Arunachal Deputy Chief Minister To NDTV: चीन ने तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े पनबिजली बांध के निर्माण को मंजूरी दे दी है.तिब्बती पठार पर ये बांध भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ही भारत और बांग्लादेश की इकोलॉजी पर गहरा असर डाल सकता है. यह बाढ़ या पानी की कमी का कारण बन सकता है और चीन को जंग की स्थिति में लाभ की स्थिति में पहुंचा सकता है. यारलुंग त्सांगबो नदी बाएं मुड़कर अरुणाचल प्रदेश से होकर बहती है और इसे राज्य में सियांग कहा जाता है, फिर असम में ब्रह्मपुत्र और बंगाल की खाड़ी में बहने से पहले बांग्लादेश में इसे जमुना कहा जाता है. यारलुंग नदी अरुणाचल प्रदेश के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है और सियांग बन जाती है.
क्या कहा उपमुख्यमंत्री ने?
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने एनडीटीवी को बताया कि अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 'सियांग बांध' चीनी बांध का "काउंटर" करेगा. ऊपरी सियांग जलविद्युत परियोजना अरुणाचल के ऊपरी सियांग जिले में सियांग नदी पर एक प्रस्तावित बांध है और यह 11,000 मेगावाट तक बिजली उत्पादन कर सकती है. आगे कहा, "सियांग बांध यारलुंग त्सांगबो पर चीनी बांध का मुकाबला करेगा. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है और यह स्थानीय लोगों को समझना चाहिए. हम लोगों को चीन की बांध परियोजना से अवगत करा रहे हैं. पिछले पांच साल से हम सियांग बांध के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं. कई लोग समझ भी गए हैं, लेकिन कुछ लोग स्थिति की गंभीरता को समझने में सक्षम नहीं हैं और यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रस्तावित चीनी बांध सियांग नदी और निचले इलाकों को किस हद तक प्रभावित करेगा."
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उपमुख्यमंत्री ने कहा, "लोगों को हमें प्री-विजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने की अनुमति देनी चाहिए और अगर दो साल में सियांग में बांध बनाना संभव हुआ, तो हम एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाएंगे और अगर यह लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है, तो हम सियांग नदी में बांध नहीं बनाएंगे, लेकिन अगर ऐसा है, तो हम बांध का निर्माण करेंगे."
क्या हैं समस्याएं
सियांग बांध के काम को अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. देश भर में 350 से अधिक व्यक्तियों, नागरिक समाज और पर्यावरण समूहों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अरुणाचल प्रदेश में तैनात अर्धसैनिक बलों को वापस लेने का आग्रह किया है. आरोप है कि ये तैनाती इस मेगा जलविद्युत परियोजना के लिए कथित तौर पर "जबरन" सर्वेक्षण करने के लिए की गई है. सियांग स्वदेशी किसान मंच (एसआईएफएफ) में, सियांग नदी बेल्ट में सैकड़ों ग्रामीण विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि प्रस्तावित 12,500 मेगावाट सियांग ऊपरी बहुउद्देश्यीय परियोजना (एसयूएमपी) के लिए पहले व्यवहार्यता अध्ययन किया जाना चाहिए.
मंत्री ने स्थानीय लोगों से आग्रह किया कि वे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) को पूर्व-दृश्यता रिपोर्ट के लिए मशीनरी को साइट पर ले जाने की अनुमति दें.चीनी बांध चीन में थ्री गॉर्जेस बांध के बराबर बिजली का उत्पादन करेगा. ये दुनिया का सबसे बड़ा पनबिजली स्टेशन होगा और इसका हिमालयी बेल्ट में भूगर्भीय प्रभाव होगा. प्रस्तावित चीनी बांध 60,000 मेगावाट जल विद्युत का उत्पादन कर सकता है. थ्री गॉर्जेस ने एक जलाशय बनाया और 1.4 मिलियन निवासियों को ऊपर की ओर विस्थापित होना पड़ा है.
सियांग बांध क्यों जरूरी है?
इस बारे में बताते हुए मीन ने कहा, 'अगर प्री-विजिबिलिटी हो गई तो हमें पता चल जाएगा कि बांध की ऊंचाई कितनी होनी चाहिए और कितने क्षेत्र जलमग्न होंगे और फिर हम जन सुनवाई के लिए जाएंगे. अगर चीन पानी छोड़ता है तो पूरी सियांग नदी, ब्रह्मपुत्र घाटी और गुवाहाटी का सारिघाट पुल जलमग्न हो जाएगा. उनका मुकाबला करने के लिए, हमारी सरकार ने सियांग बांध बनाने का फैसला किया. अगर चीन पानी छोड़ना बंद कर दे तो नदी सूख जाएगी.उन्होंने कहा, 'बांध न केवल बिजली उत्पादन के लिए है, बल्कि यह चीन की तरफ से पानी रोकने में भी हमारी मदद करेगा और धीरे-धीरे हम अपने बांध से पानी छोड़ सकते हैं. चीनी बांध पर इसी तरह की चिंताओं को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी उठाया है. उन्होंने कहा, "अगर चीन यह बांध बनाता है, तो ब्रह्मपुत्र पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से नाजुक हो जाएगा, यह सूख जाएगा और केवल भूटान और अरुणाचल प्रदेश के वर्षा जल पर निर्भर करेगा.
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