जब देश की सभी राजनीतिक पार्टियां अपने साथ युवाओं को जोड़ने पर जो दे रही है, उसी समय बहुजन समाज पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को एक बार फिर उनके पद से हटा दिया है. पार्टी प्रमुख मायावती ने फिर उन्हें अपरिपक्व बताया है. उन्होंने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की एक बैठक में कहा कि आकाश आनंद को अभी और परिपक्व होने की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि वो पार्टी में काम करते रहेंगे. लेकिन उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. इस बैठक में आकाश आनंद तो नहीं आए लेकिन उनके छोटे भाई ईशान आनंद बैठक में मौजूद रहे. वो उसी कुर्सी पर बैठे, जिसपर आमतौर पर आकाश बैठते थे. बसपा प्रमुख ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव कुछ महीने बाद ही होने वाले हैं.
अब क्या करेंगे आकाश आनंद
बसपा ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने की आधिकारिक पुष्टी तो नहीं की है. लेकिन बसपा नेताओं का कहना है कि आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया गया है और अब वो एक कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे. बैठक के बाद जारी बयान में मायावती ने कहा कि जिस तरह कांशीराम जी ने अपने परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने या सरकार बनने पर कोई पद देने के पक्ष में नहीं थे, उसी तरह वह भी इस विचार पर कायम हैं. मायावती ने कहा कि इसी सोच के तहत उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति दी थी. लेकिन आकाश को अभी इस मामले में और समझदार और परिपक्व होने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब तक आकाश पूरी तरह परिपक्व नहीं होते, तब तक उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा. मायावती के मुताबिक, ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि विरोधी दलों की रणनीति के कारण चुनाव में पार्टी को नुकसान न हो.

बसपा प्रमुख मायावती ने पहली बार 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद आकाश आनंद को पार्टी राष्ट्रीय संयोजक बनाया था.
Photo Credit: Akash Anand X
पहले भी राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए गए थे
बसपा के इस कदम से लोगों को हैरानी नहीं हुई, क्योंकि इससे पहले भी दो बार उन्हें इस तरह से पद से हटाया जा चुका है. इस बार भी उन्हें तब हटाया गया जब वो उत्तर प्रदेश में चुनाव तैयारियों के लिए बैठकें कर रहे थे. हाथरस और नोएडा के जेवर में उनकी दो बैठकें हो चुकी हैं. इससे पहले 2024 में उन्हें उस समय हटाया गया था, जब वह लोकसभा चुनाव में बीजेपी पर आक्रामक हमले कर रहे थे. पत्रकार सुनील उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बहुत बारीक नजर रखते हैं. वो कहते हैं कि आकाश आनंद जब-जब भाषण देते हैं, बहन जी उन्हें हटा देती हैं. वो बताते हैं कि इस बार भी कार्रवाई तब की गई जब वो हाथरस और नोएडा के जेवर में उन्होंने भाषण दिया था.वो कहते हैं कि प्रदेश में बसपा की बैठकें तो हो रही हैं, लेकिन जब नेता इन बैठकों में जाता है तो उसकी बात अलग होती है. लेकिन इस बार जैसे ही आकाश आनंद इन बैठकों में जाने लगे, बहन जी ने उन्हें हटा दिया.
सुनील कहते हैं कि इस तरह के फैसलों का असर पार्टी पर पड़ता ही है, लेकिन यह भी सत्य है कि यह बहन जी का फैसला है, वो जिसे चाहें रखें और जिसे चाहें निकालें. सुनील कहते हैं कि राजनीतिक विश्लेषकों को आश्चर्य इस बात पर होता है कि आकाश आनंद जब-जब बीजेपी पर हमलावर होते हैं, उन्हें उनके पद से हटा दिया जाता है.
क्या इससे बसपा का जनाधार बचेगा
समीरात्मज मिश्र बीबीसी के पूर्व पत्रकार हैं. आकाश आनंद को बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के प्रभाव के सवाल पर वो कहते हैं कि बसपा का जनाधार लगभग खत्म हो चुका है और पार्टी लगभग समाप्तप्राय है. लेकिन जहां तक रही आकाश आनंद को पार्टी में बड़े पदों पर लाना और हटाने की तो, यह दिखाता है कि पार्टी तो छोड़िए परिवार में भी कुछ ठीक नहीं है. इसका आभास उस समय भी मिला था, जब आकाश आनंद के पिता और उनके ससुर को भी इसी तरह से पार्टी से निकाला गया था.

मिश्र कहते हैं कि बसपा का जनाधार तब बढ़ा, जब उसने सोशल इंजीनियरिंग की. इसके बाद बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. लेकिन इसके बाद ही बड़े नेता पार्टी से निकलने लगे और करीब-करीब सभी नेताओं ने एक ही तरह के आरोप लगाए. नेताओं के निकलने, मतदाताओं के पार्टी से दूर होने और जनाधार खिसकने का असर यह हुआ कि पार्टी संसद और विधानसभा में करीब-करीब शून्य की स्थिति में पहुंच गई है. वो कहते हैं कि बसपा की राजनीति में अब कोई बहुत उपयोगिता रह नहीं गई है. इसलिए आकाश आनंद को हटाने का कोई बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा, ऐसा लगता नहीं है.
आकाश आनंद को डिमोट करने के फैसले के असर के सवाल पर सुनील कहते हैं कि बसपा के इस फैसले का असर नौ अक्तूबर पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम की सफलता और असफलता से तय होगा. वो कहते हैं कि बसपा ने नौ अक्तूबर को लखनऊ में करीब 15 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है. इसमें वह कितना सफल होती है, इसके बाद बसपा अपनी चुनाव तैयारियों में पूरी तरह से जुट जाएगी. सुनील कहते हैं कि इस कार्यक्रम की सफलता-असफलता ही बहन जी के अगले फैसलों को तय करेंगे.
कौन हैं आकाश आनंद
आकाश आनंद मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं. वो पहली बार 22 साल की उम्र में 2017 में सहारनपुर की एक रैली में अपनी बुआ मायावती के साथ नजर आए थे. उन्होंने 2019 में आगरा में बसपा, सपा औ रालोद की संयुक्त रैली को संबोधित किया था. यह उनकी पहली रैली थी. आकाश आनंद को 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था. साल 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती ने उन्हें अपरिपक्व बताते हुए राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था.चुनाव के बाद एक बार उनकरी पार्टी में वापसी हुई. लेकिन एक बार फिर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है.

आकाश आनंद को 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया गया था.
कौन हैं ईशान आनंद
दिल्ली और नोएडा के स्कूलों में शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद ईशान आनंद ने लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है. सूत्रों के मुताबिक ईशान परिवार की ओर से संचालित होटलों के प्रबंधन का काम भी देखते हैं. लखनऊ में बसपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में ईशान की मौजूदगी को मायावती की ओर से एक और नेतृत्व तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ईशान पहली बार सार्वजनिक रूप से जनवरी 2025 में लखनऊ स्थित बसपा कार्यालय में मायावती के जन्मदिन पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आए थे. इसके अगले दिन वह उसी जगह बसपा की उत्तर प्रदेश इकाई की बंद कमरे में हुई बैठक में भी शामिल हुए थे. इसके बाद से उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों में ज्यादा नहीं देखा गया.
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