- मोहम्मद शहीद फैसल भारत में जन्मे एक आतंकवादी हैं जिनका स्थायी पता बेंगलुरु के यशवंतपुर में है.
- गृह मंत्रालय ने उन्हें पाकिस्तान में रहते हुए लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा और ISIS से जोड़ा है.
- वह सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की भर्ती, हथियार प्रशिक्षण और फंडिंग की गतिविधियों में शामिल हैं.
Mohammed Shaheed Faisal: मोहम्मद शहीद फैसल, उस्ताद, मुहांदीस, जाकिर... ये नाम भले चार हो लेकिन आदमी एक ही है. 40 साल का यह शख्स भारत में जन्मा लेकिन आज देश के सबसे बड़े दुश्मनों की लिस्ट में इसका भी नाम शामिल है. शुक्रवार 4 जुलाई को भारत सरकार ने पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहे जिन 23 दहशतगर्दों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है, उसमें मोहम्मद शहीद का नाम सबसे अंतिम पायदान पर है. मोहम्मद शहीद फैसल का नाम लिस्ट में भले ही सबसे नीचे हो लेकिन आतंकियों की इस सूची वह इकलौता गैर कश्मीरी भारतीय है.
बेंगलोर में जन्म, लश्कर, जैद, अलकायदा और ISIS से लिंक
गृह मंत्रालय के गजट के अनुसार मोहम्मद शहीद का स्थायी पता बेंगलोर के यशवंतपुर स्थित मॉडल कॉलोनी है. उसके पिता का नाम मोहम्मद मूसा है. भारतीय जांच एजेंसियों का मानना है कि मोहम्मद शहीद अभी पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है. शहीद फैसल कितना खूंखार है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसका लिंक लश्कर-ए-तैयबा के साथ-साथ जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा और ISIS से भी है.

गृह मंत्रालय के गजट में मोहम्मद शहीद फैसल के बारे में दी गई जानकारी.
आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग, फंडिंग जुटाने का आरोप
गजट के अनुसार मोहम्मद शहीद पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया के जरिए आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्ती करता है. पाकिस्तान में हथियार की ट्रेनिंग की व्यवस्था करता है. आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाता है. भारत में हुए कई आतंकी घटनाओं में वह शामिल रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी NIA मोहम्मद शहीद फैसल को 10 सालों से तलाश रही है. उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी रखा है.
बीटेक के बाद नौकरी फिर सऊदी से आतंक की ओर मुड़ा
बताया जाता है कि शहीद फैसल ने रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की. बीटेक की डिग्री के बाद फैसल ने कुछ साल बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया और इसके बाद सऊदी अरब चला गया. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार रियाद में उसने अपने लिए जाकिर और उस्ताद नाम का इस्तेमाल किया. कर्नाटक पुलिस के रडार वह पहली बार साल 2012 में तब आया, जब बेंगलुरु और हुबली में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का हैंडलर रहते हुए उसने दक्षिणपंथी नेताओं की हत्या की साजिश रची.
2002 अक्षरधाम हमले के आरोपी सुफियान का दामाद
रिपोर्ट की माने तो फैसल हैदराबाद के रहने वाले फरहतुल्ला घोरी उर्फ अबू सुफियान का दामाद है. फरहतुल्ला 2002 में गुजरात में हुए अक्षरधाम हमले का मास्टरमाइंड है और उसे साल 2018 में भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया था. उसके भी पाकिस्तान में कहीं छिपे होने का शक है. फरहतुल्ला वहां आतंकी भर्ती और फंडिंग का काम संभालता है.
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