- महिला आरक्षण लागू करने से दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि उन्हें लाभ मिलेगा
- महिला आरक्षण के लिए लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में पचास प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है
- दक्षिण भारत के कुछ नेता केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को राजनीतिक साजिश बताते हुए विरोध जता रहे हैं
महिला आरक्षण को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में उठ रही आशंकाओं के बीच सरकार के आला सूत्रों ने एकदम साफ किया है कि यह कदम उत्तर‑दक्षिण के बीच संतुलन बिगाड़ने वाला नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के लिए भी लाभकारी साबित होगा. सूत्रों का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए प्रस्तावित परिसीमन और लोकसभा‑विधानसभाओं की सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी से उन राज्यों को नुकसान नहीं होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है.
महिला आरक्षण से दक्षिण को नुकसान नहीं
सरकार के आला सूत्रों ने दावा किया है कि महिला आरक्षण लागू करने से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा. उनका कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों की ये आशंकाएं निर्मूल हैं कि उन्हें परिसीमन के कारण उत्तर भारतीय राज्यों की तुलना में घाटा उठाना पड़ेगा. गौरतलब है कि आज सांसदों को दिए गए महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिलों में यह प्रावधान किया गया है कि लोक सभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में पचास प्रतिशत की बढोत्तरी की जाएगी.
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दक्षिणी राज्यों का विरोध, स्टालिन‑रेवंत रेड्डी मुखर
दक्षिण भारतीय राज्य इसका खुल कर विरोध कर रहे हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन सबसे मुखर हैं. उनका कहना है कि वे महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के प्रबल समर्थक हैं परंतु जिस तरह केंद्र सरकार इसे परिसीमन से जोड़ रही है यह एक राजनीतिक साजिश है ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम किया जा सके और उत्तर भारतीय राज्यों को फायदा पहुंचाया जा सके. उन्होंने बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है. उधर, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी इसे अन्याय बताया है.
2011 आधार पर परिसीमन से मिलेगा आनुपातिक लाभ
आज सरकार के आला सूत्रों ने स्पष्ट किया कि 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि लाभ होगा. उनकी दलील है कि 1971 की जनसंख्या के आधार पर देखें तो दक्षिण भारतीय राज्यों की जनसंख्या उत्तर भारतीय राज्यों के अनुपात में अधिक नहीं बढ़ी है. इसके बावजूद यह प्रावधान किया जा रहा है कि उनकी लोक सभा सीटों में पचास प्रतिशत की बढोतरी होगी. इसका अर्थ यह है कि आनुपातिक आधार पर वे लाभ में रहेंगे क्योंकि कम जनसंख्या होने के बावजूद उन्हें अधिक सीटों पर प्रतिनिधित्व मिलेगा.
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किरेन रिजिजू ने आशंकाएं खारिज कीं
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दक्षिण भारतीय राज्यों की आशंकाओं को खारिज किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह गलतफहमी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि दक्षिण भारतीय राज्यों को उनकी सफल परिवार नियोजन नीति के कारण नुकसान उठाना पड़ेगा. रिजिजू के मुताबिक दक्षिण भारतीय राज्य सौभाग्यशाली हैं क्योंकि कम जनसंख्या होने के बावजूद उन्हें आनुपातिक आधार पर अधिक सीटें मिलने जा रही हैं. रिजिजू के अनुसार परिसीमन में सभी राज्यों के साथ न्याय किया जाएगा.
सीटें 50% बढ़ेंगी, लोकसभा 850 तक संभव
इस बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोक सभा और विधानसभाओं की सीटों में पचास प्रतिशत बढोत्तरी की जाएगी. इस हिसाब से लोक सभा में अधिकतम 850 सीटें की जा सकती हैं. इनमें राज्यों की अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की अधिकतम 35 सीटों का प्रावधान किया जा रहा है.
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