- जेडीयू के नीरज और जन सुराज के अनुज सिंह के बीच मुकाबला है, जिसे अनंत सिंह का समर्थन भी प्रभावित कर रहा है
- अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करते हुए डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया है
- अनंत सिंह के खिलाफ 28 आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि नीरज कुमार के खिलाफ भी एक आपराधिक मामला लंबित है
Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में कई बार चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं होते. उनके पीछे पुराने रिश्ते, राजनीतिक असहमति और क्षेत्रीय प्रभाव की अपनी कहानी होती है. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मौजूदा चुनाव भी कुछ ऐसा ही है. एक तरफ जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को फिर मैदान में उतारा है. दूसरी तरफ जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन इस चुनाव को दिलचस्प बना रहा है तीसरा नाम- मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह. अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान किया है.
जन सुराज ने 24 सितंबर को अनुज सिंह को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया. इससे अब यह केवल जेडीयू के दो नेताओं की आपसी खींचतान नहीं रह गई है. एक तरफ जेडीयू का आधिकारिक उम्मीदवार है और दूसरी तरफ जन सुराज का उम्मीदवार, जिसके समर्थन में जदयू के समर्थन में एक विधायक खुलकर खड़ा है.
डॉ. अनुज सिंह कौन हैं और अनंत सिंह उनके साथ क्यों खड़े हैं?
दरअसल डॉ. अनुज सिंह की राजनीतिक पहचान अनंत सिंह या नीरज कुमार जितनी पुरानी नहीं है. वे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने नवादा विधानसभा सीट से जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. चुनावी हलफनामे के मुताबिक वे रिसोर्स जियोग्राफी में पीएचडी हैं और शैक्षणिक संस्थान के प्रबंधन से जुड़े हैं. उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से 2011 में पीएचडी की थी. 2025 के नवादा चुनाव में अनुज सिंह को 19,349 वोट मिले थे. वे तीसरे स्थान पर रहे. उनके हलफनामे में करीब 4.79 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की गई थी. यानी विधानसभा चुनाव में वे अभी कोई बड़ी चुनावी ताकत साबित नहीं कर पाए थे. लेकिन एक साल के भीतर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में उनकी राजनीतिक स्थिति बदल गई है. इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण वजह है- अनंत सिंह का समर्थन.
अनुज सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला भी है
डॉ. अनुज सिंह के 2025 के विधानसभा चुनावी हलफनामे में एक लंबित आपराधिक मामला घोषित है. मामला नवादा महिला थाना कांड संख्या 04/2012 से संबंधित है. इसमें IPC की धारा 341 और 354 दर्ज है. हलफनामे में मामला न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, नवादा की अदालत में लंबित बताया गया और आरोप तय नहीं होने की जानकारी दी गई थी. उसी हलफनामे में कोई दोषसिद्ध मामला दर्ज नहीं है.
अनंत सिंह: मोकामा की राजनीति का अलग चेहरा
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर मोकामा से जुड़ा है. वे लंबे समय तक इस क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं. छह बार इस क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं. 2022 में सजा मिलने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी भी जीती थीं. फिर 2024 में बरी होने के बाद 2025 में छठी बार जीते. जेडीयू से उनका पुराना रिश्ता रहा है. लेकिन 2015 का विधानसभा चुनाव दोनों के राजनीतिक संबंधों में निर्णायक मोड़ लेकर आया. 2015 के चुनाव में जेडीयू ने मोकामा से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया. अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और नीरज कुमार को हरा दिया. उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक अनंत सिंह को 54,005 और नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले थे. जीत का अंतर 18,348 वोट था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी लगातार बनी रही. अनंत सिंह ने बाद में राजद के टिकट पर 2020 में मोकामा से चुनाव जीता. 2025 में वे फिर जेडीयू में लौटे और मोकामा से विधानसभा चुनाव जीता. फिलहाल वे जेडीयू विधायक हैं.
अनंत सिंह के खिलाफ कितने आपराधिक मामले?
विधानसभा चुनाव 2025 में दाखिल अनंत सिंह के चुनावी हलफनामे में 28 आपराधिक मामले घोषित हैं. इनमें IPC की धारा 302 के तहत हत्या के चार आरोप और धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के छह आरोप समेत कई अन्य गंभीर धाराएं दर्ज हैं. हालांकि हलफनामे के अनुसार दोषसिद्ध मामलों की संख्या शून्य है.
नीरज कुमार: मोकामा से पटना स्नातक तक
नीरज कुमार की राजनीति का रास्ता अलग रहा है. वे जेडीयू के संगठन और पार्टी के सार्वजनिक राजनीतिक पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में हैं. वे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हैं और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार विधान परिषद के सदस्य चुने जा चुके हैं. 2026 में जेडीयू ने उन्हें इसी सीट से चौथी बार उम्मीदवार बनाया है. पार्टी ने 23 सितंबर को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की. यानी जिस सीट पर नीरज कुमार का करीब दो दशक से जेडीयू के साथ मजबूत चुनावी संबंध रहा है, उसी सीट पर इस बार पार्टी के भीतर से ही एक विधायक उनका विरोध कर रहा है.
नीरज कुमार के खिलाफ आपराधिक मामला
नीरज कुमार के पुराने विधान परिषद चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामला घोषित है. बाढ़ थाना कांड संख्या 44/19 में हत्या के प्रयास समेत IPC की छह धाराओं का उल्लेख है. हालांकि इसी हलफनामे में उनके खिलाफ किसी मामले में दोषसिद्धि दर्ज नहीं है.
अनंत और नीरज के बीच विवाद की वजह 2019 का AK-47 मामला
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मौजूदा विवाद की वजह 2019 का AK-47 मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 2019 में पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक आवास पर छापेमारी के दौरान AK-47 राइफल, मैगजीन, कारतूस और ग्रेनेड बरामद होने का दावा किया था. इस मामले में अनंत सिंह को निचली अदालत से सजा हुई थी. लेकिन अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया. लेकिन मौजूदा राजनीतिक विवाद इसलिए फिर उठा है क्योंकि अनंत सिंह ने सितंबर 2026 में आरोप लगाया कि उन्हें AK-47 मामले में फंसाने में नीरज कुमार की भूमिका थी. हालांकि यह अनंत सिंह का आरोप है. नीरज कुमार ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उन्हें अदालत जाना चाहिए.
पुराना विवाद फिर क्यों सामने आया?
पुराना विवाद को फिर से सामने आने की वजह है, पटना स्नातक विधान परिषद सीट. जेडीयू के सामने सवाल था कि इस सीट पर अपने तीन बार के विजेता उम्मीदवार नीरज कुमार को फिर उतारा जाए या नहीं. पार्टी ने आखिरकार नीरज कुमार को ही उम्मीदवार बनाया. दूसरी तरफ, इससे पहले अनंत सिंह सार्वजनिक रूप से कह चुके थे कि वे नीरज कुमार के साथ नहीं हैं. उन्होंने डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने की घोषणा कर दी.
जेडीयू नेतृत्व ने विवाद को शांत करने की कोशिश भी की. सितंबर की शुरुआत में पार्टी कार्यालय में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बैठक हुई. करीब 35 मिनट की इस बैठक के बाद मतभेद खत्म होने के संकेत दिए गए, लेकिन कुछ दिनों बाद अनंत सिंह फिर खुलकर नीरज के विरोध में आ गए. अनंत सिंह का रुख पूरी तरह सार्वजनिक हो गया. उन्होंने कहा कि वे नीरज कुमार को हराने के लिए काम करेंगे और अनुज सिंह का समर्थन करेंगे.
जन सुराज की एंट्री ने बदल दिया समीकरण
शुरुआत में डॉ. अनुज सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में थी. अनंत सिंह उनके समर्थन में आ चुके थे. फिर 24 सितंबर को जन सुराज ने अनुज सिंह को पटना स्नातक सीट से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना दिया, इस फैसले ने विवाद को एक नया राजनीतिक रूप दे दिया. देखें तो, नीरज कुमार के साथ जदयू है, जबकि अनुज सिंह के साथ जन सुराज और जदयू विधायक अनंत सिंह .
विवाद की मूल वजह क्या है?
देखें तो, विवाद की कोई एक वजह नही है. पहला- 2015 की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता। अनंत सिंह और नीरज कुमार पहली बार सीधे चुनावी मुकाबले में मोकामा में आमने-सामने आए. उस चुनाव ने दोनों के बीच राजनीतिक दूरी को सार्वजनिक कर दिया. दूसरी वजह AK-47 मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप है. 2019 की घटना ने दोनों नेताओं के बीच विवाद को एक अलग स्तर दिया. अनंत सिंह ने बाद में नीरज कुमार पर आरोप लगाए. नीरज ने आरोपों को खारिज किया. 2024 में हाईकोर्ट से अनंत सिंह के बरी होने के बाद भी यह राजनीतिक आरोप खत्म नहीं हुआ. 2026 के MLC चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने इसे फिर उठाया है.
तीसरी वजह है पटना स्नातक सीट
मौजूदा विवाद का तात्कालिक कारण यही चुनाव है. नीरज कुमार इस सीट से चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं. अनंत सिंह उनके खिलाफ हैं. अनंत सिंह पुरानी रंजिश के कारण नीरज सिंह को हारते देखना चाहते हैं. इसलिए पार्टी से इतर अनुज सिंह को उन्होंने अपना समर्थन दिया है. अनंत सिंह का कहना है कि उन्होंने नीरज कुमार को शुरुआती दिनों में मदद की थी. लेकिन जब मौका मिला तो उन्हें ही बर्बाद करने का प्रयास किया. अनंत सिंह के मुताबिक नीरज कुमार उनके खिलाफ चार दफा नुकसान पहुंचाया. दूसरी तरफ नीरज कुमार कहते हैं कि बिहार में बाहुबली का नहीं चलता है. खुद को बाहुबली मानते हैं तो नाम के आगे क्यों नहीं लगाते बाहुबली.
क्या अनंत सिंह का विरोध जेडीयू के खिलाफ है?
अनंत सिंह ने खुद अपने बयानों में यह अंतर रखा है कि उनका विरोध जेडीयू से नहीं बल्कि नीरज कुमार से है. उन्होंने कहा कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और उनका विरोध व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेद को लेकर है. बहरहाल, जेडीयू का आधिकारिक फैसला नीरज कुमार के साथ है, जबकि जेडीयू विधायक अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ खड़े हैं. यही विरोधाभास इस चुनाव को दिलचस्प बना रहा है.
असली परीक्षा किसकी?
इस चुनाव में सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि नीरज कुमार और अनुज सिंह में कौन उम्मीदवार है. राजनीतिक तौर पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अनंत सिंह का व्यक्तिगत प्रभाव किस हद तक उनके समर्थकों को उस उम्मीदवार के पक्ष में ले जा पाता है, जिसे उन्होंने चुना है. दूसरी तरफ नीरज कुमार के पास जेडीयू का आधिकारिक समर्थन और लंबे समय का चुनावी अनुभव है. जन सुराज के लिए यह मौका संगठन और नए राजनीतिक चेहरे के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का है. बहरहाल, एक बात जरूर साफ है- मोकामा की 2015 की राजनीतिक कहानी 2026 में पटना स्नातक सीट पर फिर लौट आई है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार अनंत सिंह और नीरज कुमार खुद एक ही बैलेट पर आमने-सामने नहीं हैं. उनके बीच खड़े हैं डॉ. अनुज सिंह. यही वजह है कि पटना स्नातक का यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक साधारण विधान परिषद चुनाव से ज्यादा चर्चा में ला दिया है.
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