुछ नहीं मिलता. वही बच्चों के पकड़े जाने के बाद गांव का प्रधान उनके नकली दस्तावेज तैयार करवाकर रखता जिससे उन्हें किसी परेशानी का सामने ना करना पड़े.
पुलिस ने आगे बताया कि इनके पास से मिले 46 चोरी के मोबाइल फोन में से 12 मोबाइल अलग-अलग एफआईआर से जुड़े पाए गए हैं, जबकि कई फोन सीईआईआर पोर्टल पर भी ब्लॉक या ट्रैक किए जा चुके थे.ये इन चोरी के मोबाइल को देश के अलग-अलग राज्यों के रास्ते बांग्लादेश तक सप्लाई करते थे.
कैसे पकड़ में आए ये नाबालिग चोर
पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 10 अप्रैल की शाम को मिली एक खुफिया सूचना के साथ हुई थी. जिसमें पुलिस को इनपुट मिला था कि एक गैंग आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास चोरी के मोबाइल फोन को ठिकाने लगाने आने वाला है. इसके बाद स्पेशल स्टाफ की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जाल बिछाया. जिसें 6 अरोपियों को गिरफ्तार किया.
पूछताछ में आरोपियों का खुलासा
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे चोरी के मोबाइल फोन पहले झारखंड के साहिबगंज इलाके में भेजते थे. वहां से उन्हें पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक इलाके में ले जाया जाता था. इसके बाद इन फोन को बांग्लादेश भेजा जाता था, जहां इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाता था या बेच दिया जाता था.
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है. फिलहाल पुलिस अब आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.
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