Haldwani Banbhoolpura Violence Case: उत्तराखंड के चर्चित हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने सवाल उठाया कि यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है तो मात्र इसी आधार पर UAPA कैसे लागू किया जा सकता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था और UAPA दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से मिली जमानत को बरकरार रखा और उत्तराखंड सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी. अदालत की टिप्पणियां मामले में UAPA के प्रयोग पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
सुप्रीम कोर्ट में हुई जमानत मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें वर्ष 2024 के हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा मामले के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी. सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य फोकस मामले में UAPA की धाराएं लगाए जाने की वैधता और आवश्यकता पर रहा. न्यायालय ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि केवल हिंसक घटना के आधार पर आतंकवाद विरोधी कानून लागू करना उचित है या नहीं.
-
NDTV World Summit 2026: PM मोदी समेत शामिल होंगे ये बड़े दिग्गज, जानिए क्या कुछ होगा खास? -
NDTV World Summit 2026: दिल्ली में दो दिन दुनिया के दिग्गजों का महामंथन -
NDTV World Summit 2026 का काउंटडाउन शुरू, एक मंच पर जुटेंगे दुनिया के दिग्गज -
NDTV World Summit 2026: 22-23 अक्टूबर को फिर सजेगा दुनिया के दिग्गजों का महामंच, देखिए पहली झलक -
दुनिया की सबसे असरदार और सबसे दमदार आवाजों के साथ लौट रहा है NDTV World Summit, देखिए सिर्फ NDTV पर -
NDTV World Summit 2026: AI, कूटनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर चर्चा, एक मंच पर जमा होंगे दुनिया के दिग्गज -
भारत की आर्थिक बढ़त से मानवता पर AI के खतरों तक, NDTV World Summit 2026 के दूसरे दिन किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया की पहली AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड होंगी शामिल, कृति सेनन भी बनेंगी हिस्सा -
डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी, ग्लोबल ट्रेड... NDTV World Summit में पहले दिन किन-किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया भर में कैसे बदल रहा है भारतीय खाने का स्वाद? वीर सांघवी बताएंगे देसी शेफ्स का ज

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, "यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है, तो मात्र इस आधार पर UAPA कैसे लागू होगा?" उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) और UAPA के तहत आने वाले अपराध अलग-अलग प्रकृति के होते हैं और दोनों को एक समान नहीं माना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मामले में UAPA लगाने के लिए कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों और गंभीर आधारों की आवश्यकता होती है.
UAPA की धाराओं पर अदालत का संदेह
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि मामले में UAPA की धाराएं जोड़ने को लेकर अदालत को गंभीर संदेह है. उनकी टिप्पणी से संकेत मिला कि सुप्रीम कोर्ट यह जांचना चाहता है कि क्या इस मामले में वास्तव में ऐसे तत्व मौजूद थे, जो इसे सामान्य कानून-व्यवस्था के मामले से आगे बढ़ाकर UAPA के दायरे में लाते हों. यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि UAPA देश के सबसे सख्त कानूनों में शामिल है और इसके तहत गिरफ्तारी तथा जमानत के नियम सामान्य मामलों की तुलना में काफी कठोर होते हैं.
उत्तराखंड सरकार ने क्या दलील दी
उत्तराखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने का मामला नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था. उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश पर्याप्त कारणों से रहित है. अभियोजन पक्ष के अनुसार अब्दुल मलिक के घर का इस्तेमाल कथित साजिश की बैठकों के लिए किया गया था और हिंसा पूर्व नियोजित थी. सरकार ने तर्क दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं था.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सरकार की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत स्वतंत्रता किसी अदालत के आदेश की कमी या अपर्याप्तता पर नहीं, बल्कि अभियोजन पक्ष के मामले की मजबूती पर निर्भर करती है." अदालत की इस टिप्पणी को आरोपी के संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी मामले पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि मामले में आरोप साजिश से जुड़े हैं. साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब्दुल मलिक करीब दो वर्षों से जेल में हैं. अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और मुकदमे की प्रक्रिया अभी जारी है.
हाईकोर्ट ने अप्रैल में दी थी जमानत
गौरतलब है कि 15 अप्रैल को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा हिंसा मामले के कथित साजिशकर्ता और मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की थी. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले में दर्ज मुकदमों में उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इसी आदेश को चुनौती देते हुए उत्तराखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी.
यह भी पढ़ें : उत्तराखंड : बनभूलपुरा में 120 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए गए, कर्फ्यू केवल बनभूलपुरा तक ही सीमित
यह भी पढ़ें : हल्द्वानी: अवैध अतिक्रमण वाली जगह पर बनेगा पुलिस थाना, हिंसा के मास्टरमाइंड को भरना होगा करोड़ों का हर्जाना
यह भी पढ़ें : CJI को CEC चयन समिति से बाहर क्यों रखा? चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कानून पर SC के सवाल, केंद्र से मांगा जवाब
यह भी पढ़ें : TVK करूर भगदड़ केस: पीड़ित परिवारों को नौकरी देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु की विजय सरकार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं