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राजीव रंगीला कौन है... जिसने 700 करोड़ का घोटाला कर खुद ही किया सरेंडर, नौकर और चायवालों के नाम बनाई कंपनियां

700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच ने मुख्य आरोपी राजीव रंगीला को गिरफ्तार किया है. लंबे समय से फरार रंगीला अमेरिका से लौटने के बाद सरेंडर करने पहुंचा था. कोर्ट ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है.

राजीव रंगीला कौन है... जिसने 700 करोड़ का घोटाला कर खुद ही किया सरेंडर, नौकर और चायवालों के नाम बनाई कंपनियां
राजीव रंगीला, मेडिकल उपकरण घोटाले का मास्टरमाइंड
अल्टर्ड बाय NDTV
  • मेडिकल उपकरण घोटाले में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
  • अमेरिका भागा, फिर लौटकर किया सरेंडर; अब ACB की गिरफ्त में राजीव रंगीला
  • चायवालों और नौकरों के नाम पर बनाई गईं कंपनियां? जांच में सनसनीखेज दावे
नई दिल्ली:

700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे राजीव रंगीला की गिरफ्तारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है. एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) के अनुसार, राजीव रंगीला इस पूरे कथित घोटाले का प्रमुख लाभार्थी और साजिशकर्ताओं में से एक है. जांच एजेंसी का दावा है कि वह जून से फरार था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अमेरिका चला गया था. उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर, गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्रवाई भी की जा चुकी थी. भारत लौटने के बाद उसने सरेंडर किया और तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया.

कौन है राजीव रंगीला?

राजीव रंगीला मूल रूप से एक फार्मास्युटिकल कारोबारी है. जांच एजेंसियों के अनुसार वह मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े व्यवसाय में सक्रिय रहा है. राजीव रंगीला का नाम इस साल उस वक्त चर्चा में आया, जब दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले की जांच के दौरान उसका नाम कथित रूप से मुख्य लाभार्थी के रूप में सामने आया. जांच में यह भी सामने आया कि वह दिल्ली के पूर्वी इलाके का निवासी है और उसके पास दिल्ली, हरियाणा तथा उत्तराखंड में संपत्तियां हैं.

राजीव रंगीला कौन है?

राजीव रंगीला कौन है?

2014 में चुनाव भी लड़ चुका है

राजीव रंगीला सिर्फ कारोबारी ही नहीं रहा, बल्कि राजनीति में भी किस्मत आजमा चुका है. जांच एजेंसी के अनुसार उसने वर्ष 2014 में हरियाणा के करनाल विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. हालांकि उसे चुनाव में सफलता नहीं मिली थी.

क्या है 700 करोड़ रुपये का घोटाला?

यह कथित घोटाला डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) से जुड़ी मेडिकल उपकरण खरीद प्रक्रिया से संबंधित बताया जा रहा है. CPA दिल्ली सरकार के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए दवाएं, वैक्सीन और मेडिकल उपकरण खरीदने वाली नोडल एजेंसी है. विजिलेंस विभाग को मिली कई शिकायतों के बाद CPA कार्यालयों में छापेमारी की गई थी. इसी दौरान कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ और मामला ACB तक पहुंचा.

2014 के चुनाव प्रचार का पोस्टर

2014 के चुनाव प्रचार का पोस्टर

टेंडर में हेराफेरी का आरोप

ACB का आरोप है कि राजीव रंगीला ने सरकारी अधिकारियों, निर्माताओं और बिचौलियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की. जांच एजेंसी का दावा है कि उसने फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी खरीद प्रक्रिया को प्रभावित किया और करोड़ों रुपये का फायदा उठाया. आरोप है कि जिन लोगों के नाम पर कंपनियां बनाई गईं, उनमें उसके नौकर और चाय बेचने वाले तक शामिल थे.

कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करने का आरोप

जांच में जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
ACB का आरोप है कि इन कंपनियों के नाम भले ही अलग-अलग लोगों के नाम पर थे, लेकिन वास्तविक संचालन और नियंत्रण राजीव रंगीला के हाथ में था. जांच एजेंसी का दावा है कि पहले से तय निर्माता कंपनियों को टेंडर दिलाने के लिए विशेष शर्तें तैयार की जाती थीं और बाद में आपूर्ति से जुड़े आदेश इन्हीं कंपनियों को दिलाए जाते थे.

2 मशीनों के टेंडर से 448 मशीनों का ऑर्डर

मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शुरुआत में केवल दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर को बढ़ाकर 448 मशीनों की आपूर्ति तक पहुंचा दिया गया. विजिलेंस रिपोर्ट में सीआर रेडियो, एनेस्थीसिया मशीन, विशेष चिकित्सा उपकरण और ओरल डिहाइड्रेशन सॉल्यूशन की खरीद में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है.

अमेरिका भाग गया था रंगीला

ACB के अनुसार मामले में पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राजीव रंगीला भारत छोड़कर अमेरिका चला गया था. जांच एजेंसी ने उसे कई बार पूछताछ के लिए नोटिस भेजे, लेकिन वह पेश नहीं हुआ. इसके बाद उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC), गैर-जमानती वारंट (NBW) और उद्घोषणा की कार्रवाई शुरू की गई.

कोर्ट ने 4 दिन की कस्टडी दी

राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किए जाने के बाद विशेष न्यायाधीश (ACB) विद्या प्रकाश ने राजीव रंगीला को 29 सितंबर तक चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी को मामले की कार्यप्रणाली, अन्य आरोपियों की भूमिका, मनी ट्रेल, गायब फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के लिए हिरासत की जरूरत है.

वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, इसलिए पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं है. हालांकि अदालत ने ACB की दलीलों को स्वीकार करते हुए कस्टडी मंजूर कर दी.

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