जम्मू-कश्मीर में 370 के खात्मे ने बदली तस्वीर! आतंकी घटनाओं में 77% की कमी, खत्म हुई पत्थरबाजी
पांच अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने ही दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया था.
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में जब से टारगेट किलिंग हुई है, एक बार फिर घाटी में डर का माहौल है. अमरनाथ यात्रा के बीच हुई इस एक वारदात ने फिर आंतकियों की बौखलाहट को स्पष्ट कर दिया है. यह कोई पहली बार नहीं है जब पांच अगस्त से पहले आतंकियों ने इस तरह से हमले किए हों. जब से केंद्र की मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म किया है, पाकिस्तान परस्त आतंकी नापाक साजिश करते रहते हैं.
हाल ही में दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में भी दो हिंदू मजदूरों की आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने धर्म पूछकर हत्या कर दी थी. इस वारदात को आतंकी मोहम्मद लतीफ ने अंजाम दिया था. यह वहीं आतंकी है जिसने इस साल 22 जुलाई को अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की लाल चौक इलाके में हत्या कर दी थी.
बड़ी बात यह है कि यह आतंकी हमला उसी तरह से किया गया जिस तरह से पिछले साल पहलगाम में धर्म पूछकर हिंदू पर्यटकों को मौत के घाट उतारा था. जम्मू-कश्मीर में जब से अनुच्छेद 370 हटाया गया है, आतंकियों के नेटवर्क को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है. उनकी फंडिंग मुश्किल हुई है, अलगाववादी नेतृत्व का प्रभाव कुछ कम हुआ है और पत्थरबाजी की घटनाएं भी भारी कमी दर्ज की गई है. इसी वजह से आतंकी मौका देखकर घाटी के शांत माहौल को बिगाड़ने की साजिश रचते रहते हैं.

सुरक्षाबलों को सीधी चुनौती देने के लिए पांच अगस्त से पहले ये आतंकी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि पांच अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने ही दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया था. इसके तहत उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने का ऐलान किया था. इसके जरिए ना सिर्फ जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया गया था बल्कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिए गए थे.
केंद्र सरकार दावा करती है कि जब से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किया गया है, आतंकी घटनाओं में भारी गिरावट देखने को मिली है. दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP) के डेटा को अगर डीकोड करें तो पता चलता है कि पिछले सात सालों में आतंकी घटनाओं में स्पष्ट कमी देखने को मिली है, वहीं कई आतंकियों को भी मौत के घाट उतारा गया है. नीचे दी गई टेबल से 2019 से अब तक का ट्रेंड समझने की कोशिश करते हैं-
| साल | हादसे | नागरिक | सुरक्षा बल | आतंकवादी | कुल |
| 2019 | 135 | 42 | 78 | 163 | 283 |
| 2020 | 140 | 33 | 56 | 232 | 321 |
| 2021 | 153 | 36 | 45 | 193 | 274 |
| 2022 | 151 | 30 | 30 | 193 | 253 |
| 2023 | 72 | 12 | 33 | 87 | 134 |
| 2024 | 61 | 31 | 26 | 69 | 127 |
| 2025 | 35 | 28 | 17 | 46 | 92 |
| 2026 | 9 | 2 | 2 | 11 | 24 |
सोर्स: दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP)
अब ऊपर दी गई टेबल से एक बात स्पष्ट है कि आतंकी घटनाओं में भारी कमी देखने को मिली है. आम नागरिकों की भी जो जान जा रही थी, उसमें भी गिरावट देखने को मिली है. अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद से इसके प्रमाण और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं. वैसे अगर पिछले 20 सालों का ट्रेंड डीकोड किया जाए तो पता चलता है कि यूपीए कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का एक अलग दौर देखने को मिलता था, वहीं 2019 में अनुच्छेद 370 खत्म होने बाद से स्थिति सामान्य होनी शुरू हुई. नीचे दी गई टेबल से बड़ी तस्वीर देखने की कोशिश करते हैं-
| साल | हादसे | नागरिक | सुरक्षा बल | आतंकवादी | कुल |
| 2000 | 1385 | 641 | 441 | 1708 | 2799 |
| 2001 | 2084 | 1024 | 628 | 2345 | 4011 |
| 2002 | 1642 | 837 | 447 | 1758 | 3098 |
| 2003 | 1427 | 563 | 319 | 1504 | 2507 |
| 2004 | 1061 | 437 | 318 | 962 | 1789 |
| 2005 | 1004 | 454 | 220 | 987 | 1717 |
| 2006 | 694 | 256 | 172 | 607 | 1125 |
| 2007 | 427 | 127 | 119 | 498 | 744 |
| 2008 | 261 | 71 | 85 | 382 | 538 |
| 2009 | 208 | 53 | 73 | 247 | 373 |
| 2010 | 189 | 34 | 69 | 258 | 361 |
| 2011 | 119 | 33 | 31 | 117 | 181 |
| 2012 | 70 | 19 | 18 | 84 | 121 |
| 2013 | 84 | 19 | 53 | 100 | 172 |
| 2014 | 91 | 28 | 47 | 114 | 189 |
| 2015 | 86 | 19 | 41 | 115 | 175 |
| 2016 | 112 | 14 | 88 | 165 | 267 |
| 2017 | 163 | 54 | 83 | 220 | 357 |
| 2018 | 206 | 86 | 95 | 271 | 452 |
| 2019 | 135 | 42 | 78 | 163 | 283 |
| 2020 | 140 | 33 | 56 | 232 | 321 |
| 2021 | 153 | 36 | 45 | 193 | 274 |
| 2022 | 151 | 30 | 30 | 193 | 253 |
| 2023 | 72 | 12 | 33 | 87 | 134 |
| 2024 | 61 | 31 | 26 | 69 | 127 |
| 2025 | 35 | 28 | 17 | 46 | 92 |
| 2026 | 9 | 2 | 2 | 11 | 25 |
सोर्स: दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP)
अब ऊपर दी गई टेबल से पता चलता है कि साल 2008 से जम्मू-कश्मीर में स्थिति कुछ सुधरनी शुरू हुई थी, लेकिन 2014 के बाद से स्थिति ज्यादा व्यापक तरीके से बदली. यहां भी 2019 के बाद से तो आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर को काफी हद तक आतंक मुक्त किया गया. वैसे सिर्फ आतंकी ही नहीं मारे गए हैं, अगर पिछले सात साल में देखें तो जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं भी शून्य पर आ चुकी हैं. एक जमाने में जरूर जम्मू-कश्मीर में सैंकड़ों की संख्या में युवा हाथों पर पत्थर ले उतरता था, लेकिन अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद से यह ट्रेंड भी पूरी तरह बदल चुका है. जम्मू-कश्मीर पुलिस और गृह मंत्रालय के आंकड़े इस बात की ओर इशारा भी करते हैं-
| साल | पत्थरबाजी की घटनाएं |
| 2019 | 1999 |
| 2020 | 255 |
| 2021 | 76 |
| 2022 | N.A |
| 2023 | 0 |
सोर्स: जम्मू-कश्मीर पुलिस और गृह मंत्रालय
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