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21वीं सदी का सबसे बड़ा फैसला, संसद रचने जा रही है इतिहास...महिला आरक्षण पर सम्मेलन में पीएम मोदी

दिल्ली के विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने से पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं का सफर आसान होगा. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण पर संसद ऐतिहासिक निर्णय के करीब है और विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

21वीं सदी का सबसे बड़ा फैसला, संसद रचने जा रही है इतिहास...महिला आरक्षण पर सम्मेलन में पीएम मोदी
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
  • पीएम मोदी का नारी शक्ति वंदन अधिनियम के 2029 तक लागू होने की मांग करते हुए महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर जोर
  • पीएम मोदी ने आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण बिल पारित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिए जाने की संभावना जताई
  • पीएम मोदी ने महिलाओं से सांसदों से मिलकर अपनी अपेक्षाएं रखने और सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तब सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर इसे सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय एक सुर में यह भी मांग उठी थी कि इस कानून को हर हाल में 2029 तक लागू किया जाए. पीएम मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने से पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक महिलाओं के लिए आगे बढ़ने का रास्ता आसान होने जा रहा है. विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक निर्णय के करीब संसद

महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद सत्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक फैसला लेने जा रहा है, जो नारी शक्ति को समर्पित होगा. उन्होंने कहा कि संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है, जो अतीत के संकल्पों को पूरा करेगा.

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सांसदों से मिलें, अपनी अपेक्षाएं रखें: पीएम मोदी की अपील

सम्मेलन में भाग लेने पहुंचीं महिलाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा से पहले मैं नारी शक्ति से अपील करता हूं कि वह अपनी शक्ति बनाए रखें. अपने‑अपने इलाक़े में सांसदों से मिलें, उनके सामने अपना पक्ष रखें और अपनी अपेक्षाएं उन्हें बताएं. जिस दिन वे संसद में आने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र से निकलें, फूल‑माला देकर उनकी विदाई कीजिए.”

विपक्ष से संवाद और सहयोग की उम्मीद

विपक्षी दलों से समर्थन की उम्मीद जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि यह कार्य संवाद, सहयोग और सहभागिता के माध्यम से पूरा हो। उन्होंने कहा कि इससे न केवल महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा, बल्कि संसद की गरिमा में भी वृद्धि होगी.

स्वतंत्रता संग्राम से आज तक नारी शक्ति का योगदान

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान सभा तक महिलाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत की नींव रखने में नारी शक्ति की बेहद अहम भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि आज देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक महिलाएं महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर आसीन हैं और उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

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महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए उनका आर्थिक रूप से सशक्त होना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, “पहले परिवार की संपत्ति पुरुषों के नाम होती थी. घर, खेत, दुकान हर जगह पुरुषों का नाम होता था. हमने प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं के नाम पर घरों का पंजीकरण शुरू किया. पहले स्कूलों में सिर्फ पिता का नाम होता था, अब पिता के साथ मां का नाम भी जोड़ा गया है.” पीएम मोदी ने कहा कि अब तक 3 करोड़ से अधिक महिलाएं घर की मालिक बन चुकी हैं. उन्होंने घरेलू और सामाजिक सोच का जिक्र करते हुए कहा कि अक्सर फैसलों से महिलाओं को अलग रखा जाता है. इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन पता बहुत है.”

महिला सशक्तिकरण से जुड़े सरकारी प्रयासों का ब्यौरा

प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए सरकारी कदमों के नतीजों को विस्तार से साझा किया.

  1. पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में 14 लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं.
  2. 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
  3. 2014 के बाद जन‑धन योजना के तहत 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खोले गए.
  4. मुद्रा योजना के तहत 60 प्रतिशत से अधिक ऋण महिलाओं द्वारा लिए गए.
  5. पंजीकृत स्टार्टअप में 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक के रूप में काम कर रही हैं.
  6. पिछले 11 वर्षों में लगभग 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं.
  7. ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी 6 करोड़ बहनों को ‘लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से 3 करोड़ से अधिक यह दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं.
  8. 2014 की तुलना में लड़कियों के पीएचडी नामांकन में दोगुनी वृद्धि हुई है, जबकि गणित और विज्ञान शिक्षा में उनकी भागीदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

गुजरात के मुख्यमंत्री काल का अनुभव साझा किया

पॉलिसी‑मेकिंग और प्रशासन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल का एक अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि 2001 या 2002‑03 के दौरान खेड़ा‑आणंद जिले की ग्राम पंचायत की 13 महिलाएं उनसे मिलने आई थीं. पीएम मोदी ने कहा कि उनमें से ग्राम प्रधान आठवीं कक्षा तक पढ़ी थीं और कुछ महिलाएं घूंघट में भी थीं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उनसे पूछा कि वे क्या करना चाहती हैं, तो उनका जवाब था— “साहब, हमारी इच्छा है कि हमारे गांव में कोई गरीब न रहे.” पीएम मोदी ने कहा कि यह जवाब बड़े‑बड़े अर्थशास्त्रियों के लिए भी एक बड़ा संदेश है. उन्होंने कहा, “जमीन से जुड़े अनुभव से जो वाणी निकलती है, वह वेद वाक्य बन जाती है.”

लेखक के बारे में
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हिमांशु शेखर मिश्रा
Senior Editor, Political & Current Affairs
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