- मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से किनारा कर उनकी भतीजी दीपिका आनंद को उत्तराधिकारी घोषित किया है
- आकाश आनंद को कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने अपने दल में शामिल होने का न्यौता दिया है
- राजनीतिक दल आकाश आनंद को युवा नेता और दलित वोट बैंक को आकर्षित करने वाला मान रहे हैं
बहुजन समाज पार्टी में किनारे किए गए आकाश आनंद को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीति अभी भी गरमाई हुई है. मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को तो राजनीति में जमीन पर ला दिया, साथ में यह भी साफ कर दिया कि बीएसपी में अब उनका कोई भविष्य नहीं है. वैसे मायावती ने यह पहली बार नहीं किया है. मगर ऐसा लग रहा था कि वो शायद अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को आगे करें. मगर उन्होंने यह घोषणा कर दी है कि अब उनकी भतीजी दीपिका आनंद उनकी उत्तराधिकारी होंगी.सबसे दिलचस्प बात है ये तीनों सगे भाई-बहन हैं.
मगर आपको यदि लग रहा है कि आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य खत्म हो गया है तो शायद आप गलत हैं. आकाश आनंद को लेकर लोगों और राजनीतिक दलों में काफी उत्सुकता बनी हुई है. कम से कम राजनीतिक दलों ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का न्यौता दिया है. सबसे ताजा बयान रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की तरफ से आया है. आरपीआई के नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मुरादाबाद में कहा है कि आकाश आनंद को उनकी पार्टी में आकर बाबा साहब अंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए. दूसरी तरफ आजाद समाज पार्टी के नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने तो आकाश आनंद को अपना छोटा भाई बताया.
चंद्रशेखर का कहना है कि आकाश का अब बसपा में कोई भविष्य नहीं है. भले ही आकाश मेरी आलोचना करते हैं, लेकिन फिर भी मैं उनको अपना छोटा भाई ही मानता हूं. यदि आकाश मेरे साथ आते हैं तो हम मिलकर बाबा साहब और हमारे अन्य महापुरुषों के सपनों को पूरा कर पाएंगे. वहीं कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी आकाश आनंद को खुला ऑफर दे रखा है. गौतम ने एनडीटीवी को कहा कि मैं आकाश आनंद को कांग्रेस में आने का न्यौता देता हूं. आकाश के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हुए हैं. गौतम ने आगे कहा कि वो इंडिया गठबंधन में बीएसपी का स्वागत करते हैं. यही नहीं जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वो बीएसपी को भाजपा की बी टीम मानते हैं तो गौतम ने कहा कि नहीं.
अब तक तीन पार्टियों से आकाश आनंद को मिला ऑफर
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार कम से कम तीन पार्टियां आकाश आनंद को अपने यहां आने का ऑफर क्यों दे रहे हैं. दरअसल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए कमजोर बसपा के वोट बैंक पर सबकी निगाहें हैं. अकसर देखा गया है और आंकड़े भी बताते हैं कि जब जब बसपा कमजोर हुई है तो भाजपा को फायदा हुआ है. मगर 2024 की लोकसभा ने दलितों के वोटिंग पैटर्न में बदलाव देखा गया. जो दलित सपा से दूरी बनाए रखती थी, उसने भी उसे वोट किया खासकर गैर जाटव जातियों में. 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश की 17 रिजर्व सीटों में से भाजपा के पास 8 और सपा के पास 7 सीटें हैं, जबकि 2019 में भाजपा के पास 17 में से 14 सीटें थीं.
आकाश आनंद को लेने में क्यों फायदा देख रहे राजनीतिक दल
यही वजह है कि दलितों की राजनीति करने वाली पार्टियों ने आकाश आनंद के लिए अपने दरवाजे खोल रखे हैं. दूसरा आकाश आनंद महज 30 साल के हैं. विदेश से पढ़ाई करके आए हैं और आजकल जेन जी का जमाना है. उसको लुभाने के लिए आकाश आनंद से अच्छा कौन हो सकता है.आकाश 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान यह साबित कर चुके हैं कि वो कोई नौसिखिये नहीं हैं और उन्हें राजनीति की समझ है. इसके साथ ही जानकार यह भी मानते हैं कि मायावती ने जिस ढंग से आकाश आनंद के साथ का व्यवहार किया है. उसके बाद उनके प्रति दलित समुदाय में एक सहानुभूति है. यही सब वह कारण है, जिसके लिए राजनीतिक दलों को आकाश आनंद में फायदा ही फायदा दिख रहा है.
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