- योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी भारत में एक समय पावरफुल योग गुरु थे, जिनकी पीएम आवास में सीधे एंट्री थी
- इंदिरा गांधी ने योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी से योग सीखा था, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी थी
- पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल ने अपनी आत्मकथा में बताया कि ब्रह्मचारी ने सरकारी जमीन के लिए उन पर दबाव डाला था
योग दिवस के मौके पर योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी का जिक्र भी जरूर होता है. उन्होंने योग को भारत के घर-घर में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. धीरेंद्र ब्रह्मचारी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने उनसे योग सीखा था. 1970 से 80 के दशक में धीरेंद्र ब्रह्मचारी भारत के सबसे लोकप्रिय योग गुरु थे. उनका राजनीतिक रसूख भी बहुत माना जाता था. ऐसा इसलिए क्योंकि पीएम से सीधा संबंध होने के चलते देश के बड़े-बड़े नेता, उद्योगपति और बड़े लोग उनसे योग सीखना चाहते थे. उनसे मुलाकात के लिए पहुंचते थे. इंद्रकुमार गुजराल और धीरेंद्र ब्रह्मचारी का एक किस्सा भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा में रहा है.
इंद्रकुमार गुजराल और धीरेंद्र ब्रह्मचारी का किस्सा
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल ने अपनी बुक 'मैटर्स ऑफ डिसक्रीशन: एन ऑटोबायोग्राफी' में इस किस्से का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा 'जब मैं सरकार में निर्माण और आवास राज्य मंत्री था. उस दौरान योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने मुझ पर दिल्ली के गोल डाकखाने के पास एक सरकारी जमीन को उनके आश्रम के नाम पर ट्रांसफर करवाने का दवाब डाला था. लेकिन इतनी कीमती सरकारी जमीन को दान देने का मेरा कोई इरादा नहीं था. ऐसे में इंद्रकुमार गुजराल ने उनकी इस सिफारिश वाली फाइल को आगे ही नहीं बढ़ने दिया. ऐसे में योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी का सब्र जवाब देगया और उन्होंने एक शाम को मुझे फोन करके धमकाया. गुजराल लिखते हैं कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने फोन पर कहा कि अगर मेरा काम नहीं हुआ था वह मुझे डिमोट करवा देंगे.'
इंद्रकुमार गुजराल का हुआ डिमोशन
एक हफ्ते बाद ही जब इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल का फेरबदल हुआ तो उसमें इंद्रकुमार गुजराल का डिमोशन हो गया. उमाशंकर दीक्षित को उनके ऊपर बैठा दिया गया. वह सीनियर मंत्री थे और गुजराल राज्यमंत्री थे. गुजराल ने अपनी बुक में लिखा कि उन्होंने इसकी जानकारी इंदिरा गांधी को भी सुनाई थी.' इंद्रकुमार गुजराल और योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी से जुड़ा यह मामला गुजराल की बुक आने के बाद चर्चा में रहा था.
धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने योग का किया था विस्तार
धीरेंद्र ब्रह्मचारी भले ही कुछ विवादों में रहे लेकिन उन्होंने योग का भारत में तेजी से विस्तार किया था. उनकी वजह से ही योग स्कूलों की शिक्षा में शामिल हुआ था. जिससे बहुत सी सरकारी नौकरियां भी शुरु हुई थी. बिहार के मधुबनी जिले में 12 फरवरी 1924 को जन्में धीरेंद्र ब्रह्मचारी महज 13 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़कर चले गए थे. उन्होंने लखनऊ के पास गोपालखेड़ा में महर्षि कार्तिकेय से योग की शिक्षा ली थी. इसके बाद उनका पूरा जीवन योग के लिए ही समर्पित रहा था.
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